111 कार्यकर्ताओं और 26 नेताओं के इस्तीफे से डोंगरगढ़ भाजपा हुई कमजोर

Aishwarya Dwivedi | Aug 04, 2026, 16:24 IST
डोंगरगढ़-बीजेपी-इस्तीफा-संकट
छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ में 111 कार्यकर्ताओं और 26 नेताओं के इस्तीफों के बाद सह संयोजक पंकज अग्रवाल ने भी पद छोड़ दिया है। लगातार हो रही बगावत से भाजपा संगठन बेहद कमजोर हो गया है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • डोंगरगढ़ में थम नहीं रहा भाजपाइयों का इस्तीफा।
  • अंदरूनी कलह से डोंगरगढ़ में भाजपा हुई कमजोर।
  • 111 कार्यकर्ताओं के बाद पंकज अग्रवाल ने पद छोड़ा।
  • नई नियुक्तियों के बावजूद डोंगरगढ़ भाजपा में बढ़ा असंतोष।
  • संगठनात्मक खींचतान से डोंगरगढ़ भाजपा की पकड़ ढीली।

डोंगरगढ़ में कमजोर पड़ता भाजपा संगठन

डोंगरगढ़ में भारतीय जनता पार्टी (BJP – Bharatiya Janata Party) की स्थिति लगातार नाजुक होती जा रही है। पार्टी के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान अब सरेआम हो चुकी है। कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के लगातार इस्तीफों से पार्टी की पकड़ ढीली पड़ गई है।



हाल ही में पार्टी ने व्यापार प्रकोष्ठ की नई जिला कार्यकारिणी की घोषणा की थी। पार्टी को उम्मीद थी कि इससे कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर हो जाएगी। हालांकि, नई नियुक्तियों के अगले ही दिन मंडल सह संयोजक पंकज अग्रवाल ने पद छोड़ दिया। इस फैसले ने साफ कर दिया कि संगठन के भीतर का असंतोष काफी गहरा हो चुका है।



पंकज अग्रवाल ने दिया इस्तीफा

पंकज अग्रवाल ने भाजपा जिलाध्यक्ष को अपना इस्तीफा पत्र भेज दिया है। वे पार्टी के सूचना प्रौद्योगिकी (IT – Information Technology) सेल में काफी समय से सक्रिय थे।



उन्होंने अपने पत्र में लिखा कि वे निजी और व्यावसायिक कारणों से इस्तीफा दे रहे हैं। वे अब संगठन को समय देने में असमर्थ हैं। इसी वजह से उन्होंने तत्काल प्रभाव से अपने पद से हटने का निर्णय लिया है।



पंकज ने पत्र में पार्टी नेतृत्व के मार्गदर्शन और अवसर के लिए आभार जताया। उन्होंने अपने इस्तीफे में किसी नेता या पदाधिकारी पर सीधा आरोप नहीं लगाया है। लेकिन, उनके इस कदम से पार्टी की अंदरूनी कमजोरी फिर से उजागर हो गई है।



डोंगरगढ़ भाजपा


सामूहिक इस्तीफों से बिगड़े हालात

डोंगरगढ़ में भाजपा की कमजोरी की शुरुआत कुछ समय पहले सामूहिक इस्तीफों से हुई थी। सबसे पहले 111 कार्यकर्ताओं ने एक साथ पार्टी की प्राथमिक सदस्यता छोड़ी थी। इसके बाद 26 स्थानीय नेताओं ने भी अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था।



इसी दौरान भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM – Bharatiya Janata Yuva Morcha) के पूर्व अध्यक्ष सुमित मिश्रा का मामला भी उछला था। सुमित ने पहले अपने पद से इस्तीफा दिया और बाद में उसे वापस ले लिया।



इन तमाम घटनाओं ने डोंगरगढ़ में भाजपा की जमीनी पकड़ को हिलाकर रख दिया है। एक के बाद एक हो रहे इन घटनाक्रमों से आम कार्यकर्ताओं का मनोबल पूरी तरह टूट चुका है।



पार्टी नेतृत्व के सामने बड़ी चुनौती

डोंगरगढ़ में लगातार हो रही इस टूट से पार्टी का कैडर बिखर रहा है। चुनावी तैयारियों और स्थानीय राजनीति के लिहाज से यह भाजपा के लिए बड़ा झटका है। जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं का असंतोष दूर न हो पाने से पार्टी का आधार कमजोर हो रहा है।



अब सभी की निगाहें राज्य और जिला स्तर के बड़े नेताओं पर टिकी हैं। अगर नेतृत्व ने समय रहते असंतुष्ट धड़े से संवाद नहीं किया, तो स्थिति और बिगड़ सकती है। फिलहाल, डोंगरगढ़ भाजपा की अंदरूनी कलह राजनीतिक गलियारों में चर्चा का मुख्य विषय बनी हुई है।



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