ईवीएम में छेड़छाड़ से हाईकोर्ट का इंकार, भाजपा सांसद के खिलाफ दायर याचिका खारिज
News In Short
- ईवीएम छेड़छाड़ के आरोपों पर हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की।
- बिना ठोस सबूत के ईवीएम जांच का आदेश देने से इनकार।
- याचिकाकर्ता ने सांसद के चुनाव को चुनौती दी थी।
- मशीन नंबर में अंतर और चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप।.
- कोर्ट ने सबूत पेश करने के बाद याचिका दाखिल करने की छूट दी।
News In Details
Raipur. छत्तीसगढ़ की कांकेर लोकसभा सीट से जुड़े चुनाव विवाद में हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। ईवीएम में छेड़छाड़ के आरोपों को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि बिना ठोस सबूत के मशीनों की दोबारा जांच का आदेश नहीं दिया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि ऐसे गंभीर आरोपों के लिए ठोस मौखिक या दस्तावेजी सबूत का होना जरूरी है, तभी किसी तरह की न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। यह मामला चुनाव याचिका के जरिए उठाया गया था, जिसमें ईवीएम की जांच की मांग की गई थी।
क्या है पूरा मामला
कांकेर से निर्वाचित बीजेपी सांसद भोजराज नाग (BJP MP Bhojraj Nag) के खिलाफ तत्कालीन उम्मीदवार बीरेश ठाकुर ने चुनाव याचिका दायर की थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि 26 अप्रैल 2024 को हुए लोकसभा चुनाव में इस्तेमाल हुई ईवीएम (बैलेट यूनिट, कंट्रोल यूनिट और वीवीपेट) में गड़बड़ी हुई है, जिससे चुनाव परिणाम प्रभावित हुआ।
हाईकोर्ट का फैसला
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की मांग को फिलहाल खारिज करते हुए कहा कि ईवीएम की दोबारा जांच के लिए पहले ठोस मौखिक या दस्तावेजी सबूत पेश करना जरूरी है। केवल आरोपों के आधार पर जांच का आदेश नहीं दिया जा सकता। हालांकि कोर्ट ने याचिकाकर्ता को राहत देते हुए कहा कि वह पहले सबूत रिकॉर्ड पर लाए और फिर नई एप्लीकेशन दाखिल कर सकता है।
क्या लगाए गए आरोप
याचिका में चुनाव प्रक्रिया को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इसमें रिटर्निंग ऑफिसर पर कथित रूप से गलत इरादे से कार्य करने का आरोप लगाया गया है, जिससे चुनाव की निष्पक्षता प्रभावित होने का दावा किया गया है। इसके साथ ही याचिकाकर्ता ने मतदान प्रक्रिया में कई प्रकार की अनियमितताओं और गड़बड़ियों की बात भी कही है। सबसे प्रमुख आरोप ईवीएम मशीनों के नंबरों में अंतर को लेकर लगाया गया है, जिसमें अलग-अलग रिपोर्ट और फॉर्म में दर्ज मशीन नंबरों में असमानता होने का दावा किया गया है।
किन सीटों पर उठाए सवाल
याचिकाकर्ता ने दावा किया कि कुछ विधानसभा क्षेत्रों के पोलिंग स्टेशनों के फॉर्म 17C में दर्ज मशीन नंबर और रैंडमाइजेशन रिपोर्ट में अंतर है। इनमें शामिल हैं:
- गुंडरदेही (61)
- सिहावा (56)
- संजरी-बालोद (59)
- डोंडी लोहारा (एसटी) (60)
- केशकाल (82)
आगे क्या होगा
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब मामला पूरी तरह सबूतों पर निर्भर करेगा। यदि याचिकाकर्ता ठोस दस्तावेजी प्रमाण पेश करता है, तो वह दोबारा ईवीएम जांच की मांग कर सकता है। यह फैसला साफ संकेत देता है कि चुनाव जैसे संवेदनशील मामलों में केवल आरोप नहीं, बल्कि पुख्ता सबूत ही न्यायिक कार्रवाई का आधार बन सकते हैं।
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