इजराइल में मरीजों का खाना बनाएंगी छग की बेटियां : सरकार दे रही अनोखा अवसर

VINAY VERMA | Jun 13, 2026, 13:37 IST
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इजराइल भर्ती पर छग में भारी बवाल
इजराइल भर्ती पर छग में भारी बवाल

छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से इजराइल में रोजगार उपलब्ध कराने के लिए जारी विज्ञापन ने विवाद खड़ा कर दिया है। सरकार इसे युवाओं के लिए सुनहरा अवसर बता रही है। इधर, नर्सिंग समुदाय इसे प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों के सम्मान से जुड़ा गंभीर मुद्दा बता रहा है।

NEWS IN SHORT

  • 3500 पदों पर इजराइल में भर्ती का विज्ञापन जारी
  • 145 सेंटीमीटर हाइट और 45 किलो वजन अनिवार्य
  • देखभाल के साथ खाना बनाना और कपड़े धोना होगा
  • 90% महिलाओं की भर्ती का दावा, सुरक्षा पर उठे सवाल
  • राज्यपाल से शिकायत, प्रक्रिया पर रोक की मांग

NEWS IN DETAIL

छग की बेटियों के लिए सरकार अनोखा अवसर लेकर आई है। सरकारी विज्ञापन के अनुसार बेटियों को इजराइल जाना होगा। नौकरी होम-बेस्ड केयरगिवर की है, जिसके तहत वहां मरीजों की देखभाल करनी होगी। खाना बनाना, कपड़े धोना भी होगा।

आवेदिका को अच्छी इंग्लिश आनी चाहिए। हाइट कम से कम 145 सेंटीमीटर और वजन 45 किलोग्राम होना जरूरी है। काम के लिए 2 साल का अनुबंध होगा। सरकार का कहना है कि यह भारत-इजराइल रोजगार कार्यक्रम के तहत रोजगार का बड़ा अवसर है।

3500 पदों में महिलाओं को प्राथमिकता

सरकार की तरफ से 3500 पदों के लिए विज्ञापन निकाला गया है, जिसमें 90 प्रतिशत महिलाओं की भर्ती का लक्ष्य रखा गया है। होम केयर के अलावा नर्सिंग, इमरजेंसी सर्विसेज और ईएनटी टेक्नीशियन जैसे पद भी शामिल हैं। विज्ञापन के अनुसार 2 लाख रुपये प्रतिमाह वेतन दिया जाएगा, जिसमें सभी भत्ते शामिल होंगे। एक शर्त यह भी है कि आवेदक पहले कभी इजराइल में काम न किया हो।

भर्ती में इन्हें होगी पात्रता

भर्ती के लिए जीएनएम, बीएससी नर्सिंग, पोस्ट बेसिक बीएससी नर्सिंग, नर्स असिस्टेंट, मिडवाइफ, फिजियोथेरेपी और अन्य स्वास्थ्य संबंधी योग्यता रखने वाले अभ्यर्थियों को पात्र माना गया है।

मरीजों के कपड़े धोना, खाना बनाना जिम्मेदारी

विज्ञापन में जिन कार्यों का उल्लेख किया गया है, उनमें मरीजों की देखभाल के अलावा खाना बनाना, कपड़े धोना, घर की सफाई करना, खरीदारी करना और नियोक्ता की आवश्यकता के अनुसार अन्य कार्य करना भी शामिल है।
यहीं से सवाल खड़े हो रहे हैं

कि यदि भर्ती स्वास्थ्यकर्मियों और नर्सिंग योग्यताधारियों की हो रही है, तो उनसे घरेलू सहायक जैसे कार्य करवाने की आवश्यकता क्यों है? स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल पांडेय की मांग है कि सरकार प्रशिक्षित युवाओं को राज्य में ही नौकरी दे। इससे न केवल खाली पद भरेंगे। बल्कि मजबूरी में विदेश नहीं जाना होगा।

नर्सिंग की गरिमा पर चोट - कांग्रेस

कांग्रेस ने इस मामले में राज्यपाल को शिकायत भेजी है। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी चिकित्सा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता का कहना है कि नर्सों का काम इलाज में सहयोग देना और स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। ऐसे में प्रशिक्षित नर्सों से कपड़े धुलवाना, खाना बनवाना और घरेलू काम करवाना नर्सिंग पेशे की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला कदम है।

क्या प्रदेश में नर्सों की कमी और बढ़ेगी?

