राजस्थान यूनिवर्सिटी: छात्र राजनीति बंद, प्रोफेसरों की कुर्सी की राजनीति चालू, चहेतों के पास एक्स्ट्रा चार्ज!
Mukesh Sharma | Oct 19, 2026, 18:21 IST
राजस्थान यूनिवर्सिटी में छात्र राजनीति भले ही बंद हो, लेकिन प्रोफेसरों की कुर्सी राजनीति जारी है।
राजस्थान यूनिवर्सिटी में छात्र संघ चुनाव पर रोक के बाद छात्र राजनीति भले ही बंद हो, लेकिन प्रोफेसरों की कुर्सी राजनीति जारी है। कई प्रोफेसरों और एसोसिएट प्रोफेसरों के पास एक से ज्यादा एक्स्ट्रा चार्ज हैं। किसी के पास तीन तो किसी के पास आठ तक एक्स्ट्रा चार्ज हैं। सीनियर प्रोफेसरों को दरकिनार कर जूनियर चहेतों को चार्ज दिया जा रहा है।
राजस्थान यूनिवर्सिटी राज्य की सबसे बड़ी और प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी मानी जाती रही है। लेकिन, पिछले कई सालों से यहां शैक्षणिक स्तर लगातार गिरता जा रहा है। 2023 तक छात्र संघ चुनाव को इसके लिए जिम्मेदार बताया जाता था। लेकिन तत्कालीन गहलोत सरकार ने 2023 में छात्र संघ चुनाव पर रोक लगा दी थी।
वर्तमान भजनलाल शर्मा सरकार ने भी छात्र संघ चुनाव पर रोक को बरकरार रखा है। राजस्थान हाई कोर्ट (Rajasthan High Court) ने भी 2025 में छात्र संघ चुनाव करवाने के आदेश देने से इंकार कर दिया था और सरकार को एक व्यापक पॉलिसी बनाने को कहा था।
लेकिन, सच्चाई यह है कि यूनिवर्सिटी के गिरते स्तर के लिए सिर्फ छात्र या छात्र संघ चुनाव की जिम्मेदार नहीं हैं। बल्कि यूनिवर्सिटी प्रशासन और शिक्षक भी बराबर के जिम्मेदार हैं। हालात यह हैं कि राजस्थान यूनिवर्सिटी में शिक्षक पढ़ाई से ज्यादा ज्यादा से ज्यादा काम या विभाग का एक्स्ट्रा चार्ज (Extra Charge) लेने में व्यस्त रहते हैं। हर कुलगुरु (वीसी) भी अपने चहेतों को उपकृत करने में पीछे नहीं रहते।
यूनिवर्सिटी में अनेक प्रोफेसर,एसोसिएट प्रोफेसर एवं असिस्टेंट प्रोफेसर पिछली कुलगुरु प्रो.अल्पना कटेजा के कार्यकाल में अनेक पदों पर काबिज थे। वर्तमान कुलपति के कार्यकाल में भी यही लोग काबिज हैं।
हालात यह हैं कि विभाग, केंद्र या कॉलेज के छात्र इनको ढूंढते रहते हैं लेकिन, यह मिलते ही नहीं हैं। क्यों कि इनके पास अपने मूल काम के अलावा तीन से 8 कार्यों का एक्स्ट्रा चार्ज है। इंतजार के बाद छात्र परेशान होकर घर चले जाते हैं।
सरकार ने भले ही छात्र संघ चुनावों पर रोक लगाकर छात्र राजनीति पर विराम लगा रखा हो। लेकिन,सरकार के पास यूनिवर्सिटी के शिक्षकों की आपसी राजनीति पर लगाम लगाने का कोई उपाय नहीं है।
इस कारण हर कुलगुरु (वीसी) अपने चहेतों को उपकृत करता है। इस काम में अधिकांश सीनियर प्रोफेसर दरकिनार कर दिए जाते हैं और उनसे जूनियर चहेतों को एक से ज्यादा विभाग व सेंटर सहित दूसरे काम दे दिए जाते हैं। इसके लिए योग्यता का कोई पैमाना नहीं है, सिर्फ कुलगुरु या राजनीति आकाओं की कृपा ही जरुरी है।
