मानसून के बीच बड़ा डेंगू-मलेरिया का खतरा, जयपुर सहित आठ जिलों पर हाई रिस्क
Ashish Bhardwaj | Jul 21, 2026, 15:48 IST
डेंगू-मलेरिया पर हाई अलर्ट
कमजोर मानसून के बीच स्वास्थ्य मंत्रालय ने डेंगू-मलेरिया बढ़ने की आशंका जताई है। राजस्थान के 8 जिले हाई रिस्क में शामिल, जिनमें जयपुर भी है। जयपुर में 3 साल में डेंगू के 4696 केस मिले।
समझें क्या है पूरा मामला
- केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने डेंगू-मलेरिया को लेकर अलर्ट जारी किया है।
- मंत्रालय ने सभी राज्यों को मौसमी बीमारियों से निपटने के लिए पहले से तैयारी रखने के निर्देश दिए हैं।
- राजस्थान के जयपुर समेत 8 जिलों को डेंगू-मलेरिया के लिए हाई रिस्क एरिया में रखा गया है।
- जयपुर में 2023 से 2025 के बीच डेंगू के 4696 मामले सामने आए हैं।
- राज्यों को रैपिड रिस्पॉन्स टीम बनाने और दवाओं व ब्लड स्टॉक तैयार रखने को कहा गया है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने हाल ही में सभी राज्यों को पत्र लिखा है। इस पत्र में मौसमी बीमारियों के बढ़ने की आशंका जताई गई है। साथ ही राज्यों से बचाव की तैयारियां पहले से रखने को कहा गया है। मंत्रालय ने हर राज्य के लिए अलग-अलग हाई रिस्क जिलों की सूची भी तैयार की है। इन जिलों में विशेष निगरानी रखने की जरूरत बताई गई है।
यह लिस्ट किसी अंदाजे पर नहीं बनाई गई है। मंत्रालय ने पिछले तीन साल के आंकड़ों की गहराई से समीक्षा की है। जिन जिलों में डेंगू और मलेरिया के 500 या उससे ज्यादा मामले मिले हैं, उन्हें हाई रिस्क एरिया में रखा गया है। इसी आधार पर पूरे देश के जिलों की अलग-अलग सूची तैयार हुई है।
राजस्थान के 8 जिले हाई रिस्क में शामिल
आंकड़े भी इस बात की पुष्टि करते हैं। जनवरी 2023 से दिसंबर 2025 के बीच अकेले जयपुर में डेंगू के 4696 मामले सामने आए। यह आंकड़ा बताता है कि शहर में मच्छर जनित बीमारियों का खतरा लगातार बना हुआ है। यही वजह है कि जयपुर को हाई रिस्क जिलों की सूची में रखा गया है।
मच्छरों को पनपने से रोकने के लिए सख्त निर्देश
इसके साथ ही आमजन को जागरूक करने पर भी जोर दिया गया है। जिन इलाकों में मच्छरों के पनपने की सबसे ज्यादा आशंका रहती है, वहां एंटीलार्वा एक्टिविटी चलाई जाएगी। इसका मकसद बीमारी फैलने से पहले ही उसे रोकना है।
यूपी में सबसे ज्यादा हाई रिस्क जिले
बिहार और पंजाब में 9-9 जिले हाई रिस्क में रखे गए हैं। हरियाणा के 8 और दिल्ली के 7 जिले इस सूची में हैं। मध्य प्रदेश, गुजरात और उत्तराखंड के 4-4 जिले भी हाई रिस्क एरिया में शामिल किए गए हैं। छत्तीसगढ़ से सिर्फ 1 जिला इस सूची में है।
इन आंकड़ों से साफ है कि यह समस्या किसी एक राज्य तक सीमित नहीं है। देशभर के अलग-अलग हिस्सों में मौसमी बीमारियों का खतरा बना हुआ है। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्य भी इस सूची से अछूते नहीं हैं।
रैपिड रिस्पॉन्स टीम बनाने के निर्देश
इसके अलावा राज्यों से कहा गया है कि वे पर्याप्त मात्रा में ब्लड और ब्लड कॉम्पोनेंट का स्टॉक रखें। जरूरी दवाइयों की उपलब्धता भी सुनिश्चित करने को कहा गया है। मकसद यह है कि अगर मामले बढ़ें, तो अस्पतालों में इलाज में देरी न हो।
कमजोर मानसून और बीमारियों का सीधा कनेक्शन
पानी का रुक-रुक कर जमा होना मच्छरों के लार्वा पनपने की सबसे बड़ी वजह बनता है। यही वजह है कि मंत्रालय ने कमजोर मानसून के बावजूद अलर्ट जारी किया है। विभाग का मानना है कि सतर्कता अभी से जरूरी है।
लोगों के लिए क्या जरूरी है
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