छत्तीसगढ़ शिक्षा बजट : करोड़ों खर्च, पर छत्तीसगढ़ के बच्चों की पढ़ाई अब भी कमजोर

Aishwarya Dwivedi | Jul 12, 2026, 11:46 IST
शिक्षा बजट - सीखने के नतीजे - कमज़ोर
छत्तीसगढ़ में 6 साल में एनईपी पर 1404 करोड़ खर्च हुए। भारी निवेश के बाद भी बच्चों की पढ़ाई और डिजिटल ढांचा कमजोर है, क्योंकि शिक्षक प्रशिक्षण जैसे बुनियादी क्षेत्रों को नजरअंदाज किया गया।

समझें क्या है पूरा मामला

छत्तीसगढ़ शिक्षा बजटके तहत नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू हुए छह साल हो चुके हैं। इस अवधि में सरकार ने करीब 1404 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। इतनी भारी रकम खर्च होने के बाद भी बच्चों की पढ़ाई कमजोर बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार शिक्षक प्रशिक्षण और बुनियादी क्षेत्रों में खर्च काफी कम रहा है। अब भी हजारों बच्चे स्कूलों से पूरी तरह बाहर बने हुए हैं।



एनईपी के छह साल पूरे

छत्तीसगढ़ में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति यानी एनईपी (NEP – National Education Policy) के छह साल पूरे हो गए हैं। इसके बाद राज्य में इसके क्रियान्वयन की एक विस्तृत रिपोर्ट सामने आई है। इस रिपोर्ट ने शिक्षा व्यवस्था की कई कमियों को उजागर कर दिया है।



छह साल में राज्य के भीतर कुल 1404 करोड़ रुपए का बड़ा निवेश किया गया। इस भारी निवेश के बाद भी बच्चों के सीखने का स्तर कम रहा है। सीखने के स्तर में आई यह गिरावट अब बड़ी चुनौती बन गई है।



छत्तीसगढ़ शिक्षा बजट


बजट का पूरा गणित

शिक्षा नीति के तहत कुल 32,767.34 लाख रुपए का बजट तय हुआ था। इस कुल बजट में केंद्र सरकार ने 19,660.43 लाख रुपए का बड़ा योगदान दिया। यह कुल राशि का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा बनता है।



वहीं राज्य सरकार ने अपने कोटे से 13,106.92 लाख रुपए खर्च किए। यह राज्य सरकार की तरफ से लगभग 40 प्रतिशत का योगदान था। इस पूरे फंड को अलग-अलग शैक्षणिक योजनाओं में बांटा गया था।



कहाँ हुआ सबसे अधिक खर्च

राज्य में सबसे अधिक निवेश कौशल आधारित व्यावसायिक शिक्षा पर किया गया। व्यावसायिक शिक्षा के क्षेत्र में 40,422.22 लाख रुपए का निवेश हुआ। इसका मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को रोजगारपरक कौशल से जोड़ना था।



इसके साथ ही बुनियादी साक्षरता यानी निपुण भारत कार्यक्रम पर भी ध्यान दिया गया। इस कार्यक्रम सहित अन्य योजनाओं पर 30,851.58 लाख रुपए खर्च किए गए। बालिका शिक्षा के तहत कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों पर 29,694.29 लाख रुपए लगाए गए।



इन क्षेत्रों को किया गया नजरअंदाज

इस पूरी रिपोर्ट में शिक्षक प्रशिक्षण पर सबसे कम निवेश की बात सामने आई है। छह वर्षों में शिक्षक प्रशिक्षण पर केवल 2,408.26 लाख रुपए ही खर्च हुए। प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा के क्षेत्र में भी महज 4,821.30 लाख रुपए का निवेश हुआ।



डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के लिए 11,443.95 लाख रुपए की राशि खर्च की गई। इतनी बड़ी राशि के बाद भी दूरस्थ क्षेत्रों में डिजिटल संसाधनों की भारी कमी है। इन दूरदराज के इलाकों में डिजिटल कमी आज भी एक बड़ी चुनौती है।



जमीन पर क्या बदले हालात

राज्य में कुल 10,438 बालवाड़ियां संचालित की जा रही हैं। इन बालवाड़ियों में करीब 18 हजार प्रशिक्षित शिक्षक और कार्यकर्ता मौजूद हैं। ये कार्यकर्ता बच्चों को खेल आधारित शिक्षा देने का काम कर रहे हैं।



इसके साथ ही पहली और दूसरी कक्षा की हिंदी पुस्तकों में बदलाव हुआ है। इन्हें 16 स्थानीय और 4 अंतरराज्यीय भाषाओं में द्विभाषी बनाया गया है। कक्षा 4 से 10 तक की हिंदी किताबों में 15 से 30 प्रतिशत सामग्री छत्तीसगढ़ी भाषा की शामिल है। इसके अलावा 592 स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा शुरू की गई है। आने वाले समय में 652 नए स्कूलों में इसका विस्तार किया जाएगा।



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