छत्तीसगढ़ में हॉलमार्किंग की अनदेखी! 7 हजार ज्वेलर्स बिना लाइसेंस, कार्रवाई की तैयारी
Raipur. छत्तीसगढ़ में सोने के आभूषणों की बिक्री को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। राज्य में हॉलमार्किंग अनिवार्य होने के बावजूद हजारों ज्वेलर्स अभी भी बिना वैध लाइसेंस के कारोबार कर रहे हैं। भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) और सराफा संगठनों के आंकड़ों के अनुसार राज्य में लगभग 12 हजार ज्वेलर्स सक्रिय हैं, लेकिन इनमें से करीब 7 हजार के पास हॉलमार्किंग संबंधी आवश्यक पंजीकरण नहीं है। इससे उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी और सोने की शुद्धता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
क्या है पूरा मामला?
राज्य में हॉलमार्किंग व्यवस्था लागू होने के बाद भी बड़ी संख्या में व्यापारी बिना BIS पंजीकरण के सोने के आभूषण बेच रहे हैं। सराफा संगठनों का दावा है कि प्रदेश में केवल लगभग 5 हजार ज्वेलर्स ने ही आवश्यक पंजीकरण कराया है, जबकि शेष व्यापारी अब भी नियमों के दायरे से बाहर हैं। ऐसे में प्रशासन द्वारा जांच और कार्रवाई की संभावना बढ़ गई है।
हॉलमार्किंग का उद्देश्य ग्राहकों को शुद्ध सोना उपलब्ध कराना और नकली या कम शुद्धता वाले आभूषणों की बिक्री पर रोक लगाना है। BIS के अनुसार हॉलमार्किंग व्यवस्था के अंतर्गत ज्वेलर्स का पंजीकरण अनिवार्य है और हॉलमार्कयुक्त आभूषणों की बिक्री के लिए निर्धारित नियमों का पालन करना आवश्यक है।
क्या हो सकती है कार्रवाई?
नियमों के अनुसार यदि किसी ज्वेलर के पास बिना हॉलमार्क वाले आभूषण पाए जाते हैं या वह आवश्यक पंजीकरण के बिना कारोबार करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। इसमें जुर्माना, लाइसेंस निरस्तीकरण और गंभीर मामलों में जेल तक का प्रावधान है। पूर्व में केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया था कि नियमों का उल्लंघन करने पर सोने की कीमत के कई गुना तक जुर्माना और कारावास की सजा हो सकती है।
ग्राहक कैसे करें पहचान?
विशेषज्ञों के अनुसार सोना खरीदते समय ग्राहकों को निम्न बातों पर ध्यान देना चाहिए-
आभूषण पर BIS हॉलमार्क का निशान हो।
छह अंकों वाला HUID नंबर अंकित हो।
ज्वेलर का BIS पंजीकरण उपलब्ध हो।
खरीदारी का बिल अवश्य लें।
HUID नंबर को BIS CARE ऐप के माध्यम से सत्यापित करें।
छत्तीसगढ़ में हॉलमार्किंग की स्थिति
रिपोर्ट के अनुसार राज्य में हॉलमार्किंग के लिए कई केंद्र संचालित हैं, लेकिन अभी भी दूर-दराज जिलों के व्यापारियों को परीक्षण और प्रमाणन सुविधाओं तक पहुंचने में कठिनाई होती है। सराफा कारोबारियों का कहना है कि छोटे शहरों और कस्बों में जागरूकता तथा प्रक्रियागत दिक्कतों के कारण कई व्यापारी अभी तक पंजीकरण नहीं करा पाए हैं।
उपभोक्ताओं के लिए क्यों महत्वपूर्ण है हॉलमार्किंग?
हॉलमार्किंग सोने की शुद्धता का सरकारी प्रमाण है। इससे ग्राहक यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि जिस कैरेट का सोना खरीदा जा रहा है, उसकी गुणवत्ता प्रमाणित है। हॉलमार्कयुक्त आभूषणों की पुनर्विक्रय (रीसेल) वैल्यू भी बेहतर रहती है और ग्राहकों के साथ धोखाधड़ी की संभावना कम हो जाती है।
विशेषज्ञों की सलाह
सोना खरीदने से पहले केवल कीमत पर ध्यान न दें। हमेशा BIS हॉलमार्क, HUID नंबर और ज्वेलर के पंजीकरण की जांच करें। यदि किसी आभूषण पर हॉलमार्क नहीं है या उसकी जानकारी सत्यापित नहीं हो रही है, तो ऐसी खरीदारी से बचना ही बेहतर होगा।
FAQ
- छत्तीसगढ़ में कितने ज्वेलर्स के पास हॉलमार्किंग लाइसेंस नहीं है?
छत्तीसगढ़ में लगभग 12 हजार ज्वेलर्स में से करीब 7 हजार ज्वेलर्स के पास हॉलमार्किंग के लिए आवश्यक BIS लाइसेंस नहीं है, जिससे नियमों के उल्लंघन का मामला सामने आया है। - ग्राहक कैसे पहचानें कि सोना हॉलमार्केड है या नहीं?
ग्राहक सोना खरीदते समय BIS हॉलमार्क लोगो, 6 अंकों का HUID नंबर और ज्वेलर का BIS रजिस्ट्रेशन जरूर जांचें। HUID नंबर को BIS CARE ऐप से भी सत्यापित किया जा सकता है। - बिना हॉलमार्किंग लाइसेंस के सोना बेचने पर क्या कार्रवाई हो सकती है?
BIS नियमों के अनुसार बिना लाइसेंस या बिना हॉलमार्क सोना बेचने पर ज्वेलर्स पर जुर्माना, लाइसेंस निरस्तीकरण और गंभीर मामलों में कानूनी कार्रवाई या जेल तक का प्रावधान है।
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