प्रो.सरीना कालिया- प्रिंसिपल महाराजा कॉलेज, चीफ वार्डन महिला छात्रावास, एचओडी, फिजिकल एजूकेशन, वार्डन माही महिला छात्रावास, कन्वीनर यूएम कमेट और चीफ वार्डन गोखले छात्रावास।
प्रो.भवानीशंकर शर्मा- एचओडी, बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट, डीन कामर्स, डायरेक्टर पीजी स्कूल ऑफ कामर्स , कन्वीनर सीएएस कमेटी,कन्वीनर,आवास आवंटन कमेटी,कन्वीनर रिवेल्यूऐशन,कन्वीनर बोर्ड ऑफ स्टडीज। इसके अलावा प्रो.शर्मा 19 सितंबर तक कामर्स कॉलेज के प्रिसिंपल भी रहे हैं।
प्रो.राजेश शर्मा,एसोसिएट प्रोफेसर- एचओडी पॉलिटिकल साईंस डिपार्टमेंट,डायरेक्टर पीजी स्कूल ऑफ साईंस और यूनिवर्सिटी पीआरओ।
प्रो.राजेश पूनिया- डायरेक्टर, सेंट्रल लाईब्रेरी, डीन आर्ट डिपार्टमेंट, सिंडीकेट मेंबर और कन्वीनर बोर्ड ऑफ इंस्पेक्शन कमेटी।
प्रो.प्रवीण शर्मा- प्रिंसिपल कॉमर्स कॉलेज,एचओडी इकोनोमिक डिपार्टमेंट और यूनिवर्सिटी स्टूडेंट वैलफेयर डीन।
राजस्थान यूनिवर्सिटी (University of Rajasthan) में लंबे समय से इसी प्रकार एक्स्ट्रा चार्ज देने की परंपरा चली आ रही है। इसको लेकर समय-समय पर आरोप-प्रत्यारोप भी लगते रहे हैं। लेकिन,हर कुलगुरु के कार्यकाल में चहेतों को उपकृत करने का सिलसिल चलता रहा है।
पूर्व कुलपति अल्पना कटेचा के कार्यकाल में इसी कारण पीएचडी एडमिशन में धांधली सामने आई थीं। छात्रों ने इसके विरोध में प्रदर्शन भी किए थे। इसी कारण नए कुलगुरु प्रो.बी.पी.सारस्वत ने कार्यभार संभालने के बाद कुछ एडमिशन रद्ध किए हैं।
यह सही है कि वर्तमान में कुछ प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर के पास कई एक्स्ट्रा चार्ज हैं। यह कहना भी गलत नहीं है कि पिछली वीसी ने मनमर्जी की थी। हम इस संबंध में नियमों का भी अध्ययन कर रहे हैं, लेकिन,अब नए वीसी आए हैं और मुझे लगता है कि काम का बंटवारा ज्यादा लोगों में होगा। एक्सट्रा चार्ज में टीचर को कोई अतिरिक्त पैसा नहीं मिलता,लेकिन यह प्रतिष्ठा का मामला जरुर है।
नवीन शर्मा, अध्यक्ष,राजस्थान यूनिवर्सिटी टीचर एसोसिएशन
वर्तमान भजनलाल शर्मा सरकार ने भी छात्र संघ चुनाव पर रोक को बरकरार रखा है। राजस्थान हाई कोर्ट (Rajasthan High Court) ने भी 2025 में छात्र संघ चुनाव करवाने के आदेश देने से इंकार कर दिया था और सरकार को एक व्यापक पॉलिसी बनाने को कहा था।
लेकिन, सच्चाई यह है कि यूनिवर्सिटी के गिरते स्तर के लिए सिर्फ छात्र या छात्र संघ चुनाव की जिम्मेदार नहीं हैं। बल्कि यूनिवर्सिटी प्रशासन और शिक्षक भी बराबर के जिम्मेदार हैं। हालात यह हैं कि राजस्थान यूनिवर्सिटी में शिक्षक पढ़ाई से ज्यादा ज्यादा से ज्यादा काम या विभाग का एक्स्ट्रा चार्ज (Extra Charge) लेने में व्यस्त रहते हैं। हर कुलगुरु (वीसी) भी अपने चहेतों को उपकृत करने में पीछे नहीं रहते।
