सिम्स अस्पताल की बदहाली पर हाईकोर्ट गंभीर, कहा हमारा मकसद सिर्फ व्यवस्था सुधारना
समझें क्या है पूरा मामला
बिलासपुर हाई कोर्ट में सिम्स अस्पताल की अव्यवस्थाओं को लेकर एक अहम सुनवाई हुई। यह सुनवाई जनहित याचिका पर मंगलवार को हुई। छत्तीसगढ़ चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने मामला सुना। सुनवाई के दौरान स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव की ओर से शपथ पत्र पेश किया गया।
कोर्ट ने इस शपथ पत्र को ध्यान से पढ़ा। कई बिंदुओं में एक जैसी बातें बार-बार दोहराई गई थीं। इस पर हाई कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि यह शपथ पत्र एआई (AI – Artificial Intelligence) से तैयार किया हुआ लगता है। कोर्ट ने इसे बहुत सोफिस्टिकेटेड और साफ सुथरा बताया।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
कोर्ट ने साफ कहा कि अगर सब कुछ इतना साफ सुथरा है, तो मामला कोर्ट तक आता ही नहीं। यह टिप्पणी शपथ पत्र की भाषा और बनावट को देखकर की गई। कोर्ट ने आगे कहा कि शासन या विभाग जमीनी हकीकत छिपाकर हाई कोर्ट को गुमराह करने की कोशिश न करे। यह चेतावनी सीधे सरकार को दी गई। गौर करने वाली बात यह है कि इससे पहले भी कोर्ट कमिश्नर ने शक जताया था। कोर्ट कमिश्नर को लगा था कि शपथ पत्र एआई से बना हो सकता है।
मशीनों की खरीदी की स्थिति
सुनवाई में सीजीएमएससी (CGMSC – Chhattisgarh Medical Services Corporation) की तरफ से भी शपथ पत्र पेश किया गया। इसमें चार्ट के जरिए मशीनों की खरीदी का पूरा ब्यौरा दिया गया। सिम्स के लिए कुल 31 अत्याधुनिक मशीनों का टेंडर निकाला गया था। इनमें से 13 मशीनें अब तक सप्लाई की जा चुकी हैं।
दो मशीनों के लिए जून में ही परचेज ऑर्डर जारी हो चुका है। दो और मशीनों के दाम ज्यादा थे, जिन्हें सिम्स ने मंजूरी दे दी है। इनका ऑर्डर एक-दो दिन में जारी होगा। दो मशीनें फिलहाल सिम्स में तकनीकी जांच के दौर में हैं। इनके पास होते ही फाइनेंशियल बिड खोली जाएगी। दो मशीनों का टेंडर जून में खुला है और इसका मूल्यांकन अभी जारी है। बाकी बची 6 मशीनों के लिए 9 जुलाई को बिड खोली जाएगी।
अस्पताल की जमीनी समस्याएं
कोर्ट कमिश्नर ने मार्च और अप्रैल में सिम्स का निरीक्षण किया था। उनकी रिपोर्ट में कई गंभीर खामियां सामने आई थीं। रिपोर्ट के मुताबिक अस्पताल की छत से पानी टपक रहा था। दो दिन पहले ही वहां पानी भर गया था। इसके अलावा फायर फाइटिंग सिस्टम का काम भी पूरी तरह ठप पड़ा था।
इस पर शासन ने कोर्ट को बताया कि 15 जून 2026 को पत्र जारी किया गया था। इस पत्र के जरिए फायर सिस्टम की मरम्मत शुरू करवाई गई। शासन का कहना है कि यह काम अभी तेजी से चल रहा है।
हाईकोर्ट का रुख साफ
कोर्ट ने मामले की गंभीरता को समझते हुए एक अहम बात कही। कोर्ट ने कहा कि यह कोई दंडात्मक या विपरीत मुकदमा नहीं है। कोर्ट का मकसद सिर्फ सिम्स की व्यवस्था सुधारना है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर किसी जरूरतमंद को सही इलाज मिलता है, तो वह दुआ ही देगा। कोर्ट कमिश्नर को यह अधिकार भी दिया गया कि वे जब चाहें अस्पताल जाकर दावों की सच्चाई जांच सकते हैं।
अब अगली सुनवाई में यह देखना अहम होगा कि बाकी बची मशीनों की सप्लाई कब तक पूरी होती है। फायर सिस्टम और पानी के रिसाव जैसी समस्याएं कितनी जल्दी सुलझती हैं, यह भी अहम रहेगा।
FAQ
- बिलासपुर हाई कोर्ट ने सिम्स मामले में क्या कहा?
उत्तर: कोर्ट ने कहा कि शपथ पत्र एआई से बना लगता है। कोर्ट ने सरकार से जमीनी हकीकत न छिपाने को कहा। - सिम्स में कितनी मशीनें अब तक पहुंची हैं?
उत्तर: कुल 31 मशीनों में से अब तक 13 मशीनें सप्लाई हो चुकी हैं। बाकी मशीनों पर काम जारी है। - सिम्स में फायर सिस्टम की क्या स्थिति है?
उत्तर: फायर फाइटिंग सिस्टम पहले ठप था। शासन के अनुसार 15 जून 2026 से मरम्मत का काम तेजी से चल रहा है।
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