छत्तीसगढ़ में शिक्षा का बदलता ट्रेंड, बीएड और नर्सिंग की सीटों के लिए घटे दावेदार
Aishwarya Dwivedi | May 12, 2026, 12:04 IST
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छत्तीसगढ़ में बीएड, डीएड और नर्सिंग जैसे प्रोफेशनल कोर्सेज में इस साल आवेदनों की संख्या आधी रह गई है। कोर्स की अवधि बढ़ने और नई शिक्षा नीति के इंतजार ने छात्रों का रुझान घटाया है।
NEWS IN SHORT
- बीएड आवेदकों की संख्या 1.80 लाख से घटकर 84 हजार हुई।
- कोर्स की अवधि एक से दो वर्ष होना मुख्य कारण।
- छात्र नई शिक्षा नीति के तहत अगले साल का इंतजार कर रहे।
- बीएससी नर्सिंग और फार्मेसी में भी आवेदनों में भारी गिरावट आई।
- सरकारी कॉलेजों में सीटों की कमी से छात्रों में बढ़ी उदासीनता।
NEWS IN DETAIL
व्यावसायिक पाठ्यक्रमों से छात्रों की बढ़ती दूरी
प्रमुख पाठ्यक्रमों में आवेदनों की स्थिति
Application Status for Major Courses
इसके अलावा, पॉलीटेक्निक में भी आवेदनों की संख्या 20 हजार से घटकर 13 हजार रह गई है। पीईटी (PET) और एमसीए (MCA) जैसे तकनीकी पाठ्यक्रमों का हाल भी कुछ ऐसा ही है।
गिरावट के मुख्य कारण
1. कोर्स की अवधि का बढ़ना: छत्तीसगढ़ में पहले बीएड एक वर्ष का था, जो अब दो वर्ष का कर दिया गया है। इससे अन्य राज्यों (जैसे गुजरात, राजस्थान) से आने वाले छात्रों की संख्या कम हो गई है।
2.नई शिक्षा नीति (NEP) का प्रभाव: एनईपी के तहत अगले साल से बीएड के फिर से एक वर्षीय होने की संभावना है। छात्र इस उम्मीद में इंतजार कर रहे हैं कि अगले साल प्रवेश लेने पर उनका समय बचेगा।
3. सीटों का अभाव और निजीकरण: राज्य में बीएड की कुल 14 हजार 600 सीटों में से सरकारी कॉलेजों में केवल 350 सीटें ही उपलब्ध हैं। निजी कॉलेजों की भारी फीस और सीमित सरकारी संसाधनों के कारण छात्रों की उदासीनता बढ़ी है।
4. रोजगार की अनिश्चितता: फार्मेसी और नर्सिंग जैसे क्षेत्रों में बड़ी संख्या में नए कॉलेज खुलने और गुणवत्तापूर्ण प्लेसमेंट की कमी ने भी छात्रों को सोचने पर मजबूर किया है।
निष्कर्ष
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