दुर्ग में 500 करोड़ का जमीन घोटाला: भुइंया सॉफ्टवेयर हैकिंग से हड़प ली 765 एकड़ भूमि,आरोपी गिरफ्तार

Harrison Masih | Aug 29, 2025, 15:43 IST
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दुर्ग जिले में जमीन के रिकॉर्ड से जुड़ा ऐसा खेल सामने आया है, जिसने सभी को चौंका दिया। भुइंया सॉफ्टवेयर हैकिंग, फर्जी खसरे और करोड़ों के लोन की पूरी साज़िश कैसे रची गई?

Durg 765 Acres Land Scam: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में जमीन से जुड़ा अब तक का सबसे बड़ा घोटाला सामने आया है। पुलिस ने भुइंया सॉफ्टवेयर हैकिंग और फर्जी बंटवारे के जरिए करोड़ों की जमीन और बैंक लोन हड़पने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस मामले में नंदिनी थाना पुलिस ने भिलाई निवासी नंद किशोर साहू को गिरफ्तार किया है।



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कैसे किया गया 765 एकड़ जमीन घोटाला?

आरोपियों ने ऑनलाइन राजस्व अभिलेख (भुइंया सॉफ्टवेयर) में हैकिंग कर मूल खसरा नंबरों से छेड़छाड़ की। नए 52 बोगस खसरा नंबर बनाए गए और 765 एकड़ भूमि को अलग-अलग व्यक्तियों के नाम दर्ज कर दिया गया।



इनमें से आधी जमीन शासकीय और आधी निजी थी, जिसकी वर्तमान बाजार कीमत लगभग 500 करोड़ रूपए आंकी गई है। फर्जी रिकॉर्ड के आधार पर आरोपियों ने बैंकों से मोटे लोन लिए और रकम निजी उपयोग में लगा दी।



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बैंक लोन और निवेश

खुलासा कैसे हुआ?

यह मामला तब सामने आया जब एक व्यक्ति ने इन फर्जी खसरा नंबरों के आधार पर एचडीएफसी बैंक से लोन लेने की कोशिश की। बैंक ने जब जमीन के दस्तावेजों की जांच कराई तो गड़बड़ी पकड़ में आई। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की और बड़ा नेटवर्क सामने आया।



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दुर्ग भूमि घोटाला क्या है?

  1. भुइंया सॉफ्टवेयर हैकिंग:
    जमीन के ऑनलाइन रिकॉर्ड (भुइंया सॉफ्टवेयर) में हैकिंग कर मूल खसरा नंबरों से छेड़छाड़ की गई और 52 फर्जी खसरा नंबर बना दिए गए।
  2. 765 एकड़ जमीन घोटाला:
    मुरमुंदा, अछोटी, चेटुवा और बोरसी गांव की 765 एकड़ जमीन (आधी सरकारी, आधी निजी) का गलत बंटवारा कर फर्जी नाम दर्ज किए गए।
  3. बैंक लोन में गड़बड़ी:
    इन्हीं फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भारतीय स्टेट बैंक नंदिनी शाखा से 36 लाख रुपये का लोन लिया गया और रकम निजी कंपनी में निवेश कर दी गई।
  4. 500 करोड़ का जमीन घोटाला :
    सरकारी और निजी जमीनों की हेराफेरी से जुड़ा यह घोटाला करीब 500 करोड़ रुपये की जमीन से संबंधित है, जो मुख्य मार्गों से लगी बेशकीमती संपत्ति है।
  5. पुलिस जांच और गिरफ्तारियां:
    पुलिस ने भिलाई निवासी नंद किशोर साहू को गिरफ्तार किया है। दो पटवारियों की आईडी इस्तेमाल होने की पुष्टि पर उन्हें निलंबित कर दिया गया है। मामला अभी जांच में है और और भी खुलासे हो सकते हैं।

पटवारियों पर गाज

प्राथमिक जांच में पाया गया कि इस फर्जीवाड़े में पाटन के पटवारी मनोज नायक और अहिवारा के पटवारी कृष्ण कुमार सिन्हा की आईडी का इस्तेमाल किया गया। एनआईसी से जानकारी मिलने के बाद दोनों पटवारियों को निलंबित कर दिया गया है। आशंका है कि इस घोटाले के तार रायपुर, कोरबा सहित अन्य जिलों से भी जुड़े हो सकते हैं।



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पुलिस की कार्रवाई

नंदिनी थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धारा 318(4), 338, 336(3), 340(2), 3(5) बीएनएस और 66(सी) आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि आरोपियों से पूछताछ जारी है और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।



इस घोटाले में कई और लोगों की संलिप्तता की जांच भी की जा रही है। यह मामला सिर्फ जमीन के फर्जीवाड़े तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सरकारी सिस्टम की सुरक्षा खामियां, बैंकिंग सिस्टम की लापरवाही और भूमाफियाओं की गहरी जड़ें भी उजागर हुई हैं।



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