30 साल पुराना समलेटी बम कांड, मुख्य आरोपी की मौत की सजा रद्द, दोबारा होगी ट्रायल

Mukesh Sharma | Jul 21, 2026, 14:42 IST
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1996 के समलेटी बम कांड में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, मुख्य आरोपी की मौत की सजा रद्द
1996 के समलेटी बम कांड में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, मुख्य आरोपी की मौत की सजा रद्द

सुप्रीम कोर्ट ने 1996 के समलेटी बस बम ब्लास्ट मामले में मुख्य आरोपी डॉ. अब्दुल हमीद की मौत की सजा रद्द कर दी है। उचित कानूनी मदद नहीं मिलने के कारण कोर्ट ने विशेष फास्ट ट्रैक अदालत में एक साल के भीतर नए सिरे से सुनवाई का आदेश दिया है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • राजस्थान में 1996 का समलेटी बम कांड पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला।
  • सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य आरोपी डॉ. अब्दुल हमीद की मौत की सजा रद्द की।
  • कोर्ट ने माना कि ट्रायल में आरोपी को सही कानूनी प्रतिनिधित्व नहीं मिला।
  • हाई कोर्ट ट्रायल के लिए बनाएगा स्पेशल कोर्ट, 1 वर्ष में करें सुनवाई पूरी।
  • पप्पू उर्फ सलीम को बरी किया, अन्य बरी आरोपियों के खिलाफ अपील खारिज।
सुप्रीम कोर्ट ने 1996 के समलेटी बस बम धमाके के मामले में आरोपी डॉ. अब्दुल हमीद की मौत की सजा और दोषसिद्धि को रद्द कर दिया है।

कोर्ट ने माना कि मूल मुकदमे के दौरान आरोपी को प्रभावी कानूनी प्रतिनिधित्व नहीं मिला था। इससे न्याय प्रक्रिया प्रभावित हुई।

जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संजय करोल और जस्टिस संदीप मेहता की बैंच ने राजस्थान हाई कोर्ट के 2019 के हमीद की मौत की सजा को बरकरार रखने वाले फैसले को रद्ध कर दिया है।

स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट में हो सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने डॉ. अब्दुल हमीद के मामले में निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए नए सिरे से मुकदमा चलाने का निर्देश दिया है।

घटना को करीब तीन दशक बीत जाने के कारण सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट से इस मामले के लिए एक विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने को कहा है।

बैंच ने कहा है कि ट्रायल कोर्ट के न्यायिक अधिकारी को सत्र मामलों का कम से कम 7 साल का अनुभव होना चाहिए। सुनवाई एक साल के भीतर पूरी करने का प्रयास किया जाना चाहिए।

सह-आरोपी भी बरी

सुप्रीम कोर्ट ने सह-आरोपी पप्पू उर्फ सलीम को बरी कर दिया है। उसकी स्थायी पैरोल के खिलाफ राज्य सरकार की याचिका खारिज कर दी।

कोर्ट ने जावेद खान और अब्दुल गोनी की बरी करने को चुनौती देने वाली राज्य सरकार की अपीलों को भी खारिज कर दिया।

स्पेशल कोर्ट करे विवेक से फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि डॉ. अब्दुल हमीद के संबंध में इस फैसले में की गई सभी टिप्पणियां केवल सुनवाई की निष्पक्षता व उनकी दोषसिद्धि तक पहुंची कार्यवाही की वैधता तक ही सीमित हैं।

स्पेशल कोर्ट अपने समक्ष पेश किए जाने वाले साक्ष्यों का स्वतंत्र रूप से मूल्यांकन करेगी। इस फैसले की किसी भी टिप्पणी से प्रभावित हुए बिना पूरी तरह से गुण-दोष के आधार पर मामले का फैसला करेगी।

1996 समलेटी बम कांड की टाइम लाइन

22 मई, 1996: राजस्थान में दौसा जिले के महवा थाना के समलेटी गांव में शाम 4 बजे राजस्थान रोडवेज की बस में बम ब्लास्ट हुआ।