कुलगुरु बदले लेकिन, नहीं बदले हालात
हालात यह हैं कि विभाग, केंद्र या कॉलेज के छात्र इनको ढूंढते रहते हैं लेकिन, यह मिलते ही नहीं हैं। क्यों कि इनके पास अपने मूल काम के अलावा तीन से 8 कार्यों का एक्स्ट्रा चार्ज है। इंतजार के बाद छात्र परेशान होकर घर चले जाते हैं।
सीनियर दरकिनार और चहेते जूनियर उपकृत
इस कारण हर कुलगुरु (वीसी) अपने चहेतों को उपकृत करता है। इस काम में अधिकांश सीनियर प्रोफेसर दरकिनार कर दिए जाते हैं और उनसे जूनियर चहेतों को एक से ज्यादा विभाग व सेंटर सहित दूसरे काम दे दिए जाते हैं। इसके लिए योग्यता का कोई पैमाना नहीं है, सिर्फ कुलगुरु या राजनीति आकाओं की कृपा ही जरुरी है।
यूनिवर्सिटी में यह हैं हालात
प्रो.भवानीशंकर शर्मा- एचओडी, बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट, डीन कामर्स, डायरेक्टर पीजी स्कूल ऑफ कामर्स , कन्वीनर सीएएस कमेटी,कन्वीनर,आवास आवंटन कमेटी,कन्वीनर रिवेल्यूऐशन,कन्वीनर बोर्ड ऑफ स्टडीज। इसके अलावा प्रो.शर्मा 19 सितंबर तक कामर्स कॉलेज के प्रिसिंपल भी रहे हैं।
प्रो.राजेश शर्मा,एसोसिएट प्रोफेसर- एचओडी पॉलिटिकल साईंस डिपार्टमेंट,डायरेक्टर पीजी स्कूल ऑफ साईंस और यूनिवर्सिटी पीआरओ।
प्रो.राजेश पूनिया- डायरेक्टर, सेंट्रल लाईब्रेरी, डीन आर्ट डिपार्टमेंट, सिंडीकेट मेंबर और कन्वीनर बोर्ड ऑफ इंस्पेक्शन कमेटी।
प्रो.प्रवीण शर्मा- प्रिंसिपल कॉमर्स कॉलेज,एचओडी इकोनोमिक डिपार्टमेंट और यूनिवर्सिटी स्टूडेंट वैलफेयर डीन।
लंबे समय से परंपरा
पूर्व कुलपति अल्पना कटेचा के कार्यकाल में इसी कारण पीएचडी एडमिशन में धांधली सामने आई थीं। छात्रों ने इसके विरोध में प्रदर्शन भी किए थे। इसी कारण नए कुलगुरु प्रो.बी.पी.सारस्वत ने कार्यभार संभालने के बाद कुछ एडमिशन रद्ध किए हैं।
इनका कहना है:-
नवीन शर्मा, अध्यक्ष,राजस्थान यूनिवर्सिटी टीचर एसोसिएशन
Rajasthan Police Promotion: 52 इंस्पेक्टरों को डीएसपी बनाने के आदेश जारी, डीजीपी ने दी बधाई
By Mukesh Sharma
युवा वर्ष मानने से बदलेगी तस्वीर? क्योंकि MP में कुल 17 लाख बेरोजगार, 6 लाख इसी साल के
By Atul Dwivedi
कोरबा में धर्मांतरण के आरोप पर बवाल, प्रार्थना सभा में पहुंचे बजरंग दल के कार्यकर्ता, पुलिस जांच में जुटी
By Umeshwari Baghel
आसमान से फूलों की बारिश, जमीन पर रंगोली! दशहरे पर बाबा महाकाल की सवारी का दिखेगा अद्भुत नजारा
By Amresh Kushwaha
वरिष्ठ IAS अधिकारी की फर्जी आईडी बनाकर लोगों को ठगने के सबूत मिले, 11 राज्यों में ठगी के तार; कानपुर से 2 आरोपी गिरफ्तार
By VINAY VERMA
MP की बिजली कंपनियों का डिजिटल सिस्टम, चोरी रोकने के लिए ऐप, फिर भी शिकायतों पर एरर!
By Atul Dwivedi
छत्तीसगढ़ के बस्तर में पर्यटकों के लिए रोमांचक खबर, तय समय से 10 दिन पहले खुलेगी प्रसिद्ध कोटमसर गुफा
By Umeshwari Baghel