महादेव सट्टा एप में 50 करोड़ का अवैध लेन देन, हाईकोर्ट का संदिग्ध बैंक खाते अनफ्रीज करने से इनकार

Arun Tiwari | May 21, 2026, 14:44 IST
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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महादेव सट्टा एप से जुड़े 50 करोड़ रूपए के अवैध लेन-देन मामले में संदिग्ध और फर्जी बैंक खातों को जांच पूरी होने तक अनफ्रीज करने से साफ इनकार कर दिया है।

RAIPUR : छत्तीसगढ़ के महादेव सट्टा एप से जुड़े करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेन-देन मामले में हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए संदिग्ध बैंक खातों को अनफ्रीज करने की मांग खारिज कर दी है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि जिन खातों का उपयोग कथित तौर पर अवैध वित्तीय गतिविधियों और अपराध से अर्जित रकम के ट्रांजेक्शन में किया गया हो, उन्हें जांच पूरी होने से पहले संचालित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।कोर्ट के इस फैसले को ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क के खिलाफ जांच एजेंसियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। साथ ही इसे अवैध ऑनलाइन बेटिंग और हवाला जैसे वित्तीय अपराधों पर सख्त संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है।



50 करोड़ का अवैध लें देन:

सुनवाई के दौरान जांच एजेंसियों ने अदालत को बताया कि महादेव ऑनलाइन सट्टा एप के जरिए करीब 50 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध लेन-देन का खुलासा हुआ है। इस नेटवर्क को संचालित करने के लिए कई बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया था, जिन्हें जांच के दौरान फ्रीज किया गया ताकि धन के प्रवाह और नेटवर्क से जुड़े लोगों की भूमिका की विस्तृत जांच की जा सके।



फ़र्ज़ी बैंक खातों ला नेटवर्क:

जांच एजेंसियों के मुताबिक पूरा नेटवर्क फर्जी बैंक खातों और शेल कंपनियों के जरिए संचालित किया जा रहा था। आरोप है कि सट्टेबाजी से हासिल रकम को अलग-अलग खातों के माध्यम से ट्रांसफर कर उसकी असली स्रोत को छिपाने की कोशिश की गई। इसके लिए कई लोगों के नाम पर खाते खुलवाए गए और उनका उपयोग अवैध ट्रांजेक्शन में किया गया।



बैंक सिस्टम का दुरूपयोग:

मामले में बैंकिंग सिस्टम के दुरुपयोग की भी आशंका जताई गई है। जांच के दौरान कुछ बैंक कर्मचारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में आई है। पुलिस का दावा है कि आईसीआईसीआई बैंक के कुछ कर्मचारियों की कथित मिलीभगत से फर्जी तरीके से खाते खोले गए। आरोप है कि ओटीपी और दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल कर अकाउंट संचालित किए गए। फिलहाल पुलिस बैंक कर्मचारियों और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।



कहते अनफ्रीज़ करने से इनकार:

याचिकाकर्ता विकास कुमार सिंह ने अदालत में दलील दी कि वह इस मामले में प्रत्यक्ष आरोपी नहीं है और पुलिस आवश्यक दस्तावेज व साक्ष्य पहले ही जुटा चुकी है। ऐसे में बैंक खाते को फ्रीज रखने का कोई औचित्य नहीं बनता। हालांकि अदालत ने इस तर्क को पर्याप्त नहीं माना और खाते को अनफ्रीज करने से इनकार कर दिया। इससे पहले न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत ने भी खाते को अनफ्रीज करने संबंधी याचिका खारिज कर दी थी। बाद में सत्र न्यायालय में पुनरीक्षण याचिका दायर की गई, लेकिन वहां भी निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा गया।



आरोपी पर एफआईआर:

मामले में तारबाहर थाना पुलिस ने मुख्य आरोपी रजत जैन और उसके सहयोगियों के खिलाफ केस दर्ज किया है। पुलिस का आरोप है कि आरोपियों ने संगठित तरीके से ऑनलाइन सट्टेबाजी का नेटवर्क तैयार कर कई लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाए और उनके जरिए अवैध वित्तीय लेन-देन को अंजाम दिया।




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