छत्तीसगढ़ में सूखे नशे पर एक्शन, 198 ड्रग तस्कर पहुंचे जेल
समझें क्या है पूरा मामला
रायपुर पुलिस कमिश्नरी ने सूखे नशे के खिलाफ अभियान चलाया है। पुलिस ने कोर्ट के मामलों की नियमित निगरानी शुरू कर दी है। इसके लिए विशेष अधिकारियों की तैनाती की गई है। मात्र 6 महीने के भीतर 198 ड्रग तस्करों को सजा मिली है। अपराधियों को 7 से लेकर 20 साल तक की जेल हुई है।
रायपुर में पुलिस की सख्त मॉनिटरिंग
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में नशे के खिलाफ पुलिस बेहद गंभीर है। पुलिस कमिश्नरी ने तस्करी के मामलों में सजा सुनिश्चित करने पर ध्यान दिया है। ट्रायल मॉनिटरिंग के तहत गवाहों और अदालती सुनवाई की रोज निगरानी होती है।
इसके लिए अलग से विशेष अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। यह अधिकारी हर दिन कोर्ट जाकर मामलों की प्रगति को देखते हैं। इस ठोस पैरवी का असर अब साफ दिखने लगा है।
फास्ट ट्रैक कोर्ट की तरह हुई सुनवाई
रायपुर की अदालतें इन मामलों में बेहद तेजी से काम कर रही हैं। यहां फास्ट ट्रैक कोर्ट की तरह हर दिन सुनवाई की जा रही है। आरोपियों की गिरफ्तारी के 12 महीने के भीतर सजा दी जा रही है।
इस साल शुरुआती 6 महीनों में पिछले वर्ष के 128 मामलों की सुनवाई पूरी हुई। कोर्ट ने इन मामलों में कुल 198 तस्करों को कड़ी सजा सुनाई है। इनमें से 34 मामलों में अपराधियों को 20 साल तक की जेल हुई है।
विशेष अदालतों ने सुनाया बड़ा फैसला
नशे के इस काले कारोबार पर अदालतों ने सख्त रुख अपनाया है। विशेष न्यायालय की जज किरण थवाईत ने 63 मामलों में फैसला सुनाया है। उन्होंने इन मामलों में आरोपियों को दोषी पाकर सजा दी।
इसके साथ ही जज पंकज सिन्हा की अदालत ने 52 मामलों में फैसला दिया। न्यायाधीश शैलेष शर्मा की अदालत ने भी 13 मामलों में दोषसिद्धि दर्ज की है। इन फैसलों से नशा तस्करों के हौसले पूरी तरह टूट गए हैं।
अपराधियों की गाड़ियां अब होंगी नीलाम
पुलिस केवल तस्करों को जेल भेजने तक ही सीमित नहीं है। मादक पदार्थों की तस्करी में इस्तेमाल हुए वाहनों को भी जब्त किया गया है। अब पुलिस इन 115 वाहनों को नीलाम करने की तैयारी में है।
नीलाम होने वाले वाहनों में 8 कारें शामिल हैं। इसके साथ ही 2 ऑटो और 1 ई-रिक्शा भी बेचा जाएगा। पुलिस 104 बाइक और मोपेड की नीलामी भी करने वाली है। इसके लिए कोर्ट में अर्जी दी जा चुकी है।
तस्करों की आर्थिक कमर तोड़ी गई
रायपुर पुलिस ने नशा माफियाओं के खिलाफ बड़ी आर्थिक चोट की है। पुलिस ने सफेमा (SAFEMA) कानून के तहत तस्करों की संपत्तियां कुर्क की हैं। इसके तहत कुल 8 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की गई है।
कुख्यात हिस्ट्रीशीटर रवि साहू की 7.60 करोड़ रुपए की संपत्ति कुर्क हुई है। तस्कर मुकेश बनिया की 1.19 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की गई है। रुपेंद्र सिंह की 15 लाख रुपए की संपत्ति भी पुलिस ने ले ली है। उरला के एक अन्य आरोपी की 50 हजार की संपत्ति कुर्क हुई है।
दूसरे राज्यों के तस्कर भी गिरफ्तार
रायपुर कमिश्नरी में अब तक 335 से अधिक तस्करों को पकड़ा जा चुका है। पुलिस ने बाहरी राज्यों में छिपे अपराधियों पर भी शिकंजा कसा है। गिरफ्तार आरोपियों में से 78 तस्कर दूसरे राज्यों के निवासी हैं।
रायपुर पुलिस की टीमें इन्हें बाहरी राज्यों से पकड़कर यहां लाई हैं। पुलिस कमिश्नर ने साफ किया है कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। अपराधियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
FAQ
- भारत में मादक पदार्थों और नशीली दवाओं की तस्करी रोकने के लिए कौन सा सख्त कानून है?
उत्तर: भारत में इसके लिए NDPS (Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act, 1985) यानी स्वापक औषधि और मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम लागू है, जिसके तहत कड़ी सजा और संपत्ति कुर्की का प्रावधान है। - तस्करों की अवैध संपत्ति कुर्क करने के लिए इस्तेमाल होने वाला 'सफेमा' (SAFEMA) कानून क्या है?
उत्तर: सफेमा का पूरा नाम तस्कर और विदेशी मुद्रा कूटसाधक (संपत्ति जब्ती) अधिनियम, 1976 है। इसके तहत सरकार को तस्करों द्वारा अवैध रूप से कमाई गई अचल और चल संपत्तियों को जब्त करने का पूरा अधिकार मिलता है। - पुलिसिंग व्यवस्था में 'कमिश्नरी प्रणाली' (Commissioner System) क्या होती है?
उत्तर: इस प्रणाली में पुलिस प्रमुख यानी पुलिस कमिश्नर को मजिस्ट्रेट और कानून-व्यवस्था से जुड़ी कई प्रशासनिक शक्तियां सीधे मिल जाती हैं, जिससे ड्रग्स और बड़े अपराधों के खिलाफ त्वरित फैसले और सख्त कार्रवाई संभव हो पाती है।
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