पैसे देकर बन रहे इंजीनियरिंग सर्टिफिकेट, सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने संसद में उठाया मुद्दा

Rajesh Lahoti | Mar 12, 2026, 19:55 IST
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देश में इंजीनियरिंग इंटर्नशिप के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने संसद में बताया कि कई छात्र प्राइवेट कंपनियों को पैसे देकर बिना स्किल सीखे इंटर्नशिप सर्टिफिकेट हासिल कर रहे हैं।

देश में इंजीनियरिंग शिक्षा के साथ इंटर्नशिप के नाम पर एक बड़ा फर्जी खेल सामने आया है। इस मुद्दे को संसद में बृजमोहन अग्रवाल ने उठाते हुए सरकार से जांच की मांग की है। सांसद बृजमोहन ने बताया कि देश में करीब 5000 इंजीनियरिंग कॉलेजों को All India Council for Technical Education (AICTE) से मान्यता मिली हुई है। इन कॉलेजों में हर साल लगभग 15 लाख छात्र दाखिला लेते हैं।



AICTE की इंटर्नशिप पॉलिसी

AICTE की इंटर्नशिप पॉलिसी के अनुसार इंजीनियरिंग छात्रों को दूसरे, चौथे, छठे या सातवें सेमेस्टर के बाद अनिवार्य रूप से इंडस्ट्रियल इंटर्नशिप करनी होती है। इसका मतलब है कि हर साल करीब 40 से 50 लाख छात्रों को इंटर्नशिप की जरूरत पड़ती है।



कॉलेजों की लापरवाही से बढ़ा फर्जीवाड़ा

लेकिन समस्या यह है कि अधिकांश कॉलेज इन छात्रों को वास्तविक इंटर्नशिप दिलाने में कोई मदद नहीं करते। इसी वजह से बाजार में “पे फॉर सर्टिफिकेट” का एक खतरनाक ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। इसमें छात्र प्राइवेट कंपनियों को पैसे देकर इंटर्नशिप का सर्टिफिकेट हासिल कर लेते हैं, जबकि उन्होंने कोई वास्तविक प्रशिक्षण या स्किल हासिल नहीं की होती।



46% छात्र ले रहे फर्जी सर्टिफिकेट

सांसद के मुताबिक कुछ बड़े तकनीकी संस्थानों में करीब 46 प्रतिशत छात्र सिर्फ सर्टिफिकेट पाने के लिए पैसे देकर फर्जी इंटर्नशिप ले रहे हैं। यह स्थिति देश की तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।



सरकार से जांच की मांग

उन्होंने सरकार से मांग की है कि ऐसे फर्जी कंपनियों और सर्टिफिकेट (Fake Certificates) नेटवर्क की जांच कराई जाए। साथ ही इंजीनियरिंग कॉलेजों में “इंटरनल इनोवेशन सेल” बनाकर छात्रों को कॉलेज के भीतर ही इंडस्ट्री जैसा माहौल देकर इंटर्नशिप का अवसर दिया जाए।



शिक्षा की विश्वसनीयता पर खतरा

सांसद ने चेतावनी दी कि अगर इस फर्जी इंटर्नशिप बाजार पर लगाम नहीं लगाई गई, तो इंजीनियरिंग शिक्षा की विश्वसनीयता पर गंभीर असर पड़ सकता है।



FAQ

  1. इंजीनियरिंग इंटर्नशिप में “पे-फॉर-सर्टिफिकेट” क्या है?
    “पे-फॉर-सर्टिफिकेट” एक ऐसा फर्जी ट्रेंड है जिसमें छात्र प्राइवेट कंपनियों को पैसे देकर बिना काम किए ही इंटर्नशिप का सर्टिफिकेट हासिल कर लेते हैं। इससे उन्हें कॉलेज की अनिवार्य इंटर्नशिप की औपचारिकता पूरी करने में मदद मिल जाती है।
  2. इंजीनियरिंग छात्रों के लिए इंटर्नशिप क्यों जरूरी है?
    गाइडलाइन के मुताबिक इंजीनियरिंग छात्रों को पढ़ाई के दौरान इंडस्ट्रियल इंटर्नशिप करनी जरूरी होती है, ताकि वे प्रैक्टिकल स्किल और इंडस्ट्री का अनुभव हासिल कर सकें।
  3. फर्जी इंटर्नशिप नेटवर्क पर क्या कार्रवाई की मांग हुई है?
    सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने सरकार से मांग की है कि फर्जी इंटर्नशिप सर्टिफिकेट देने वाली कंपनियों की जांच की जाए और कॉलेजों में ही इंटर्नशिप के लिए “इंटरनल इनोवेशन सेल” बनाया जाए।

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