मां बम्लेश्वरी धाम में बैगा पूजा पर विवाद, आदिवासी समाज में भारी नाराजगी

Aishwarya Dwivedi | May 24, 2026, 18:30 IST
maa-bamleshwari-dham-baiga-puja-controversy-dongargarh
डोंगरगढ़ के मां बम्लेश्वरी धाम में कथित बलि और बैगा पूजा को लेकर मंदिर ट्रस्ट और आदिवासी गोंड समाज के बीच बरसों पुराना विवाद फिर भड़क गया है। राज बैगा किशोर नेताम की गिरफ्तारी के बाद आदिवासी समाज में भारी आक्रोश है।

NEWS IN SHORT

  • डोंगरगढ़ में बैगा पद्धति से पूजा पर भारी बवाल।
  • मुर्गे की बलि के बाद एफआईआर दर्ज हुई।
  • राज बैगा किशोर नेताम को पुलिस ने गिरफ्तार किया।
  • आदिवासी समाज ने परंपराओं को दबाने का आरोप लगाया।
  • ट्रस्ट और गोंड समाज में वर्षों से विवाद जारी।

NEWS IN DETAIL

छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध तीर्थ स्थल मां बम्लेश्वरी धाम में सदियों पुरानी परंपरा और व्यवस्था का टकराव एक बार फिर खुलकर सामने आ गया है। ऊपरी मंदिर परिसर में कथित रूप से मुर्गे की बलि देने और बैगा पद्धति से पूजा-अर्चना करने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस घटना के बाद राज बैगा किशोर नेताम की गिरफ्तारी से डोंगरगढ़ का माहौल बेहद गर्मा गया है। वर्षों से मंदिर ट्रस्ट और आदिवासी गोंड समाज के बीच सुलग रहा विवाद अब एक बड़े आंदोलन का रूप लेता दिखाई दे रहा है।



क्या है पूरा मामला?

मिली जानकारी के मुताबिक, यह पूरा घटनाक्रम 19 मई का है। मां बम्लेश्वरी के ऊपरी मंदिर में पुराने रोपवे के पास स्थित एक चट्टान को 'गढ़ माता' मानकर आदिवासी परंपरा के अनुसार बैगा पद्धति से विशेष पूजा-अर्चना की गई थी। आरोप है कि इसी दौरान वहां रूप से मुर्गे की बलि भी दी गई।



इस घटना की जानकारी मिलते ही बम्लेश्वरी मंदिर ट्रस्ट समिति के अध्यक्ष मनोज अग्रवाल ने डोंगरगढ़ थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। ट्रस्ट का कहना है कि इस कृत्य से मंदिर की सदियों पुरानी पवित्रता और धार्मिक मर्यादा भंग हुई है, जिससे देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हुई हैं। ट्रस्ट ने दो टूक शब्दों में कहा है कि मंदिर परिसर में केवल सनातन वैदिक परंपरा से ही पूजा-अर्चना की अनुमति है और किसी भी तरह की बलि प्रथा को स्वीकार नहीं किया जा सकता।



किशोर नेताम की गिरफ्तारी के बाद फूटा गुस्सा

ट्रस्ट की शिकायत पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए राज बैगा किशोर नेताम को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। डोंगरगढ़ एसडीओपी केसरी नंदन नायक ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि ट्रस्ट की रिपोर्ट पर एफआईआर दर्ज कर आरोपी को जेल भेजा गया है और मामले की विस्तृत जांच जारी है।



इस गिरफ्तारी के बाद आदिवासी और गोंड समाज में भारी आक्रोश है। समाज के प्रतिनिधियों का साफ कहना है कि मां बम्लेश्वरी पहाड़ी और शक्तिपीठों से उनकी आस्था और पारंपरिक बैगा पूजा का संबंध सदियों पुराना है। उनका दावा है कि इस पहाड़ी पर लोक परंपरा के अनुसार हमेशा से पूजा होती आई है, लेकिन अब उनकी मूल संस्कृति और परंपरा को अपराध बताकर दमनात्मक कार्रवाई की जा रही है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।



वर्षों पुरानी है ट्रस्ट और आदिवासी समाज की खींचतान

डोंगरगढ़ में मंदिर ट्रस्ट और आदिवासी समाज के बीच यह टकराव नया नहीं है। पिछले कई सालों से मंदिर ट्रस्ट में प्रतिनिधित्व, पूजा के अधिकार और पारंपरिक व्यवस्थाओं को लेकर दोनों पक्षों में लगातार खींचतान चल रही है। आदिवासी समाज लंबे समय से मांग कर रहा है कि मंदिर ट्रस्ट की समिति में गोंड समाज को उचित और सम्मानजनक प्रतिनिधित्व दिया जाए। सदियों से चली आ रही बैगा लोक परंपराओं को अक्षुण्ण रखा जाए। इससे पहले भी नवरात्रि के दौरान गर्भगृह प्रवेश और पंचमी भेंट को लेकर दोनों पक्षों में भारी विवाद हो चुका है। उस दौरान भी तीखी बयानबाजी और बंद की चेतावनी के साथ बड़े आंदोलन हुए थे।



मूल लोक परंपरा बनाम वैदिक व्यवस्था की बहस

आदिवासी संगठनों का सीधा आरोप है कि मंदिर की मूल लोक संस्कृति और ऐतिहासिक भूमिका को धीरे-धीरे खत्म करने की कोशिश की जा रही है। इस पूरे विवाद में समय-समय पर खैरागढ़ राजपरिवार का नाम भी जुड़ता रहा है। स्थानीय स्तर पर यह बहस अब बेहद संवेदनशील हो चुकी है कि मां बम्लेश्वरी धाम की मूल ऐतिहासिक परंपरा क्या रही है और इसके संरक्षण में किस समुदाय की क्या भूमिका है। फिलहाल, राज बैगा की गिरफ्तारी के बाद क्षेत्र में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और आदिवासी समाज आगे की रणनीति तैयार कर रहा है।



निष्कर्ष

मां बम्लेश्वरी धाम का यह विवाद केवल एक घटना नहीं, बल्कि वैदिक व्यवस्था और ऐतिहासिक लोक परंपराओं के बीच का पुराना टकराव है। इस संवेदनशील मामले का शांतिपूर्ण समाधान तभी संभव है, जब मंदिर ट्रस्ट और आदिवासी समाज संवाद के जरिए एक-दूसरे की धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक अधिकारों का सम्मान करें।



यह खबरें भी पढ़ें...

डोंगरगढ़ मां बम्लेश्वरी मंदिर में नवरात्र के दौरान कर्मचारी की संदिग्ध मौत,गोंड समाज में आक्रोश



तीन महीने से वेतन बंद… मां बम्लेश्वरी मंदिर के कर्मचारी ने आत्महत्या से पहले लिखे दर्दभरे शब्द



डोंगरगढ़ के मां बम्लेश्वरी मंदिर में बड़ा हादसा, भीड़ में महिला की मौत... मची भगदड़



एक दिया जलाने से मनोकामना पूरी होती है मां बम्लेश्वरी मंदिर में... जानिए हजारों साल पुराना इतिहास



Tags:
  • छत्तीसगढ़
  • विवाद
  • बम्लेश्वरी मंदिर
  • गर्भगृह
  • मंदिर ट्रस्ट