झीरम घाटी हत्याकांड में नया मोड़, 10 दोषियों की फांसी पर अब हाईकोर्ट करेगा फैसला

Umeshwari Baghel | Oct 17, 2026, 18:43 IST
झीरम घाटी हत्याकांड
छत्तीसगढ़ के चर्चित झीरम घाटी हत्याकांड में 10 दोषियों को सुनाई गई फांसी की सजा का मामला अब हाईकोर्ट पहुंच गया है। जगदलपुर की NIA विशेष अदालत ने सितंबर में सभी 10 दोषियों को मौत की सजा सुनाई थी। अब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट इस फैसले की समीक्षा करेगा। कोर्ट की मंजूरी के बाद ही फांसी की सजा आगे बढ़ सकेगी। फिलहाल मामले की सुनवाई की तारीख तय नहीं हुई है।

13 साल बाद आया था फैसला, अब हाईकोर्ट में होगी सुनवाई

छत्तीसगढ़ के झीरम घाटी हत्याकांड में एक बार फिर कानूनी प्रक्रिया तेज हो गई है। इस मामले में 10 दोषियों को मिली फांसी की सजा की पुष्टि के लिए केस बिलासपुर स्थित हाईकोर्ट भेजा गया है।



जगदलपुर की NIA विशेष अदालत ने 5 सितंबर 2026 को सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया था। इसके बाद 16 सितंबर को उन्हें फांसी की सजा सुनाई गई थी। अब हाईकोर्ट यह देखेगा कि निचली अदालत का फैसला कानूनी तौर पर सही है या नहीं।




101 गवाहों के बयान के बाद दोषी पाए गए 10 आरोपी

झीरम घाटी हत्याकांड की सुनवाई करीब 13 साल तक चली। इस दौरान अदालत में 101 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। मामले में कुल 11 आरोपी थे, लेकिन सुनवाई के दौरान एक आरोपी की मौत हो गई थी।



विशेष अदालत के न्यायाधीश अजय सिंह राजपूत ने गवाहों के बयान और पेश किए गए सबूतों के आधार पर बाकी 10 आरोपियों को दोषी पाया। इसके बाद सभी को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई।




फांसी की सजा पर हाईकोर्ट की मंजूरी क्यों जरूरी?

कानून के मुताबिक, किसी निचली अदालत के फांसी की सजा सुनाने से ही उसे लागू नहीं किया जा सकता। इसके लिए संबंधित हाईकोर्ट की पुष्टि जरूरी होती है।



इसी प्रक्रिया के तहत झीरम घाटी हत्याकांड का मामला हाईकोर्ट भेजा गया है। यहां खंडपीठ विशेष अदालत के फैसले, गवाहों के बयान और मामले से जुड़े दस्तावेजों की जांच करेगी।



दोषियों को निचली अदालत के फैसले के खिलाफ अपील करने के लिए 30 दिन का समय भी दिया गया था। हाईकोर्ट इस सजा को बरकरार रख सकता है, इसमें बदलाव कर सकता है या इसे रद्द भी कर सकता है। इसके बाद भी कानून के तहत आगे अपील के विकल्प उपलब्ध रहेंगे।




25 मई 2013 को झीरम घाटी में क्या हुआ था?

छत्तीसगढ़ के राजनीतिक इतिहास में 25 मई 2013 का दिन एक बड़ी त्रासदी के रूप में दर्ज है। उस दिन बस्तर के दरभा थाना क्षेत्र में स्थित झीरम घाटी से कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा का काफिला गुजर रहा था।



इसी दौरान नक्सलियों ने काफिले पर घात लगाकर हमला कर दिया। अचानक हुए इस हमले में कांग्रेस के कई बड़े नेताओं समेत 29 लोगों की जान चली गई थी। कई लोग घायल भी हुए थे।



इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था। हमले के बाद प्रदेश की राजनीति में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल उठे थे।




हमले में कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं की गई थी जान

झीरम घाटी हमले में कांग्रेस ने अपने कई बड़े नेताओं को खो दिया था। इनमें तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल और पूर्व नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा शामिल थे।



इस हमले का छत्तीसगढ़ की राजनीति पर गहरा असर पड़ा था। घटना के बाद इसकी जांच और दोषियों को सजा दिलाने की मांग लगातार उठती रही।



अब हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी निगाहें

करीब 13 साल बाद विशेष अदालत से फैसला आने के बाद अब मामला हाईकोर्ट में पहुंच चुका है। यहां मृत्युदंड की पुष्टि से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।



फिलहाल सुनवाई की तारीख सामने नहीं आई है। हाईकोर्ट की समीक्षा के बाद तय होगा कि सभी 10 दोषियों की फांसी की सजा बरकरार रहेगी या उसमें कोई बदलाव होगा।



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