छत्तीसगढ़ की बेटी ज्ञानेश्वरी यादव ने कॉमनवेल्थ में जीता सिल्वर
समझें क्या है पूरा मामला
Rajnandgaon। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव की बेटी ज्ञानेश्वरी यादव ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल जीत लिया है। ग्लास्गो में आयोजित महिला 53 किलोग्राम वेटलिफ्टिंग प्रतियोगिता में ज्ञानेश्वरी ने कुल 199 किलोग्राम वजन उठाकर दूसरा स्थान हासिल किया।
ज्ञानेश्वरी ने स्नैच में 88 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 111 किलोग्राम वजन उठाया। उनकी इस उपलब्धि से छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश में खुशी का माहौल है। यह पदक उनके वर्षों के संघर्ष, मेहनत और परिवार के त्याग का नतीजा है।
भाई से किया था पदक जीतने का वादा निभाया
ज्ञानेश्वरी की यह जीत उस समय आई है जब उनका परिवार एक मुश्किल दौर से गुजर रहा है। उनके भाई रितेश यादव हादसे के बाद अस्पताल में भर्ती हैं। माता-पिता लगातार उनकी देखभाल में लगे हुए हैं।
प्रतियोगिता से पहले ज्ञानेश्वरी ने अपने भाई से बातचीत कर जल्द स्वस्थ होने की कामना की थी। साथ ही उन्होंने पदक जीतने का वादा भी किया था। सिल्वर मेडल जीतकर ज्ञानेश्वरी ने अपना यह वादा पूरा कर दिया।
पिता के संघर्ष से शुरू हुआ था सफर
ज्ञानेश्वरी यादव की सफलता के पीछे उनके पिता दीपक यादव का बड़ा योगदान है। उनकी खेल यात्रा राजनांदगांव की जय भवानी व्यायामशाला से शुरू हुई थी।
ज्ञानेश्वरी जब सातवीं कक्षा में पढ़ती थीं, तब वह अपने पिता के साथ जिम जाने लगीं। पिता खुद बॉडी बिल्डिंग करते थे। बेटी की रुचि देखकर उन्होंने उसे वेटलिफ्टिंग की ट्रेनिंग दिलानी शुरू की।
इसके बाद कोच अजय लोहार के मार्गदर्शन में ज्ञानेश्वरी ने इस खेल में आगे बढ़ना शुरू किया। शुरुआत में किसी ने नहीं सोचा था कि एक छोटे शहर की यह लड़की अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन करेगी।
आर्थिक परेशानियों के बीच जारी रखा अभ्यास
ज्ञानेश्वरी के परिवार के सामने सबसे बड़ी चुनौती पैसों की थी। उनके पिता दीपक यादव इलेक्ट्रिशियन का काम करते थे और उनकी कमाई सीमित थी।
परिवार की आय से घर का खर्च चलाने के साथ ज्ञानेश्वरी की डाइट, खेल किट और प्रतियोगिताओं का खर्च उठाना आसान नहीं था। कई बार परिवार ने अपनी जरूरतों को पीछे रखा, लेकिन बेटी की ट्रेनिंग में कोई कमी नहीं आने दी।
गांव से शहर तक रोज का सफर भी संघर्ष भरा था। दीपक यादव बच्चों को लेकर कई किलोमीटर साइकिल से राजनांदगांव आते थे। स्कूल के बाद ज्ञानेश्वरी घंटों अभ्यास करती थीं और देर रात परिवार वापस गांव लौटता था।
2022 से लगातार बना रही हैं पहचान
ज्ञानेश्वरी यादव ने साल 2022 से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्होंने ग्रीस में आयोजित जूनियर विश्व वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर दुनिया का ध्यान खींचा था।
इसके बाद उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया और लगातार शानदार प्रदर्शन किया। उनकी मेहनत और उपलब्धियों को देखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने साल 2023 में उन्हें सहायक उप निरीक्षक के पद पर नियुक्त किया।
सिल्वर मेडल के साथ जुड़ा पूरा परिवार का सपना
कॉमनवेल्थ गेम्स का सिल्वर मेडल केवल ज्ञानेश्वरी की व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है। इसके पीछे उनके माता-पिता की मेहनत और पूरे परिवार का त्याग जुड़ा हुआ है।
पिता दीपक यादव ने बेटी के सपने को पूरा करने के लिए आर्थिक परेशानियों के बावजूद उसका साथ नहीं छोड़ा। परिवार ने कई सुविधाओं से समझौता किया, लेकिन ज्ञानेश्वरी की तैयारी कभी नहीं रुकी। आज वही मेहनत रंग लाई है। राजनांदगांव की यह बेटी 199 किलो वजन उठाकर कॉमनवेल्थ के मंच पर भारत का गौरव बन गई है।
ज्ञानेश्वरी की बड़ी उपलब्धि
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में महिला 53 किग्रा वर्ग में सिल्वर मेडल।
कुल 199 किलो वजन उठाकर हासिल किया दूसरा स्थान।
स्नैच में 88 किलो और क्लीन एंड जर्क में 111 किलो वजन उठाया।
जूनियर विश्व वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में जीत चुकी हैं गोल्ड मेडल।
2023 में छत्तीसगढ़ पुलिस में मिली सहायक उप निरीक्षक की जिम्मेदारी।
वेटलिफ्टर ज्ञानेश्वरी यादवकी कहानी बताती है कि मेहनत, परिवार का भरोसा और मजबूत इरादे किसी भी मुश्किल को पार कर सकते हैं। राजनांदगांव की इस बेटी ने साबित कर दिया कि छोटे शहरों से निकलकर भी खिलाड़ी दुनिया के सबसे बड़े मंच पर इतिहास बना सकते हैं।
FAQ
- ज्ञानेश्वरी यादव ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में कौन सा मेडल जीता?
ज्ञानेश्वरी यादव ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में महिला 53 किलोग्राम वेटलिफ्टिंग वर्ग में सिल्वर मेडल जीता। - ज्ञानेश्वरी यादव ने कितने किलो वजन उठाया?
ज्ञानेश्वरी यादव ने प्रतियोगिता में कुल 199 किलोग्राम वजन उठाया। इसमें स्नैच में 88 किलो और क्लीन एंड जर्क में 111 किलो शामिल था। - ज्ञानेश्वरी यादव कहां की रहने वाली हैं?
ज्ञानेश्वरी यादव छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले की रहने वाली हैं। उन्होंने संघर्ष और मेहनत के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है।
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