आईईडी मुक्त बस्तर : खत्म होगा धमाकों का डर; धरती से बारूद निकालने का महाअभियान शुरू!

Umeshwari Baghel | Apr 05, 2026, 17:51 IST
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बस्तर में आईईडी के खतरे को खत्म करने के लिए सुरक्षा बलों ने कड़ी मेहनत शुरू कर दी है। 31 मार्च को बस्तर को नक्सल मुक्त किया गया, जिसके बाद से आईईडी की तलाश तेज कर दी गई है।

NEWS IN SHORT

  • बस्तर में आईईडी हटाने के लिए सुरक्षा बलों का अभियान तेज हो गया हैं
  • आईईडी की तलाश में बस्तर में हर रोज़ ऑपरेशन चल रहा हैं।
  • बस्तर में आईईडी से छुटकारा पाने के लिए सुरक्षा बल पूरी ताकत से काम कर रहे हैं।
  • आईईडी के खिलाफ बस्तर में सुरक्षा बलों ने महाअभियान शुरू कर दिया हैं
  • जल्द आईईडी मुक्त होगा हमारा बस्तर

NEWS IN DETAIL

Jagdalpur। छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में नक्सलियों के सबसे घातक हथियार आईईडी को ख़त्म करने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। छत्तीसगढ़ गृहमंत्री विजय शर्मा ने बस्तर प्रवास के दौरान ऐलान किया था कि बस्तर को आईईडी मुक्त बनाने के लिए अभियान चलाया जाएगा।



यह अभियान उसी तरह से चलाया जाएगा जैसे पहले बस्तर को ओडीएफ बनाने के लिए काम किया गया था। उनका कहना है कि असली जीत माओवाद को खत्म करना नहीं है, बल्कि बस्तर की धरती को पूरी तरह से सुरक्षित करना है।



आईईडी की तलाश में जुटे सुरक्षा बल

31 मार्च को बस्तर को नक्सलियों से मुक्त किए जाने के बाद से सुरक्षा बलों की पूरी ताकत आईईडी की तलाश में झोक दी गई है। आईईडी के खिलाफ लड़ाई में डॉग स्कवॉड, बम निरोधक दस्ता और प्रशिक्षित जवानों की टीम एक्टिव है। वो तकनीकी दक्षता और सतर्कता से आईईडी की पहचान कर उन्हें निष्क्रय करने में जुटे हुए हैं। यह खोज पूरे जिले में युद्ध स्तर पर चल रहा है



आईईडी के कारण हुई जनहानि

आईईडी के खतरनाक इस्तेमाल ने बस्तर क्षेत्र में वर्षों तक आतंक मचाया। 1991 से 31 मार्च 2026 तक की अवधि में कुल एक हजार आठ सौ नवासी आईईडी विस्फोटों की घटनाएं दर्ज की गई हैं। इन विस्फोटों का उद्देश्य सुरक्षा बलों को निशाना बनाना, आम जनता में डर फैलाना और क्षेत्र के विकास कार्यों को रोकना था।



इन विस्फोटों के कारण सुरक्षा बलों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। आंकड़ों के मुताबिक, 527 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए और 930 घायल हुए। इसके अलावा, 161 नागरिकों की मौत हुई और 254 नागरिक घायल हुए हैं। यह आंकड़े इस बात को साबित करते हैं कि माओवादी हिंसा का असर आम जनता और सुरक्षा बलों दोनों पर पड़ा है।



आईईडी खत्म करने के लिए बड़ा एक्शन

बस्तर में आईईडी को ख़त्म करने के लिए सुरक्षाबल निरंतर प्रभावी कदम उठा रहे हैं। बम निरोधक दस्ते और आधुनिक उपकरणों के माध्यम से रोजाना सर्च ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं। इन ऑपरेशनों के जरिए बड़ी संख्या में आईईडी का समय रहते पता लगाकर उन्हें ख़त्म किया जा रहा है, सुरक्षाबलों की सक्रियता के कारण अब तक कई महत्वपूर्ण विस्फोटों को रोका जा चुका है।



आगे का रास्ता आईईडी मुक्त बस्तर

बस्तर आईजी सुंदरराज पट्टलिंगम ने बताया कि माओवादियों द्वारा लगाए गए आईईडी सिर्फ सुरक्षा बलों को निशाना नहीं बनाते, बल्कि यह आम नागरिकों, पशुधन और पूरे समाज के लिए भी बड़ा खतरा हैं। बस्तर पुलिस और सुरक्षा बल पूरी सतर्कता से आईईडी के खिलाफ काम कर रहे हैं ताकि लोगों की जानमाल की रक्षा की जा सके। उनका उद्देश्य बस्तर के गांवों को पूरी तरह से आईईडी मुक्त बनाना है



नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में बस्तर को मिलेगी राहत

माओवादियों द्वारा लगाए गए आईईडी की लगातार खोज और निष्क्रिय करने से बस्तर में नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई को मजबूती मिल रही है। सरकार और सुरक्षा बलों के प्रयासों के चलते क्षेत्र में शांति और सुरक्षा का माहौल बन रहा है। इन प्रयासों से यह उम्मीद जताई जा रही है कि बस्तर जल्द ही नक्सल मुक्त होगा और यहां के लोग भयमुक्त होकर अपना जीवन जी सकेंगे।



बस्तर में आईईडी से जुड़ी महत्वपूर्ण तथ्य

आईईडी की खोज युद्ध स्तर पर शुरू : 31 मार्च को बस्तर नक्सल मुक्त होने के बाद से सुरक्षा बलों ने आईईडी की खोज तेज कर दी है।



1289 विस्फोट की घटनाएं : 1991 से 31 मार्च 2026 तक, बस्तर में कुल 1289 आईईडी विस्फोट की घटनाएं हुई हैं



527 सुरक्षाकर्मी शहीद : इन विस्फोटों में अब तक 527 सुरक्षाकर्मी शहीद हो चुके हैं



161 नागरिकों की मौत : आईईडी विस्फोटों के कारण 161 नागरिकों की मौत हुई है



निरंतर प्रयास : बम निरोधक दस्ते और प्रशिक्षित जवान नियमित रूप से सर्च ऑपरेशन्स और रोड ओपनिंग पार्टियों के माध्यम से आईईडी का समय रहते पता लगा रहे हैं और उन्हें निष्क्रिय कर रहे हैं।



आईईडी के खिलाफ सामूहिक प्रयास : बस्तर पुलिस और सुरक्षा बल पूरी सतर्कता के साथ आईईडी की पहचान, निष्क्रयकरण के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं, ताकि नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।



निष्कर्ष

बस्तर में माओवादियों के द्वारा लगाए गए आईईडी का खतरा अब कम होने की ओर है। सुरक्षा बलों की सक्रियता और तकनीकी उपायों से आईईडी को निष्क्रिय किया जा रहा है। बस्तर को आईईडी मुक्त बनाने के लिए राज्य सरकार ने युद्ध स्तर पर अभियान शुरू किया है।



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