इजराइल के लिए नर्सों की भर्ती पर मचा बवाल, राजभवन के बाद सरकार ने बैठाई जांच
छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से इजराइल में होम-केयरगिवर भर्ती का विज्ञापन अब बड़े विवाद में घिर गया है। द सूत्र की खबर के बाद मामला सीधे लोकभवन पहुंच गया।
शिकायत के बाद राज्य सरकार ने भी पूरे मामले की जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। जिसमें तय होगा कि 2 लाख रुपए महीना तक की कमाई का दावा करने वाली नौकरी कितनी सुरक्षित है।
नर्सों से घरेलू काम का आरोप
विवाद की जड़ भर्ती का जॉब डिस्क्रिप्शन है। जिसका खुलासा द सूत्र ने अपनी खबर में किया था। जिसके बाद कांग्रेस के चिकित्सा प्रकोष्ठ अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता इसे लोकभवन ले गए।
आरोप है कि छत्तीसगढ़ की बेटियों से मरीजों की देखभाल के साथ खाना बनाना, घर की सफाई, कपड़े धोना और घरेलू खरीदारी जैसे काम भी कराए जाएंगे।
ऐसे काम के लिए जीएनएम, बीएससी नर्सिंग और पोस्ट बेसिक बीएससी नर्सिंग जैसी पेशेवर डिग्री वालों को हायर किया जा रहा है। उनका कहना है कि यह नर्सिंग पेशे की गरिमा के खिलाफ है।
90 महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल
डॉ. गुप्ता ने शिकायत में कहा है कि 3500 पदों में करीब 90 प्रतिशत महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। ऐसे समय में जब इजराइल लगातार युद्ध और सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रहा है, वहां बड़ी संख्या में महिला अभ्यर्थियों को भेजना गंभीर सुरक्षा जोखिम पैदा कर सकता है। उन्होंने सरकार से इस पहलू पर भी जवाब मांगा है।
शोषण की आशंका भी जताई
शिकायत में भर्ती विज्ञापन की भाषा पर भी सवाल उठाए गए हैं। स्पेशल ड्यूटी और नियोक्ता की आवश्यकता अनुसार कार्य जैसी शर्तों को अस्पष्ट बताते हुए कहा गया है कि इनके जरिए उम्मीदवारों से तय सीमा से बाहर भी काम कराया जा सकता है।
इससे पेशेवर शोषण और श्रम अधिकारों के उल्लंघन की आशंका बढ़ सकती है।
लोकभवन से सरकार तक हलचल
मामला लोकभवन पहुंचने के बाद राज्यपाल सचिवालय ने इसे लोक स्वास्थ्य, परिवार कल्याण एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग को भेज दिया। इसके बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग के अवर सचिव ने आयुक्त, चिकित्सा शिक्षा को पूरे मामले की नियमानुसार जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश जारी किए हैं। अब सरकार की रिपोर्ट पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
सरकार की योजना क्या थी
यह भर्ती भारत सरकार और इजराइल के बीच हुए फ्रेमवर्क एग्रीमेंट के तहत प्रस्तावित है। केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय ने राज्यों से 3500 होम-केयरगिवर्स उपलब्ध कराने को कहा था।
इसी क्रम में छत्तीसगढ़ नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल ने नर्सिंग कॉलेजों से इच्छुक उम्मीदवारों की सूची मांगी थी। अब भर्ती की शर्तों और सुरक्षा संबंधी सवालों के चलते पूरी प्रक्रिया पर नए सिरे से बहस छिड़ गई है।
अब सरकार के सामने बड़ा सवाल
मामला सिर्फ विदेश में नौकरी का नहीं, बल्कि प्रशिक्षित नर्सों के सम्मान, महिलाओं की सुरक्षा और भर्ती की पारदर्शिता का बन गया है। विपक्ष इसे नर्सिंग पेशे का अपमान बता रहा है, जबकि सरकार जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रही है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या विवादित शर्तों में बदलाव होगा या पूरी भर्ती प्रक्रिया की ही समीक्षा करनी पड़ेगी।
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