राज्य की पहली ओपन जेल के नियम तैयार, जानें किन्हें रखा जाएगा

Harrison Masih | Aug 19, 2026, 20:31 IST
छत्तीसगढ़ की पहली ओपन जेल
छत्तीसगढ़ में पहली बार बेमेतरा के ग्राम पथर्रा में ओपन जेल शुरू होने जा रही है। 200 कैदियों की क्षमता वाली इस जेल में अच्छे आचरण और कम सुरक्षा जोखिम वाले सजायाफ्ता कैदियों को रखा जाएगा।

समझें क्या है पूरा मामला

  • छत्तीसगढ़ में पहली बार ओपन जेल शुरू होगी।
  • बेमेतरा के पथर्रा में 200 कैदियों की क्षमता होगी।
  • अच्छे आचरण वाले कैदियों को ही प्रवेश मिलेगा।
  • कैदी खेती, पशुपालन और जेल उद्योग में काम करेंगे।
  • गंभीर अपराधों में सजा काट रहे कैदी पात्र नहीं होंगे।

जेल डीजी (Director General) हिमांशु गुप्ता के मुताबिक सरकार ने जेलों में बंद कैदियों के सुधार, अच्छे व्यवहार और रिहाई के बाद सामान्य जीवन में लौटने की तैयारी के लिए छत्तीसगढ़ ओपन जेल (ऑपरेशन एंड मैनेजमेंट) रूल्स बना दिए हैं।



यह प्रदेश में जेल सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।



ओपन जेल क्या है?

ओपन जेल ऐसी जेल व्यवस्था है, जिसमें योग्य कैदियों को अपेक्षाकृत खुला माहौल दिया जाता है। यहां कैदियों को खेती, पशुपालन, जेल उद्योग और दूसरे रोजगार से जुड़े कामों में लगाया जाएगा।



इसका मकसद सिर्फ सजा काटना नहीं, बल्कि कैदी को काम, अनुशासन और जिम्मेदारी के जरिए समाज में वापस लौटने के लिए तैयार करना है।



इन कैदियों को नहीं भेजा जाएगा ओपन जेल

नियमों के मुताबिक कई गंभीर अपराधों में सजा काट रहे कैदियों को ओपन जेल में रखने की अनुमति नहीं होगी। इनमें रेप, यौन अपराध, अपहरण, डकैती, लूट, गंभीर चोरी और हत्या से जुड़े गंभीर अपराध शामिल हैं।



इसके अलावा राजद्रोह या राज्य के खिलाफ अपराध, सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़े अपराधों में दोषी कैदी भी इसके लिए पात्र नहीं होंगे।



open jail


कड़े कानूनों वाले कैदी भी होंगे बाहर

NSA (National Security Act), छत्तीसगढ़ विशेष जन सुरक्षा अधिनियम, UAPA (Unlawful Activities Prevention Act), TADA, POTA, एंटी-हाइजैकिंग एक्ट, एक्सप्लोसिव सब्सटेंसेज एक्ट, POCSO और NDPS (Narcotic Drugs and Psychotropic Substances) एक्ट के तहत आरोपी या दोषी कैदियों को भी ओपन जेल में नहीं रखा जाएगा।



यह सूची साफ करती है कि केवल अपेक्षाकृत कम गंभीर मामलों के कैदी ही इस व्यवस्था के लिए पात्र होंगे।



ओपन जेल जाने का फैसला कौन करेगा

ओपन जेल में जाने के लिए कैदी को खुद आवेदन करना होगा। वह आवेदन अपनी जेल के सुपरिंटेंडेंट को देगा। इसके अलावा जेल सुपरिंटेंडेंट भी पात्र कैदियों के मामले ओपन जेल के लिए भेज सकते हैं।



हर तीन महीने में पात्र कैदियों के नाम और रिकॉर्ड वाली सूची ओपन जेल के सुपरिंटेंडेंट को भेजी जाएगी। ओपन जेल के सुपरिंटेंडेंट जांच के बाद अपनी सिफारिश डीजी जेल एवं करेक्शनल सर्विसेज को भेजेंगे। इसके बाद एक कमेटी अंतिम फैसला करेगी।



ओपन जेल में कैदी क्या करेंगे

ओपन जेल में कैदियों के पुनर्वास के लिए रोजगार से जुड़ी गतिविधियां कराई जाएंगी। इनमें मुख्य रूप से जेल इंडस्ट्री, खेती, पशुपालन और दूसरे रोजगार आधारित काम शामिल होंगे।



इन गतिविधियों से होने वाली आय राज्य सरकार के खाते में जमा की जाएगी। वहीं कैदियों के पुनर्वास और रोजगार संबंधी गतिविधियों के लिए विभागीय बजट से फंड दिया जाएगा।



गलती करने पर वापस भेजे जाएंगे सामान्य जेल

ओपन जेल जाने के बाद भी कैदी को वापस सामान्य जेल भेजा जा सकता है। अगर ओपन जेल में रहने के दौरान कैदी कोई जेल अपराध करता है, तो उसके खिलाफ रिपोर्ट डीजी को भेजी जाएगी। डीजी के आदेश पर उसे वापस उसकी पुरानी जेल या किसी दूसरी जेल में भेजा जा सकता है।



कैदी खुद भी आवेदन देकर वापस अपनी पुरानी जेल जाने की इच्छा जाहिर कर सकता है। अगर कोई कैदी मेडिकल कारणों से काम करने में सक्षम नहीं रहता, तो जेल मेडिकल अफसर की रिपोर्ट के आधार पर उसे वापस सामान्य जेल भेजा जा सकता है।



पैरोल की भी रहेगी व्यवस्था

ओपन जेल में रहने वाले कैदियों पर भी प्रिजनर एक्ट, 1900 और छत्तीसगढ़ प्रिजनर लीव रूल्स, 1989 के प्रावधान लागू होंगे। यानी उन्हें अस्थायी छुट्टी या पैरोल की सुविधा इन्हीं नियमों के तहत मिलेगी।



कर्मचारियों की भी होगी अलग व्यवस्था

जेल विभाग के मौजूदा अधिकारी और कर्मचारी भी ओपन जेल में तैनात किए जा सकेंगे। उनकी वरिष्ठता उनके मूल कैडर या सर्किल के मुताबिक ही बनी रहेगी।



उनकी पदोन्नति और अन्य सेवा से जुड़ी प्रक्रियाएं भी मूल कैडर या सर्किल के अनुसार ही होंगी, यानी ओपन जेल में तैनाती से उनके करियर पर कोई अतिरिक्त असर नहीं पड़ेगा।



अब आगे क्या

बेमेतरा में तैयार हो रही यह जेल जल्द ही चालू होने की उम्मीद है। इसके शुरू होने के बाद प्रदेश में जेल सुधार से जुड़ा यह पहला बड़ा प्रयोग माना जाएगा।



आने वाले समय में यह देखा जाएगा कि यह मॉडल कितना कारगर साबित होता है और आगे प्रदेश के अन्य जिलों में भी ऐसी जेलें बनाई जाती हैं या नहीं।



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