सांप्रदायिक दंगे से जुडे दोहरे हत्याकांड में 14 आरोपी हुए बरी, 25 साल बाद आया फैसला

Mukesh Sharma | Feb 27, 2026, 20:39 IST
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25 year
Photograph: (the sootr)

राजस्थान में सांप्रदायिक दंगे मामलों की विशेष कोर्ट ने मालपुरा में 25 साल पुराने सांप्रदायिक दंगों से जुड़े दोहरे हत्याकांड में 14 आरोपियों को बरी कर दिया है। इस मामले के 5 आरोपी पहले ही बरी हो चुके हैं।

News In Short

  • टोंक के मालपुरा में सांप्रदायिक दंगों से जुड़े दोहरे हत्याकांड का मामला।
  • वर्ष 2000 में बकरी चराने गए दो बच्चों को मार गिराया था।
  • इस मामले में 22 आरोपियों के खिलाफ हुआ था चालान।
  • 5 आरोपी पहले ही हाई कोर्ट से हो चुके हैं बरी।
  • मालपुरा में बरसों से सांप्रदायिक दंगों का रहा है इतिहास।

News In Detail

राजस्थान में जयपुर की सांप्रदायिक दंगों की विशेष कोर्ट ने टोंक जिले के मालपुरा में 25 साल पहले सांप्रदायिक दंगों से जुड़े दोहरे हत्याकांड के 14 आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है। जज श्वेता गुप्ता ने अभियोजन की ओर से पेश किए गए सबूतों को अधूरा,संदेहास्पद,अविश्सनीय और तथ्यों से परे मानते हुए यह आदेश दिए।

यह हुए बरी

बरी होने वालों में मालपुरा के रहने वाले राम प्रसाद, तनलाल, रामस्वरूप, देवकरण, श्योजीराम, राम किशोर, सुखलाल, छोटू, बच्छराज, किस्तुर, हीरालाल, सत्यनारायण, किशनलाल एवं एक अन्य किशनलाल शामिल हैं।

यह है मामला

टोंक जिले के मालपुरा में 10 जुलाई, 2000 को बकरी चराने गए 10 वर्षीय जुम्मा और 14 वर्षीय बंटी उर्फ ईशाक की हत्या हो गई थी। इस संबंध में पुलिस ने कुल 22 आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया था। इनमें से 05 आरोपियों को हाई कोर्ट ने 2016 में ही डिस्चार्ज कर दिया था। एक आरोपी को नाबालिग माना गया था, जबकि एक आरोपी की मौत हो चुकी थी।

फेल रहा अभियोजन

कोर्ट ने कहा है कि अभियोजन पक्ष अपराध साबित करने में असफल रहा है। बचाव पक्ष की दलील थी कि पुलिस की जांच में आरोपियों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रुप से अपराध से जोड़ने वाला एक भी तथ्य नहीं आया है। एफआईआर दर्ज कराने वाले ने भी किसी अन्य की सूचना पर रिपोर्ट दर्ज कराई थी। कथित घटना के समय मौके पर धारा-144 लगी हुई थी।

ऐसे में कथित चश्मदीद गवाहों की मौके पर उपस्थिति ही संदेहजनक साबित है। घटना में प्रयुक्त कोई हथियार भी बरामद नहीं हुए हैं। किसी भी आरोपी की शिनाख्तगी परेड भी नहीं हुई। घटना के समय आरोपियों के चेहरे ढंके हुए होना बताया है। सबूतों से घटनास्थल भी साबित नहीं हुआ है।

अनुसंधान में पता चला है कि गांव में एक ही नाम के अनेक व्यक्ति है। गवाहों के कथन गंभीर विरोधाभासी है। 14 आरोपियों की मौके पर मौजूदगी भी साबित नहीं है। कोर्ट ने बचाव पक्ष की दलीलों से सहमति जताते हुए सभी 14 आरोपियों को बरी कर दिया है।

मालपुरा में रहा सांप्रदायिक तनाव का इतिहास

राजस्थान के टोंक जिले के मालपुरा कस्बे में बरसों से सांप्रदायिक तनाव का इतिहास रहा है। 10 जुलाई, 2000 से शुरू हुए सांप्रदायिक हिंसा में कुल 12 लोगों की मौत हो गई थी। इन सांप्रदायिक दंगे में मारे गए अधिकांश लोग संयोगवश घटनास्थल पर मौजूद थे। उनका दंगों से कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध नहीं था। इन दंगों से जुड़े 6 लोगों की मौत के मामले में पिछले साल कोर्ट 13 आरोपियों को बरी कर चुकी है।

10 जुलाई, 2000 को मालपुरा में भाजपा नेता कैलाश माली की चाकूओं से गोदकर हत्या कर दी थी। पुलिस के अनुसार कैलाश माली 1992 दंगों का मास्टर माईंड था। कैलाश माली की मौत के बाद मालपुरा में दंगे भड़क उठे थे। इन दंगों में मारे गए हरिराम की हत्या के मामले में कोर्ट छह लोगों को आजीवन कारावास की सजा से दंडित कर चुकी है।

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