धर्म स्वातंत्र्य कानून के तहत राज्य में पहली सजा, युवती की जान लेने वाली ईश्वरी साहू को उम्रकैद

VINAY VERMA | May 01, 2026, 18:48 IST
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रायपुर की अदालत ने झाड़-फूंक और इलाज के नाम पर हत्या की आरोपी को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम के तहत 1 साल की अतिरिक्त सजा भी सुनाई गई है। यह धर्मांतरण से जुड़े कानून के तहत पहली सजा है।

छत्तीसगढ़ में झाड़-फूंक और धर्मांतरण के नाम पर चल रहे खेल पर अदालत ने कड़ा फैसला सुनाया है। रायपुर की अदालत ने आरोपी ईश्वरी साहू को दोषी करार देते हुए हत्या मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम के तहत 1 साल और टोनही प्रताड़ना कानून के तहत 1 साल की अतिरिक्त सजा भी सुनाई गई है। यह फैसला इसलिए भी अहम है क्योंकि राज्य में पहली बार धर्मांतरण से जुड़े मामले में इस कानून के तहत सजा दी गई है।



इलाज के नाम पर मौत का खेल

मामला एक मासूम भरोसे से शुरू हुआ और दर्दनाक मौत पर खत्म हो गया। 18 साल की योगिता सोनवानी रायपुर की रहने वाली थी। उसकी मां सुनिता सोनवानी के अनुसार वह जिद्दी स्वभाव की थी, इसलिए उसे बीमार मान लिया गया। उसका महासमुंद के निजी अस्पताल में इलाज में चल रहा था। लेकिन कुछ दिनो बाद वह राजिम के ईश्वरी साहू के संपर्क आई। ईश्वरी इलाज के नाम पर योगिता के शरीर पर गर्म पानी डालती और चमत्कारी तेल से मालिश करती थी। 22 मई 2025 को योगिता की मौत हो गई।



पीएम रिपोर्ट में मारपीट का खुलासा

पीएम रिपोर्ट में इस बात का भी खुलासा हुआ है कि 18 साल के योगिता की मौत दम घुटने के कारण हुई है। उसके शरीर के अंदर हिस्से पर गहरे और बिना धार वाले सामान से मारने के निशान हैं। आशंका जताई जा रही है कि ईश्वरी अकेले में योगिता को मोटे डंडे से पीटती थी।



First sentence under conversion law


प्रभु का डर

मृतका की मां सुनीता सोनवानी और परिवार वालों ने कोर्ट को बताया है कि ईश्वरी साहू इस इलाज के बारे में परिवार के अन्य सदस्यों को न बताने के लिए कहती थी। ईश्वरी ने सुनीता को यह धमकी दी थी कि ऐसा न करने से प्रभु, तुम और तुम्हारे परिवार पर नाराज हो जाएंगे।



बदले मे पैसा और चावल लेती

सुनीता के अनुसार योगिता के ईलाज के नाम पर ईश्वरी साहू उससे हर महीने 1000-1000 रुपए और 20-20 किलो चावल लेती थी। साथ मे यह भी कहती कि अगर तुम्हारी बेटी स्वस्थ हो जाएगी तो तुम सभी ईसाई धर्म स्वीकार कर लेना। ईश्वरी सुनीता और योगिता से प्रार्थना भी करवाती।



कैसे हुआ संपर्क

सुनीता सोनवानी ने बताया कि पति की मृत्यु के बाद वह महासमुंद में रहकर बेटी का ईलाज करवाती और वहीं बाड़ी मे काम करती। जहां कुछ लोगों ने उसे ईश्वरी के बारे में बताया। साथ में फोन नंबर भी उपलब्ध करवाया। संपर्क करने के बाद ईश्वरी ने सुनीता को बेटी योगिता के साथ राजिम बुला लिया। जहां करीब पांच महीने उसका इलाज किया।



बिना योग्यता के इलाज

पुलिस ने जांच में यह भी पाया कि ईश्वरी साहू के पास इलाज के लिए मान्य पद्धतियो में से किसी की डिग्री नहीं थी। इसका मतलब है कि योगिता को इलाज के नाम पर केवल शारीरिक यातना दी गई एक खतरनाक प्रयोग साबित हुआ। योगिता की हालत लगातार बिगड़ती गई और आखिरकार उसकी मौत हो गई।



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