हीपैरीन इंजेक्शन घोटाला: हाईकोर्ट ने डिवाइन लैब पर ठोका जुर्माना,CGMSCL ने किया ब्लैकलिस्ट

Harrison Masih | Jul 18, 2025, 20:45 IST
Heparin injection scam High Court fines Divine Laboratories the sootr.com
हीपैरीन इंजेक्शन घोटाले में हाईकोर्ट ने डिवाइन लैब की याचिका खारिज की, 25 हजार का जुर्माना लगाया। CGMSCL ने कंपनी को 3 साल के लिए ब्लैकलिस्ट किया।

Heparin injection scam: छत्तीसगढ़ में चिकित्सा सुरक्षा से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें अमानक गुणवत्ता (NSQ) के हीपैरीन इंजेक्शन की आपूर्ति करने वाली डिवाइन लेबोरेटरीज प्राइवेट लिमिटेड को हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है।



छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CGMSCL) ने कंपनी को तीन वर्षों के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया था। इस आदेश के खिलाफ डिवाइन लेबोरेट्रीज़ ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया है और कंपनी पर ₹25,000 का जुर्माना भी ठोका है।



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क्या है पूरा मामला?

डिवाइन लेबोरेट्रीज़ रायपुर और अंबिकापुर के सरकारी अस्पतालों को हीपैरीन इंजेक्शन की आपूर्ति कर रही थी। मरीजों पर असर ना दिखने की शिकायतों के बाद राज्य शासन ने इंजेक्शन की गुणवत्ता जांच करवाई। लैब टेस्ट में यह अमानक (NSQ) पाया गया।



इसके बाद CGMSCL ने संदेहास्पद बैचों को तत्काल वापस मंगाया (recall), कंपनी के साथ रेट कॉन्ट्रैक्ट खत्म किया और उसे तीन साल के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया।



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डिवाइन लेबोरेटरीज की जानकारी

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  • कंपनी का क्षेत्र:
    डिवाइन लेबोरेटरीज एक फार्मास्युटिकल कंपनी है, जो दवाओं और चिकित्सा उत्पादों के निर्माण में विशेषज्ञता रखती है।
  • प्रमुख उत्पाद:
    यह कंपनी इंजेक्शन, ड्रॉप्स, मलहम, क्रीम और पशु चिकित्सा से जुड़े उत्पादों का उत्पादन करती है।
  • स्थान:
    कंपनी का मुख्यालय वडोदरा, गुजरात में स्थित है।
  • उत्पादन क्षमता:
    कंपनी विभिन्न फार्मास्युटिकल फॉर्मूलेशन को गुणवत्ता मानकों के अनुसार तैयार करती है।
  • स्वास्थ्य सेवा में योगदान:
    मानव और पशु स्वास्थ्य सेवाओं में बेहतर औषधीय उत्पादों की आपूर्ति के माध्यम से कंपनी योगदान देती है।


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हाईकोर्ट में क्या हुआ?

डिवाइन लेबोरेट्रीज़ ने यह कहते हुए याचिका दायर की कि उन्हें अनुचित रूप से ब्लैकलिस्ट किया गया है। कंपनी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सी. जयंत के. राव ने पक्ष रखा, जबकि राज्य सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल प्रफुल भारत ने तर्क प्रस्तुत किए।



कोर्ट ने याचिका को यह कहते हुए खारिज किया कि जन स्वास्थ्य से जुड़ा यह मामला बेहद गंभीर है। साथ ही कंपनी पर ₹25,000 का जुर्माना भी लगाया गया। हालांकि, कोर्ट ने यह छूट दी कि याचिकाकर्ता चाहे तो भविष्य में नई याचिका दायर कर सकता है।



जनता की सेहत से खिलवाड़ करने वालों पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। इस फैसले ने यह स्पष्ट कर दिया कि सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।



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