मंदसौर CMHO निलंबित, 311 पदों की भर्ती में भ्रष्टाचार के आरोप, जांच में खुलासा
Jitendra Shrivastava | Jul 23, 2026, 23:45 IST
Photograph: (THESOOTR)
MANDSAUR. मंदसौर में आउटसोर्स भर्ती घोटाले में CMHO डॉ. गोविंद सिंह चौहान को निलंबित किया गया है। जांच समिति ने आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की अनुशंसा की है।
समझें क्या है पूरा मामला।।।
- मंदसौर CMHO डॉ। चौहान निलंबित, भर्ती में भ्रष्टाचार के आरोप।
- 311 पदों की भर्ती में गड़बड़ी, जांच में खुलासा।
- आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की अनुशंसा, कलेक्टर सख्त।
- विधायक की शिकायत पर शुरू हुई थी पूरी जांच।
- लोकायुक्त में भी पहले से जांच के घेरे में CMHO।
समिति ने डॉ। चौहान के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की भी अनुशंसा की है। यह मामला विधायक हरदीप सिंह डंग की शिकायत के बाद सामने आया था।
मामला क्या है
जिले में आउटसोर्स के जरिए 311 मल्टीवर्करों की भर्ती की जानी थी। इसी भर्ती प्रक्रिया में कथित भ्रष्टाचार और आर्थिक अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। पांच सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट में गंभीर खामियां सामने आई हैं। समिति ने डॉ। चौहान के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की भी अनुशंसा की है।
विधायक की शिकायत से शुरू हुई जांच
शिकायत के मुताबिक कुछ उम्मीदवारों से कथित तौर पर पैसे लेकर बिना विधिवत आदेश के अस्पतालों में काम पर लगाया गया। यह भी आरोप है कि इसके लिए अधिकारियों पर दबाव भी बनाया गया।
311 पदों पर उठे सवाल
यह अनुमति भी सिर्फ प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक सीमित थी। आरोप है कि इसके बावजूद बाकी संस्थानों में भी नियुक्तियां कर दी गईं। यानी तय सीमा से बाहर जाकर भर्तियां हुईं।
जांच में मिलीं कई गंभीर खामियां
पीसी एंड पीएनडीटी एक्ट (PC&PNDT Act – Pre-Conception and Pre-Natal Diagnostic Techniques Act) से जुड़े जरूरी रिकॉर्ड जांच टीम को नहीं दिखाए गए। जबकि सरकारी पोर्टल पर यह काम पूरा दिखाया गया था।
निजी उपचार गृहों के लाइसेंस और पंजीयन के रिकॉर्ड में भी गड़बड़ी मिली। रिपोर्ट में डॉ। चौहान के साथ उनके एक कथित परिजन की भूमिका को भी संदिग्ध बताया गया है।
पहले से चल रही थीं कई शिकायतें
जनप्रतिनिधियों ने भी कई बैठकों में उनकी कार्यप्रणाली पर आपत्ति जताई थी। स्थानीय और राज्य स्तरीय मीडिया में भी लगातार शिकायतें छपती रही थीं।
डॉ। चौहान के खिलाफ एक और मामला पहले से उज्जैन लोकायुक्त में जांचाधीन है। यह मामला नर्सिंग कॉलेज की छात्राओं के स्टाइपेंड में कथित गड़बड़ी से जुड़ा है।
इसके अलावा कर्मचारियों के ईपीएफ, ईएसआईसी और न्यूनतम वेतन भुगतान से जुड़ी शिकायतों की भी अलग जांच चल रही है। 19 मई को लोकायुक्त की विशेष टीम मंदसौर पहुंचकर उनसे पूछताछ भी कर चुकी है।
सीएम हेल्पलाइन में भी लापरवाही के आरोप
अतिरिक्त प्रभार किसे मिला
फिलहाल यह पूरा मामला जांच के दायरे में है। समिति ने आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की अनुशंसा जरूर की है, लेकिन अंतिम फैसला आगे की कार्रवाई पर निर्भर करेगा। डॉ.चौहान की तरफ से अब तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
यह मामला मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में चल रही भर्ती प्रक्रियाओं पर भी सवाल खड़े करता है। आउटसोर्स भर्तियों में पारदर्शिता को लेकर लंबे समय से चिंता जताई जाती रही है।
इस निलंबन के बाद जिले के अन्य अधिकारियों की भूमिका पर भी नजर रहेगी। आगे जांच पूरी होने पर ही यह साफ होगा कि जिम्मेदारी किस स्तर तक तय होती है।
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