इस घटना में कुल 14 लोग मारे गए और 37 घायल हुए। यह घटना दिल्ली के लाजपत नगर में हुए ब्लास्ट के एक दिन बाद हुई। बस आगरा से बीकानेर जा रही थी।

22 मई, 1996: बस के कंडक्टर के बयान के आधार पर महवा पुलिस स्टेशन में मामले में FIR दर्ज की गई। कंडक्टर खुद भी घायल हुआ।

जुलाई 1996 से जनवरी 1997 तक: सभी आरोपियों को लोकल पुलिस और केस की जांच कर रही CB-CID ने उत्तर प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर से गिरफ्तार किया।

12 सितंबर, 1996: मामले में पहली चार्जशीट फाइल की गई।

16 अक्टूबर 1996: दूसरी चार्जशीट फाइल की गई।

18 जून 1997: तीसरी चार्जशीट फाइल की गई।

23 सितंबर, 1997: चौथी और आखिरी चार्जशीट फाइल की गई। चार्जशीट में आरोप लगाया गया कि आरोपी जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) से जुड़े थे। यह भी दावा किया गया कि उनमें से कुछ 1996 के सवाई मान सिंह स्टेडियम ब्लास्ट केस में शामिल थे। ट्रायल 2011 में शुरू हुआ।

29 सितंबर, 2014: बांदीकुई के एडीजे यूपी के फिरोजाबाद के रहने वाले पेशे से मेडिकल डॉक्टर अब्दुल हमीद को मौत की सज़ा और जम्मू-कश्मीर के पांच लोगों समेत सात को उम्रकैद की सज़ा दी थी।

इन्हें हत्या, हत्या की कोशिश,आपराधिक साजिश रचने, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने तथा एक्सप्लोसिव्स एक्ट के तहत दोषी ठहराया गया था।

बांदीकुई के चंद्र प्रकाश अग्रवाल, पंजाब के कुलजिंदर सिंह और श्रीनगर के फारूख अहमद को बरी कर दिया था। एक आरोपी रईस अहमद की ट्रायल के दौरान मौत हो गई। राज्य सरकार ने फारूख को बरी किए जाने को चुनौती दी थी। लेकिन हाई कोर्ट ने अपील खारिज कर दी।

जांच एजेंसियों ने मामले के सभी आरोपियों को साल 1996 और जनवरी 1997 में गिरफ्तार किया था। डॉ. हमीद जनवरी 1996 में जयपुर के SMS स्टेडियम में बम रखने से जुड़े एक और मामले में भी मुख्य आरोपी है।

1996 के समलेटी बम कांड में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, मुख्य आरोपी की मौत की सजा रद्द
1996 के समलेटी बम कांड में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, मुख्य आरोपी की मौत की सजा रद्द


हाई कोर्ट ने 6 आरोपियों को किया था बरी

राजस्थान हाई कोर्ट ने 2019 में छह आरोपियों को बरी कर दिया था। लेकिन डॉ.अब्दुल हमीद की मौत और पप्पू सलीम की आजीवन कारवास की सजा बरकरार रखी। साथ ही छह आरोपियों को बरी कर दिया था। कोर्ट ने माना था कि डॉ. हमीद 22 मई, 1996 को आगरा से बीकानेर जा रही बस में बम रखने के पीछे मुख्य व्यक्ति था।

ट्रायल कोर्ट ने बरी होने वाले छह आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया था। यह लोग 23 साल से लगातार जेल में बंद थे। इस दौरान इन्हें एक बार भी पैरोल या जमानत पर रिहा नहीं किया था।

हाई कोर्ट से बरी होने वालों में जम्मू-कश्मीर के पांच मूल निवासी अब्दुल गनी (57), मिर्जा निसार हुसैन (39), मोहम्मद अली भट्ट (48), लतीफ अहमद बाजा (42) और जावेद खान और उत्तर प्रदेश के आगरा से एक रईस बेग (56) शामिल हैं।

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