जनता से बदसलूकी पड़ी भारी! दुर्ग जनपद CEO सस्पेंड, वीडियो वायरल होते ही बड़ा एक्शन

VINAY VERMA | Jun 01, 2026, 12:58 IST
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दुर्ग में जन समस्या निवारण शिविर के दौरान एक अधिकारी पर जनता से अभद्र व्यवहार का आरोप लगते ही मामला तूल पकड़ गया। वीडियो वायरल होते ही प्रशासन हरकत में आया, जांच के बाद CEO रूपेश कुमार पाण्डेय को तत्काल निलंबित कर दिया गया है ।

News in Short:

  • जन समस्या शिविर में अभद्रता का आरोप।
  • वीडियो वायरल होने के बाद कार्रवाई।
  • कारण बताओ नोटिस का जवाब खारिज।
  • CEO रूपेश पाण्डेय तत्काल निलंबित।

News in Detail:

छत्तीसगढ़ सरकार सुशासन तिहार के जरिए जनता की समस्याएं सुनने का दावा कर रही है। वहीं दुर्ग जिले से सामने आई एक घटना ने पूरे अभियान पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्राम थनौद में आयोजित जन समस्या निवारण शिविर के दौरान जनपद पंचायत दुर्ग के CEO रूपेश कुमार पाण्डेय का कथित अभद्र व्यवहार अब उनके निलंबन की वजह बन गया है।

वीडियो सामने आने के बाद प्रशासन हरकत में आया। मामला सीधे संभाग आयुक्त तक पहुंचा। जांच हुई और कार्रवाई भी।

वायरल वीडियो ने खोली पोल:

बताया गया कि शिविर के दौरान आम लोगों से बातचीत करते समय अधिकारी का व्यवहार मर्यादित नहीं था। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इसके बाद लोगों में नाराजगी बढ़ी।

सरकारी कार्यक्रम में जनता से अभद्रता का आरोप लगने के बाद प्रशासन के लिए चुप रहना मुश्किल हो गया। वीडियो ने पूरे मामले को सार्वजनिक कर दिया। इसके बाद शिकायतों का सिलसिला भी शुरू हुआ।

कलेक्टर की रिपोर्ट बनी आधार:

मामले की गंभीरता को देखते हुए दुर्ग कलेक्टर ने रिपोर्ट भेजी। वीडियो क्लिप का भी परीक्षण किया गया। प्रारंभिक जांच में अधिकारी के खिलाफ आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए।

आयुक्त कार्यालय ने माना कि शासकीय कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही हुई है। साथ ही आम नागरिकों के प्रति अशिष्ट व्यवहार भी सामने आया है। यही आधार निलंबन कार्रवाई का कारण बना।

नोटिस दिया, जवाब नहीं चला:

30 मई 2026 को रूपेश कुमार पाण्डेय को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। उनसे पूरे मामले पर स्पष्टीकरण मांगा गया। अधिकारी ने जवाब प्रस्तुत किया। लेकिन आयुक्त कार्यालय को वह संतोषजनक नहीं लगा। इसके बाद विभागीय कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया। महज दो दिन के भीतर निलंबन का आदेश जारी कर दिया गया।

आचरण नियमों के उल्लंघन का आरोप:

आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि शासकीय सेवकों को सत्यनिष्ठ, कर्तव्यनिष्ठ और जनता के प्रति शिष्ट होना चाहिए। यह जिम्मेदारी छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियमों में तय की गई है। यह पाया गया कि संबंधित अधिकारी इन मानकों पर खरे नहीं उतरे। इसी वजह से उनके खिलाफ कदाचार और लापरवाही का मामला माना गया।

तत्काल प्रभाव से निलंबन:

दुर्ग संभाग आयुक्त ने नियमों के तहत रूपेश कुमार पाण्डेय को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा।



यह कार्रवाई प्रशासन की ओर से साफ संदेश मानी जा रही है कि जनता के साथ दुर्व्यवहार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। खासकर तब, जब मामला सरकारी शिविर और सार्वजनिक मंच से जुड़ा हो।

विजय शर्मा ने दिए थे बड़ी कार्रवाई के संकेत:

बताया जा रहा है कि सुशासन तिहार में सीईओ से सवाल करने वाला व्यक्ति भाजपा कार्यकर्ता भी था। र्दुव्यवहार का वायरल वीडियो उप मुख्यमत्री विजय शर्मा तक भी पहुंचा था। जिस पर विजय शर्मा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कार्यकर्ता जनता भी है, उससे र्दुव्यहार को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। विजय शर्मा ने बड़ी कार्रवाई के संकेत दे दिए थे। विजय शर्मा के अनुसार ऐसी कार्रवाई होगी जिससे दूसरे अधिकारी जनता के साथ दोबारा र्दुव्यवहार न करें।

नए अधिकारी को मिला अतिरिक्त प्रभार:

निलंबन के बाद प्रशासनिक कामकाज प्रभावित न हो, इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था भी की गई है। प्रभारी सहायक परियोजना अधिकारी जिला पंचायत दुर्ग महेन्द्र कुमार जांगड़े को अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है।

वे अपने वर्तमान दायित्वों के साथ जनपद पंचायत दुर्ग के CEO का प्रभार भी संभालेंगे। आदेश तत्काल लागू कर दिया गया है।

सुशासन पर उठे नए सवाल:

घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा किया है। जब सरकार गांव-गांव जाकर लोगों की समस्याएं सुनने का अभियान चला रही है, तब उन्हीं शिविरों में यदि जनता के साथ दुर्व्यवहार हो तो संदेश क्या जाएगा?

प्रशासनिक गलियारों में भी इस कार्रवाई की चर्चा है। माना जा रहा है कि यह मामला अन्य अधिकारियों के लिए भी चेतावनी है। जनता से संवाद में मर्यादा और संवेदनशीलता अब सिर्फ सलाह नहीं, बल्कि सेवा का अनिवार्य हिस्सा है।

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