छत्तीसगढ़ फर्जी मेडिकल डिग्री घोटाला : आठ राज्यों में फैला नेटवर्क

Aishwarya Dwivedi | Jul 18, 2026, 11:18 IST
फर्जी मेडिकल डिग्री का मामला
छत्तीसगढ़ में फर्जी मेडिकल डिग्री और रजिस्ट्रेशन का बड़ा नेटवर्क सामने आया है। इसके जरिए आठ राज्यों के सरकारी अस्पतालों में लोग फर्जी दस्तावेजों के सहारे नौकरियां हासिल कर रहे हैं।

समझें क्या है पूरा मामला

छत्तीसगढ़ में फर्जी मेडिकल डिग्री और रजिस्ट्रेशन का बड़ा नेटवर्क चल रहा है। इस फर्जीवाड़े का जाल देश के आठ राज्यों में फैला हुआ है। जालसाज नकली दस्तावेजों के जरिए सरकारी अस्पतालों में नौकरियां तक पा रहे हैं। जांच के दौरान हर महीने कई सर्टिफिकेट फर्जी पाए जा रहे हैं। अधिकारियों ने इस पूरे मामले में सख्त कार्रवाई की बात कही है।



कई राज्यों में फैला फर्जीवाड़ा

छत्तीसगढ़ आयुष विश्वविद्यालय और मेडिकल काउंसिल के नाम पर धोखाधड़ी जारी है। इसमें फार्मेसी, नर्सिंग और पैरामेडिकल काउंसिल के फर्जी दस्तावेज शामिल हैं। यह पूरा खेल बाहरी राज्यों में जमकर चल रहा है। इन राज्यों में तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना शामिल हैं। इसके अलावा ओडिशा, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार में भी यह धंधा सक्रिय है। इन जगहों पर नकली डिग्री और डिप्लोमा बनाए जा रहे हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि लोग सरकारी नौकरी भी पा रहे हैं।



हर महीने पकड़े जा रहे फर्जी केस

जालसाजी का यह खेल लगातार बढ़ता जा रहा है। आयुष यूनिवर्सिटी में हर महीने 30 से अधिक डिग्रियां जांच के लिए आती हैं। सत्यापन के दौरान इनमें से औसतन पांच दस्तावेज फर्जी निकलते हैं। छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल में भी हर महीने जांच की जाती है। वहां भी पांच या उससे अधिक फर्जी सर्टिफिकेट सामने आते हैं। इस साल जुलाई की शुरुआत में एक बड़ा मामला सामने आया था। तमिलनाडु से अदालती मामले के सिलसिले में दो पुलिसकर्मी छत्तीसगढ़ आए थे। वे आयुष यूनिवर्सिटी के नाम से बनी 50 फर्जी डिग्रियां लेकर आए थे। जांच के बाद यूनिवर्सिटी ने इन सभी डिग्रियों को नकली घोषित कर दिया।



छत्तीसगढ़ फर्जी मेडिकल डिग्री घोटाला


फर्जी दस्तावेजों से सरकारी नौकरी

पड़ताल के दौरान ऐसे कई मामले सामने आए हैं। कई लोग फर्जी दस्तावेजों से सरकारी अस्पतालों में काम कर रहे हैं। कुछ मामलों में एक ही डॉक्टर के पास दो अलग-अलग रजिस्ट्रेशन मिले हैं। कई जगहों पर पैरामेडिकल स्टाफ भी फर्जी पाया गया है। काउंसिल ने जांच के बाद इन सर्टिफिकेट को कूट रचित माना है। एक मामला ऐसा भी आया जहां डॉक्टर सात साल तक बिना डिग्री के नौकरी करता रहा। बाद में मामला खुलने पर उसे नौकरी से बर्खास्त किया गया।



जालसाजों का खास पैटर्न

धोखाधड़ी करने वाले लोग एक खास पैटर्न पर काम करते हैं। वे ज्यादातर रमेश, विनोद, सुरेश, लता और संजय जैसे आम नामों का इस्तेमाल करते हैं। जानकारों के मुताबिक छत्तीसगढ़ एक छोटा राज्य है। इस वजह से इसके नाम का दुरुपयोग करना आसान होता है। कई मामलों में पहले से जारी असली सर्टिफिकेट का नंबर चुराया जाता है। फिर उस नंबर पर किसी दूसरे नाम से जाली दस्तावेज तैयार कर दिए जाते हैं।



काउंसिल के सिस्टम में बड़ी कमी

छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल में कुछ तकनीकी कमियां भी सामने आई हैं। यहां वर्तमान में रजिस्ट्रेशन रिन्यूवल यानी नवीनीकरण की कोई व्यवस्था नहीं है। जबकि नर्सिंग और फार्मेसी काउंसिल में नवीनीकरण की प्रक्रिया अनिवार्य होती है। काउंसिल में ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों तरह के सिस्टम चल रहे हैं। रिकॉर्ड रखने के दो अलग सिस्टम होने से जालसाजों को फायदा मिल रहा है। वे इस लूपहोल का इस्तेमाल कर अपना काला धंधा चला रहे हैं। शासन अब इस पूरे सिस्टम को पारदर्शी बनाने की कोशिश में जुटा है।



FAQ

  1. छत्तीसगढ़ फर्जी मेडिकल डिग्री मामला किस स्तर पर फैला है?
    उत्तर: यह फर्जीवाड़ा छत्तीसगढ़ समेत देश के आठ राज्यों में फैला हुआ है। इसमें तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार शामिल हैं।
  2. मेडिकल काउंसिल के सिस्टम में क्या कमी सामने आई है?
    उत्तर: छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल में वर्तमान में रजिस्ट्रेशन के नवीनीकरण की कोई व्यवस्था नहीं है। साथ ही यहां ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से रिकॉर्ड रखने के कारण जालसाज गड़बड़ी कर लेते हैं।

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