छत्तीसगढ़ में मलेरिया से 13 दिनों में 5 मौतें, NHRC ने मुख्य सचिव को भेजा नोटिस

Harrison Masih | Aug 06, 2026, 12:50 IST
छत्तीसगढ़ में मलेरिया
छत्तीसगढ़ के कांकेर में 13 दिनों में मलेरिया से पांच लोगों की मौत के बाद NHRC ने स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

समझें क्या है पूरा मामला...

छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में मलेरिया के बढ़ते प्रकोप और लगातार हो रही मौतों पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग यानी NHRC (National Human Rights Commission) ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने मीडिया रिपोर्ट के आधार पर मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य के मुख्य सचिव को नोटिस भेजा है। मुख्य सचिव को दो सप्ताह के भीतर इस मामले में विस्तृत जवाब देना होगा। 28 जुलाई को 11 साल के एक बच्चे की मौत के साथ ही जिले में 13 दिनों के भीतर मलेरिया से जान गंवाने वालों की संख्या पांच हो गई है।



यह मामला अब सिर्फ स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी इसकी गंभीरता को माना जा रहा है।



NHRC का यह कदम कांकेर में लगातार बिगड़ते हालात की तरफ इशारा करता है।



पहले निगेटिव, फिर आई पॉजिटिव रिपोर्ट

जानकारी के मुताबिक बच्चे की तबीयत बिगड़ने पर परिजनों ने सबसे पहले एक निजी लैब में उसकी जांच कराई थी। उस जांच में रिपोर्ट निगेटिव आई थी।



बाद में हालत गंभीर होने पर बच्चे को अलबेलापारा अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां हुई जांच में मलेरिया पॉजिटिव की पुष्टि हुई। लेकिन तब तक मासूम की जान जा चुकी थी।



13 दिन में पांचवीं मौत

कांकेर जिले में यह लगातार पांचवीं मौत है, जो बीते 13 दिनों के भीतर मलेरिया के कारण हुई है। 28 जुलाई को हुई इस बच्चे की मौत ने एक बार फिर जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।



लगातार हो रही इन मौतों ने स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग दोनों की चुनौतियों को उजागर कर दिया है।



मलेरिया से मौतें


NHRC ने मांगा विस्तृत जवाब

मीडिया में आई रिपोर्टों का संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया है। आयोग ने दो सप्ताह के भीतर इस मामले में विस्तृत जवाब मांगा है।



यह कदम बताता है कि आयोग इस मामले को गंभीरता से ले रहा है और स्वास्थ्य व्यवस्था में हुई कथित खामियों की जांच चाहता है।



जांच में देरी बनी बड़ा सवाल

इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि शुरुआती निजी जांच में मलेरिया की पुष्टि क्यों नहीं हो सकी। अगर समय रहते सही जांच रिपोर्ट मिल जाती, तो शायद इलाज जल्दी शुरू हो सकता था।



यह देरी अब जांच का मुख्य केंद्र बिंदु बन गई है और आने वाले समय में इस पर और स्पष्टता आ सकती है।



अब आगे क्या होगा

मुख्य सचिव को अब दो सप्ताह के भीतर NHRC को जवाब देना होगा। इस जवाब में स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली, जांच प्रक्रिया में हुई देरी और मलेरिया नियंत्रण के उपायों पर स्पष्टीकरण देना होगा।



आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि राज्य सरकार इस मामले में क्या ठोस कदम उठाती है और कांकेर में मलेरिया की स्थिति को नियंत्रित करने के लिए क्या नई रणनीति अपनाई जाती है।



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