जगदलपुर साख समिति में 3 करोड़ के गबन मामले में दूसरी बड़ी गिरफ्तारी
समझें क्या है पूरा मामला
- 3 करोड़ के साख समिति घोटाले में दूसरा प्रधान आरक्षक गिरफ्तार
- जगदलपुर समिति गड़बड़ी केस में पुलिस की बड़ी कार्रवाई
- लोन खातों में हेराफेरी का आरोप, जांच के घेरे में कर्मचारी
- शिवकांत तिवारी के बाद संजय चौहान पर कसा शिकंजा
- 5वीं वाहिनी साख समिति मामले में बढ़ा जांच का दायरा
जगदलपुर में 5वीं वाहिनी सशस्त्र बल की कर्मचारी कल्याण साख समिति से जुड़े करीब 3 करोड़ रुपए के कथित गबन मामले में पुलिस ने एक और गिरफ्तारी की है। परपा पुलिस ने प्रधान आरक्षक संजय चौहान को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच के दौरान उनकी भूमिका संदिग्ध सामने आई।
इस मामले में यह दूसरी गिरफ्तारी है। इससे पहले समिति के अध्यक्ष और प्रधान आरक्षक शिवकांत तिवारी को पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है। अब जांच का दायरा समिति से जुड़े दूसरे कर्मचारियों और पुराने वित्तीय लेन-देन तक बढ़ाया जा रहा है।
2012 से 2021 के रिकॉर्ड की हो रही जांच
पुलिस के अनुसार, मामला जगदलपुर के कंगोली स्थित 5वीं वाहिनी कर्मचारी कल्याण साख समिति से जुड़ा है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2012 से 2021 के बीच समिति के लोन खातों और कर्मचारियों की जमा राशि में गड़बड़ी की गई।
आरोप है कि कुछ वित्तीय रिकॉर्ड और दस्तावेजों में हेरफेर कर करीब 3 करोड़ रुपए की राशि का कथित गबन किया गया। शिकायत मिलने के बाद परपा थाने में मामला दर्ज किया गया और पुलिस ने समिति के पुराने खातों, लोन रिकॉर्ड, जमा राशि और अन्य दस्तावेजों की जांच शुरू की।
संजय चौहान से पूछताछ के बाद हुई कार्रवाई
मामले की जांच आगे बढ़ने पर पुलिस ने समिति के वित्तीय कामकाज से जुड़े कर्मचारियों से पूछताछ शुरू की। इसी दौरान प्रधान आरक्षक संजय चौहान से भी पूछताछ की गई।
पुलिस का कहना है कि संजय चौहान समिति के वित्तीय मामलों से जुड़े रहे हैं और शिवकांत तिवारी के सहयोगी के रूप में भी काम कर चुके हैं। पूछताछ और दस्तावेजों की जांच के बाद उनकी भूमिका को लेकर सवाल खड़े हुए। इसके बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया।
29 जुलाई को गिरफ्तार हुए थे शिवकांत तिवारी
इस मामले में पहली गिरफ्तारी 29 जुलाई को हुई थी। पुलिस ने समिति के तत्कालीन अध्यक्ष और प्रधान आरक्षक शिवकांत तिवारी को गिरफ्तार किया था।
पुलिस के मुताबिक, शुरुआती जांच में उनके कार्यकाल से जुड़े वित्तीय लेन-देन और दस्तावेजों की पड़ताल की गई थी। इसके बाद जांच केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रखी गई और समिति के दूसरे कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में लाई गई।
परिवार ने उठाए थे जांच पर सवाल
शिवकांत तिवारी की गिरफ्तारी के बाद उनके परिजनों ने जगदलपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। परिवार ने शिवकांत को निर्दोष बताते हुए कहा था कि समिति का काम कई कर्मचारियों के जरिए संचालित होता था, इसलिए मामले में सभी जिम्मेदार लोगों की भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
परिजनों ने यह भी मांग की थी कि पूरे वित्तीय रिकॉर्ड की जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि कथित गड़बड़ी किस स्तर पर हुई और इसके लिए कौन-कौन जिम्मेदार था।
पुलिस खंगाल रही पैसा कहां और कैसे गया
बस्तर एसपी शलभ कुमार सिन्हा के मुताबिक, मामले की जांच अभी खत्म नहीं हुई है। पुलिस समिति के लोन खातों, कर्मचारियों की जमा राशि, भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड और अन्य वित्तीय दस्तावेजों का मिलान कर रही है।
जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कथित तौर पर करीब 3 करोड़ रुपए की हेराफेरी किस तरीके से हुई, रकम किन खातों से निकली या ट्रांसफर हुई और इसमें कितने लोगों की भूमिका रही।
पुलिस ने साफ किया है कि जांच में यदि किसी अन्य कर्मचारी या व्यक्ति की संलिप्तता के सबूत मिलते हैं तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मामले में और पूछताछ तथा गिरफ्तारियां होने की संभावना से इनकार नहीं किया गया है।
FAQ
- जगदलपुर 5वीं वाहिनी साख समिति घोटाला मामला क्या है?
इस मामले में 2012 से 2021 के बीच समिति के लोन खातों और जमा राशि में करीब 3 करोड़ रुपए की कथित वित्तीय गड़बड़ी का आरोप है। - इस मामले में अब तक कितने लोगों की गिरफ्तारी हुई है?
मामले में अब तक दो प्रधान आरक्षकों की गिरफ्तारी हुई है। पहले शिवकांत तिवारी और उसके बाद संजय चौहान को गिरफ्तार किया गया है। - पुलिस इस मामले में क्या जांच कर रही है?
पुलिस लोन खातों, जमा राशि, वित्तीय रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच कर रही है। जांच में अन्य लोगों की भूमिका सामने आने पर कार्रवाई की जा सकती है।
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