प्रदेश के सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में पहले से ही नर्सिंग स्टाफ की कमी की शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में प्रशिक्षित नर्सिंग कर्मियों को विदेश भेजना राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी असर डाल सकता है। कर्मचारी नेता आलोक मिश्रा का कहना है

कि सरकार एक तरफ स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की बात करती है, दूसरी तरफ प्रशिक्षित मानव संसाधन को विदेशों में भेजने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। इससे ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बढ़ सकता है।

महिलाओं की सुरक्षा पर सबसे बड़ा सवाल

भर्ती प्रक्रिया में 90 प्रतिशत महिलाओं के चयन की बात कही गई है। ऐसे में सुरक्षा का मुद्दा सबसे अहम बन गया है। इजराइल पिछले कुछ वर्षों से युद्ध और सैन्य तनाव की परिस्थितियों से गुजर रहा है।

ऐसे माहौल में हजारों महिलाओं को रोजगार के लिए भेजने के फैसले पर सवाल उठ रहे हैं। सवाल उठता है कि क्या सरकार ने इन अभ्यर्थियों के लिए पर्याप्त बीमा, कानूनी सुरक्षा, आपातकालीन निकासी योजना, कार्यस्थल सुरक्षा और शिकायत निवारण तंत्र की व्यवस्था सार्वजनिक की है?

सरकार के लिए अवसर, विपक्ष के लिए मुद्दा

सरकार इस भर्ती को युवाओं के लिए बड़ा आर्थिक अवसर बता रही है। दो लाख रुपये महीने तक वेतन, आवास और अन्य सुविधाओं का दावा किया जा रहा है। बेरोजगारी से जूझ रहे युवाओं के लिए यह प्रस्ताव आकर्षक भी दिखाई देता है।

लेकिन दूसरी तरफ विपक्ष इसे रोजगार से ज्यादा सम्मान, सुरक्षा और पेशेवर पहचान का मुद्दा बना रहा है। सवाल यह है कि क्या छत्तीसगढ़ की बेटियों को स्वास्थ्यकर्मी के रूप में विदेश भेजा जा रहा है या घरेलू सहायिका जैसी भूमिका निभाने के लिए?

IMP FACTS

3500 पदों पर इजराइल में भर्ती का विज्ञापन जारी।

भर्ती में 90% महिलाओं को प्राथमिकता देने का दावा।

2 लाख रुपए प्रतिमाह तक वेतन का उल्लेख।

न्यूनतम 145 सेमी हाइट और 45 किलो वजन अनिवार्य।

नौकरी 2 साल के अनुबंध पर आधारित।

मरीजों की देखभाल के साथ खाना बनाना, कपड़े धोना और घरेलू कार्य भी जिम्मेदारी।

पात्रता में GNM, BSc Nursing, Post Basic BSc Nursing, Nursing Assistant, Midwife, Physiotherapy सहित स्वास्थ्य क्षेत्र की योग्यताएं शामिल।

शर्त: आवेदक पहले कभी इजराइल में काम न किया हो।

कांग्रेस ने राज्यपाल से शिकायत कर भर्ती प्रक्रिया पर रोक की मांग की।

महिला सुरक्षा, नर्सिंग पेशे की गरिमा और प्रदेश में नर्सिंग स्टाफ की कमी को लेकर विवाद गहराया।

अब सरकार को देना होगा जवाब

इजराइल रोजगार योजना पर शुरू हुआ यह विवाद आने वाले दिनों में और गहरा सकता है। राज्यपाल तक शिकायत पहुंच चुकी है और भर्ती प्रक्रिया की समीक्षा की मांग भी उठ गई है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह वास्तव में छत्तीसगढ़ की बेटियों के लिए दो लाख रुपये महीने वाला सुनहरा अवसर है, या फिर आकर्षक पैकेज के पीछे छिपी ऐसी शर्तें हैं, जो उनके सम्मान, सुरक्षा और पेशेवर पहचान पर सवाल खड़े करती हैं? सरकार को अब इन तमाम सवालों के स्पष्ट जवाब देने होंगे।

FAQ

  1. इजराइल भर्ती योजना में किस तरह की नौकरी है?
    इस योजना में होम-बेस्ड केयरगिवर, नर्सिंग और हेल्थकेयर से जुड़े पद शामिल हैं, जहां मरीजों की देखभाल के साथ घरेलू कार्य भी करने होंगे।
  2. इस भर्ती में किन लोगों को पात्र माना गया है?
    GNM, BSc Nursing, Post Basic BSc Nursing, Nursing Assistant, Midwife और Physiotherapy जैसी योग्यता रखने वाले अभ्यर्थी आवेदन कर सकते हैं।
  3. विवाद की मुख्य वजह क्या है?
    नर्सिंग पेशे से जुड़े लोगों से घरेलू काम करवाने की शर्त, महिलाओं की सुरक्षा, शारीरिक मानक और प्रदेश के स्वास्थ्य स्टाफ पर पड़ने वाले असर को लेकर विवाद खड़ा हुआ है।

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