छत्तीसगढ़ी भाषा को मिलेगी नई पहचान; हेमचंद यादव यूनिवर्सिटी में शुरू होगी एमए की पढ़ाई, जानें कैसा होगा सिलेबस
NEWS IN SHORT
- छत्तीसगढ़ी भाषा को मिलेगा नई पहचान, एमए कोर्स की होगी शुरुआत
- एमए छत्तीसगढ़ी पाठ्यक्रम: संरचना और अध्ययन की रूपरेखा
- छत्तीसगढ़ी भाषा, संस्कृति और इतिहास का समावेश
- लोकसंस्कृति से जुड़ाव: तीज-त्योहार और परंपराओं की मिलेगी जानकारी
- उच्च शिक्षा और व्यावसायिक अवसरों के नए रास्ते खोलेंगे एमए छत्तीसगढ़ी
NEWS IN DETAIL
DURG। University Admissions:अब छत्तीसगढ़ी भाषा और संस्कृति को शैक्षणिक स्तर पर नई पहचान मिलने जा रही है। Hemchand Yadav University में इस शैक्षणिक सत्र से एमए छत्तीसगढ़ी पाठ्यक्रम की शुरुआत होने जा रही है।
पहले यह कोर्स (छत्तीसगढ़ यूनिवर्सिटीज)Pandit Ravishankar Shukla University के यूटीडी में संचालित होता था, लेकिन अब दुर्ग विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों में भी इसे पढ़ाया जाएगा। इससे क्षेत्रीय भाषा को सीखने और समझने में आसानी होगी।
MA छत्तीसगढ़ी कोर्स की विशेषताएं
यह दो वर्षीय एमए छत्तीसगढ़ी पाठ्यक्रम चार सेमेस्टर में विभाजित किया गया है। कुल 1600 अंकों के लिए 80 क्रेडिट निर्धारित किए गए हैं।
प्रत्येक सेमेस्टर में चार प्रश्नपत्र होंगे, जिनमें 20 अंक आंतरिक मूल्यांकन और 80 अंक थ्योरी के लिए तय किए गए हैं। खास बात यह है कि पूरा सिलेबस छत्तीसगढ़ी भाषा में तैयार किया गया है, जिससे विद्यार्थियों को भाषा के मूल स्वरूप में पढ़ने का मौका मिलेगा।
सेमेस्टरवार पढ़ाई
पहला सेमेस्टर : इस सेमेस्टर में भाषा की पृष्ठभूमि, लोकजीवन, भाषा संरचना और लोक साहित्य पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
दूसरा सेमेस्टर : इसमें साहित्य का इतिहास, लोकनाट्य, लोककथा-गाथा और लोककाव्य पर अध्ययन किया जाएगा।
तीसरा सेमेस्टर : इस सेमेस्टर में भाषा के वैज्ञानिक पक्ष, प्रयोजनमूलक उपयोग, आईटी और अनुवाद जैसे आधुनिक विषय जोड़े गए हैं।
चौथा सेमेस्टर : इस सेमेस्टर में आधुनिक काव्य, कथा साहित्य, निबंध-एकांकी और लघु शोध प्रबंध पर ध्यान दिया जाएगा।
छत्तीसगढ़ी के इतिहास, संस्कृति और लोकजीवन का समावेश
इस पाठ्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें केवल भाषा नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के इतिहास और सांस्कृतिक धरोहर को भी समान महत्व दिया गया है।
विद्यार्थियों को राज्य की भौगोलिक स्थिति, प्राचीन इतिहास, अंग्रेजी शासन काल और 1857 के विद्रोह में क्षेत्र की भूमिका के बारे में जानकारी दी जाएगी।
इसके अलावा, राज्य गठन की प्रक्रिया, प्रमुख नेताओं का योगदान, सामाजिक-आर्थिक परिवेश और सांस्कृतिक धरोहर को भी विस्तार से पढ़ाया जाएगा।
लोकसंस्कृति से जुड़ने का मौका
इस कोर्स के माध्यम से छात्रों को छत्तीसगढ़ के तीज-त्योहार, परंपराएं, पहनावा, लोकाचार और लोकशिल्प की जानकारी दी जाएगी। इससे न केवल उनकी अकादमिक समझ बढ़ेगी, बल्कि वे अपनी जड़ों और परंपराओं से भी जुड़ पाएंगे।
एमए छत्तीसगढ़ी कोर्स से भाषा कौशल को मिलेगा नया आयाम
यह पाठ्यक्रम विद्यार्थियों की भाषाई दक्षता को मजबूत करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें स्वर-व्यंजन, व्याकरण, शब्दभेद और प्रयोग पर विशेष ध्यान दिया गया है।
इससे छात्र न केवल शुद्ध भाषा सीख सकेंगे, बल्कि ग्रामीण अंचलों में बोली जाने वाली ठेठ छत्तीसगढ़ी को समझने और संवाद में उपयोग करने में भी सक्षम होंगे।
उच्च शिक्षा में नए अवसर
इस कोर्स के शुरू होने से छात्रों के लिए उच्च शिक्षा, शोध, अनुवाद, पत्रकारिता और शिक्षण जैसे क्षेत्रों में नए अवसर खुलेंगे। यह पहल छत्तीसगढ़ी भाषा को अकादमिक और व्यावसायिक इससे भाषा को बेहतर बनाने में बहुत मदद मिलेगी।
निष्कर्ष
एमए छत्तीसगढ़ी पाठ्यक्रम छत्तीसगढ़ी भाषा और संस्कृति के संरक्षण और विकास में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को भाषा के माध्यम से क्षेत्रीय पहचान और सांस्कृतिक धरोहर से जुड़ने का मौका देगा।
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