ई20 पेट्रोल ने बिगाड़ा कार का इंजन, कोर्ट का आदेश, डॉक्टर को मिलेगी नई कार
समझें क्या है पूरा मामला
रायपुर के एक डॉक्टर ने नई हाइब्रिड कार खरीदी थी। कार में ई20 पेट्रोल डलवाने के बाद इंजन खराब हो गया। शोरूम ने कार ठीक करने के बदले भारी खर्च मांग लिया। उपभोक्ता आयोग ने कंपनी को नई कार देने का आदेश दिया है। डॉक्टर कार शोरूम में छोड़कर हर महीने ईएमआई भर रहे हैं।
ई20 पेट्रोल से बिगड़ी कार
रायपुर में एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक डॉक्टर की नई महंगी कार ई20 पेट्रोल के कारण खराब हो गई। इसके बाद डॉक्टर को भारी मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा। अब जिला उपभोक्ता आयोग (District Consumer Disputes Redressal Commission) ने पीड़ित के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया है।
आयोग ने कार कंपनी और डीलर पर बड़ा जुर्माना लगाया है। उन्हें 45 दिनों के भीतर पीड़ित को नई कार देनी होगी। अगर वे नई कार नहीं देते हैं तो पूरी रकम लौटानी होगी। यह रकम करीब 20.5 लाख रुपए बनती है। इसके साथ ही मानसिक प्रताड़ना के लिए एक लाख रुपए देने होंगे। कोर्ट के खर्च के लिए दस हजार रुपए अलग से देने होंगे।
डॉक्टर ने साझा किया अपना दर्द
पीड़ित व्यक्ति पेशे से किडनी रोग विशेषज्ञ (Nephrologist) हैं। उनका नाम डॉ. प्रेमराज देबता है। उन्होंने इस पूरी घटना को लेकर अपना दर्द साझा किया है। उन्होंने जून 2024 में एक नेक्सा शोरूम से कार खरीदी थी। यह कार ग्रैंड विटारा स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड जेटा मॉडल थी।
इस कार की कुल कीमत करीब 20.5 लाख रुपए थी। कार खरीदने के महज पांच महीने बाद ही समस्या शुरू हो गई। डॉक्टर ने पेट्रोल पंप से ईंधन भरवाया था। ईंधन भरवाकर निकलते ही कार के डैशबोर्ड पर खराबी का मैसेज आ गया। कार के इंजन में बड़ी गड़बड़ी आ चुकी थी।
पेट्रोल टैंक से निकली सफेद जैली
डॉक्टर अपनी कार को तुरंत शोरूम लेकर पहुंचे। वहां मैकेनिक ने कार के टैंक से पेट्रोल निकाला। उस पेट्रोल को एक पारदर्शी बोतल में रखा गया। पेट्रोल के ऊपर एक अलग परत दिखाई दे रही थी। पेट्रोल के ठीक नीचे सफेद रंग की जैली जमा थी।
शोरूम प्रबंधन ने इसे घटिया क्वालिटी का पेट्रोल बताया। उन्होंने पेट्रोल को ही खराबी की मुख्य वजह माना। इसके बाद डॉक्टर खुद उस पेट्रोल पंप पर गए। उन्होंने पंप प्रबंधन से इस मामले की लिखित शिकायत की। हालांकि पंप प्रबंधन ने अपनी गलती मानने से साफ इनकार कर दिया।
पंप ने कहा कार में ही खराबी
पेट्रोल पंप प्रबंधन ने ईमेल के जरिए डॉक्टर को जवाब दिया। उन्होंने कहा कि उस दिन कई गाड़ियों में पेट्रोल भरा गया था। किसी भी दूसरे ग्राहक ने ऐसी कोई शिकायत नहीं की। इसलिए खराबी पेट्रोल में नहीं बल्कि कार में ही होगी।
डॉक्टर ने कई नामी कंपनियों के पंप से पेट्रोल भरवाया था। इसलिए वे पेट्रोल पंप के खिलाफ आगे नहीं बढ़े। सर्विस सेंटर पर कार का टैंक कई बार खाली किया गया। उसमें बार-बार नया पेट्रोल भी डाला गया। इसके बावजूद कार कुछ किलोमीटर चलकर बंद हो जाती थी।
कंपनी ने मांगा भारी खर्च
शोरूम ने एक महीने तक कार अपने पास रखी। डॉक्टर को चलने के लिए एक पुरानी मैनुअल कार दी गई। दिसंबर में डॉक्टर को उनकी कार वापस मिली। पेट्रोल भरवाने के पांच किलोमीटर बाद कार फिर बंद हो गई। डॉक्टर समझ नहीं पा रहे थे कि खराबी कहां है।
क्या खराबी पेट्रोल में थी या कोई मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट (Manufacturing Defect) था? डॉक्टर ने शोरूम से नई कार या पूरे पैसे वापस मांगे। कंपनी ने इस मांग को पूरी तरह खारिज कर दिया। कंपनी ने पुरानी कार के हिसाब से सिर्फ 12 लाख रुपए ऑफर किए।
बाद में कंपनी ने कहा कि इंजन पूरी तरह खराब हो चुका है। इसे बदलने में 5.3 लाख रुपए का खर्च आएगा। यह खर्च कार की वारंटी में कवर नहीं होगा। भारी खर्च के बाद भी कार की कोई गारंटी नहीं दी गई।
15 महीने से खड़ी है कार
इस रवैये से परेशान होकर डॉक्टर ने एक कड़ा कदम उठाया। उन्होंने 29 मार्च 2025 को कार शोरूम में ही छोड़ दी। कार पिछले 15 महीने से वहीं धूल खा रही है। डॉक्टर ने कार के लिए 12 लाख रुपए का लोन लिया था।
वे हर महीने 30 हजार रुपए की भारी ईएमआई (Equated Monthly Installment) भर रहे थे। बिना कार चलाए बैंक की किस्त भरना बेहद दर्दनाक था। परेशान होकर उन्होंने उपभोक्ता आयोग में केस दर्ज कराया। आयोग की जांच में पेट्रोल में एथेनॉल मिला।
आयोग ने पाया कि कार ई20 ईंधन के अनुकूल नहीं थी। हालांकि कंपनी इस फैसले को मानने के लिए तैयार नहीं है। कंपनी इस फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती देगी। डॉक्टर ने भी कहा है कि वे कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे।
FAQ
- रायपुर में ई20 पेट्रोल का पूरा मामला क्या है?
उत्तर: रायपुर में एक डॉक्टर की ग्रैंड विटारा कार ई20 पेट्रोल के कारण खराब हो गई थी। उपभोक्ता आयोग ने अब कंपनी को कार बदलने या पैसे लौटाने का आदेश दिया है। - ई20 पेट्रोल मामले में उपभोक्ता आयोग ने कंपनी पर क्या जुर्माना लगाया है?
उत्तर: आयोग ने कंपनी को 20.5 लाख रुपए लौटाने का आदेश दिया है। इसके साथ ही एक लाख रुपए मानसिक प्रताड़ना और दस हजार रुपए कोर्ट खर्च देना होगा।
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