लॉ एंट्रेंस एग्जाम मे पूर्व नक्सली कमांडर देवजी सफल, मिली 349वीं रैंक

VINAY VERMA | Jun 05, 2026, 22:05 IST
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पूर्व माओवादी कमांडर देवजी, जिन्होंने बस्तर और दंडकारण्य में लंबे समय तक सशस्त्र संघर्ष में भाग लिया, अब कानून के क्षेत्र में नए जीवन की शुरुआत कर रहे हैं। 62 वर्षीय देवजी ने तेलंगाना के लॉ एंट्रेंस टेस्ट में 349वीं रैंक हासिल की है।

पूर्व माओवादी कमांडर देवजी किताबों में भविष्य तलाश रहा है। देवजी ने तेलंगाना के लॉ एंट्रेंस टेस्ट (LAWCET) में 349वीं रैंक हासिल की है। इसके बाद बस्तर और दंडकारण्य में माओवादी आंदोलन का बड़ा चेहरा रहे टिप्पिरी तिरुपति उर्फ देवजी अब लॉ कॉलेज में दाखिला लेंगें। जहां देवजी अदालत के रास्ते न्याय की लड़ाई लड़ने की पढ़ाई करेंगे। बता दें कि देवजी की उम्र करीब 62 साल बताई जाती है। 40 साल पहले उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी थी। लेकिन इस साल सरेंडर करने के बाद उन्होंने अपनी 12वीं की पढ़ाई पूरी की।



जंगल से कोर्टरूम तक का सफर

चार दशक तक माओवादी आंदोलन का हिस्सा रहे देवजी ने इस साल फरवरी में आत्मसमर्पण किया था। सरेंडर के समय यह चर्चा थी कि क्या इतने लंबे समय तक बंदूक के रास्ते पर चलने वाला व्यक्ति मुख्यधारा में लौट पाएगा। अब देवजी ने उस सवाल का जवाब अपनी उपलब्धि से दिया है। LAWCET में 57 अंक हासिल कर उन्होंने पांच वर्षीय लॉ डिग्री प्रोग्राम में प्रवेश का रास्ता खोल लिया है।



खिलाफत के बाद संविधान का सहारा

सबसे बड़ा बदलाव सिर्फ परीक्षा पास करना नहीं है। बड़ा बदलाव सोच में आया है। जिस व्यक्ति ने जीवन का बड़ा हिस्सा सशस्त्र संघर्ष में बिताया, वह अब संविधान और कानून के जरिए न्याय की लड़ाई लड़ने की बात कर रहा है। देवजी का कहना है कि वह कानूनी शिक्षा लेकर गरीबों, आदिवासियों और वंचित समुदायों की मदद करना चाहते हैं। उनका दावा है कि अब सामाजिक संघर्ष का रास्ता बंदूक नहीं, बल्कि कानून होगा।



40 साल बाद फिर लौटे पढ़ाई की ओर

देवजी की कहानी सिर्फ माओवादी आंदोलन छोड़ने तक सीमित नहीं है। उन्होंने अपनी अधूरी पढ़ाई भी दोबारा शुरू कर दी है। वर्ष 1983-85 के दौरान वे कोरुटला जूनियर कॉलेज में पढ़ते थे। उसी दौरान रेडिकल स्टूडेंट यूनियन से जुड़े और फिर माओवादी आंदोलन में चले गए। आंदोलन की राह पकड़ते ही पढ़ाई छूट गई और इंटरमीडिएट की परीक्षा अधूरी रह गई।



पढ़ाई-पेपर का करता था बहिस्कार

करीब चार दशक पहले जिस तेलुगु पेपर का बहिष्कार कर उन्होंने परीक्षा छोड़ दी थी, उसी पेपर को देने के लिए हाल ही में परीक्षा केंद्र पहुंचे। तेलंगाना बोर्ड ऑफ इंटरमीडिएट एजुकेशन ने उन्हें विशेष अनुमति दी। इसके बाद 13 मई को जगतियाल जिले के कोरुटला स्थित परीक्षा केंद्र में उन्होंने सप्लीमेंट्री परीक्षा दी। परीक्षा केंद्र में उनकी मौजूदगी ने लोगों और मीडिया का खास ध्यान खींचा।



सरेंडर के बाद बदल गई जिंदगी

फरवरी 2026 में तेलंगाना पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने वाले 62 वर्षीय देवजी कभी माओवादी संगठन के प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते थे। उन पर एक करोड़ रुपए का इनाम घोषित था। सुरक्षा एजेंसियों की फाइलों में वे वांछित थे, लेकिन अब वही व्यक्ति शिक्षा और कानून के जरिए नई शुरुआत करने की कोशिश कर रहा है।



सवाल भी बड़ा, संदेश भी बड़ा

देवजी की कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की सफलता की कहानी नहीं है। यह उस बदलाव का संकेत भी है, जहां हिंसा की राह छोड़कर लोकतांत्रिक व्यवस्था में भरोसा जताया जा रहा है। जंगलों में बंदूक लेकर घूमने वाला पूर्व कमांडर अब अदालतों में कानून की दलीलें देने का सपना देख रहा है। बस्तर से लेकर तेलंगाना तक इस बदलाव की चर्चा इसलिए भी हो रही है, क्योंकि यह कहानी बताती है कि बंदूक का रास्ता छोड़ने के बाद भी जिंदगी में दूसरा अध्याय लिखा जा सकता है।



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