दुर्ग टेंडर घोटाला : रिटायर्ड इंजीनियर भागीरथी पर 1500 पन्नों का चालान पेश
समझें क्या है पूरा मामला
- 25 प्रतिशत कमीशन का खेल, पूर्व इंजीनियर गिरफ्तार।
- 1.68 करोड़ कैश, हीरे और सोने की रिंग बरामद।
- टेंडर और बिल पास करने के बदले घूस ली।
- एसीबी ने कोर्ट में दाखिल किया 1500 पन्नों का चालान।
- आठ ठिकानों पर छापेमारी, बेनामी संपत्ति के सबूत मिले।
टेंडर पास करने के बदले कमीशन
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में भ्रष्टाचार का बड़ा मामला सामने आया है। एसीबी (ACB – Anti-Corruption Bureau) ने पूर्व मुख्य अभियंता भागीरथी वर्मा पर शिकंजा कसा है।
आरोपी अधिकारी पर निकायों में टेंडर और बिल पास करने के बदले रिश्वत का आरोप है। वे हर काम के बदले 25 प्रतिशत तक कमीशन वसूलते थे।
1500 पन्नों की चार्जशीट पेश
जांच एजेंसी ने कोर्ट में 1500 पन्नों का विस्तृत अभियोग पत्र दाखिल किया है। एसीबी ने प्राथमिक जांच के बाद आरोपी को 17 जून को गिरफ्तार किया था। यह पूरा मामला वर्ष 2019 से 2023 के बीच का बताया जा रहा है। पद पर रहते हुए आरोपी ने ठेकेदारों से मोटी रकम वसूली की थी।
आठ ठिकानों पर की गई छापेमारी
विवेचना के दौरान एसीबी ने कुल आठ ठिकानों पर रेड मारी थी। इनमें रायपुर और बिलासपुर के छः ठिकाने शामिल थे। इसके अलावा मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित दो ठिकानों पर भी कार्रवाई हुई। छापेमारी में बेनामी संपत्ति और बैंक लेनदेन के कई दस्तावेज मिले हैं।
लाखों का नकद और हीरे की रिंग
जांच में आरोपी के काले कारनामों की कई परतें खुली हैं। वर्ष 2019 में आरोपी ने 32.65 लाख रुपए नकद रिश्वत ली थी। इसी दौरान 40 हजार रुपए की दो हीरे की अंगूठियां भी ली गईं। आरोपी ने आवास के लिए 3.39 लाख की टाइल्स और ग्रेनाइट लगवाए।
वर्ष 2020 में 42.65 लाख रुपए का कमीशन वसूला गया था। कुल मिलाकर 1.68 करोड़ रुपए नकद और एसी (AC – Air Conditioner) जैसी चीजें ली गईं।
FAQ
- आरोपी भागीरथी वर्मा को एसीबी ने कब गिरफ्तार किया था?
उत्तर: एसीबी ने आरोपी भागीरथी वर्मा को प्राथमिक जांच के बाद 17 जून को गिरफ्तार किया था। - एसीबी ने किन-किन जगहों पर छापेमारी की थी?
उत्तर: एसीबी ने रायपुर और बिलासपुर के 6 तथा मध्य प्रदेश के उज्जैन के 2 ठिकानों समेत कुल 8 स्थानों पर छापेमारी की थी।
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