फ्री कुकर की चाहत और 1 करोड़ का डाका! महासमुंद में 138 महिलाओं के साथ हुआ खेल

Harrison Masih | Jul 02, 2026, 15:58 IST
महासमुंद फर्जी लोन घोटाला 2026
सरकारी स्कीम, मुफ्त कुकर और फिंगरप्रिंट... यही लालच 138 ग्रामीण महिलाओं के लिए करोड़ों की मुसीबत बन गया। महासमुंद में ठगों ने सरकारी योजना का झांसा देकर महिलाओं से फिंगरप्रिंट लिए, और उनके नाम पर 1.38 करोड़ रूपए का फर्जी बैंक लोन निकाल लिया।

समझें क्या है पूरा मामला...

छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में एक अंतरराज्यीय ठग सिंडिकेट ने ग्रामीण महिलाओं को मुफ्त कुकर और सरकारी योजना का झांसा देकर उनके फिंगरप्रिंट लिए। इन फिंगरप्रिंट्स से 138 महिलाओं के नाम 1 करोड़ 31 लाख 31 हजार 630 रुपए का फर्जी लोन निकाल लिया। बसना पुलिस ने दोनों मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। दोनों बैंक बिजनेस करिस्पोंडेंस यानी BCC के रूप में काम करते थे। पूछताछ में इन्होंने जुर्म कबूल कर लिया है।



कैसे दिया ठगी को अंजाम

आरोपी ग्राम पिरदा की 138 गरीब महिलाओं के पास पहुंचते थे। वे सरकारी योजना और मुफ्त कुकर देने का वादा करते थे।



इस लालच में महिलाएं उनके साथ जाती थीं। आरोपी बायोमेट्रिक मशीन में सिस्टम एरर यानी तकनीकी खराबी का बहाना बनाकर एक-एक महिला से तीन से चार बार फिंगरप्रिंट ले लेते थे।



असल में वे हर बार अलग-अलग लोन का आवेदन भर रहे थे। महिलाओं को पता ही नहीं चला कि उनके नाम पर लोन निकाला जा रहा है।



किस्त मांगने आया तो खुला राज

यह पूरा मामला तब सामने आया जब भारत फाइनेंस का एक कर्मचारी ग्राम पिरदा पहुंचा। वह महिलाओं से लोन की मासिक किस्त मांगने आया था।



यह सुनकर महिलाएं हैरान रह गईं। उन्होंने कभी किसी लोन के लिए आवेदन ही नहीं किया था।



पीड़ित महिला रजनी देवांगन ने हिम्मत जुटाई और थाना बसना में सुदर्शन साहू के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने जब बैंक दस्तावेजों और ट्रांजेक्शन हिस्ट्री खंगाली तो पूरी कहानी सामने आई।



कौन हैं दोनों आरोपी

पुलिस ने इस मामले में दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है।



पहला लक्ष्मीचंद देवांगन है जो 40 साल का है और पिरदा थाना बसना का रहने वाला है। यह इस ठग सिंडिकेट का मास्टरमाइंड एजेंट और बैंक BCC यानी बिजनेस करिस्पोंडेंस (BCC - Business Correspondent) था।



दूसरा मनोहर जटवार है जो 33 साल का है और तरेकेला थाना बसना का रहने वाला है। यह भी बैंक BCC के रूप में काम करता था और मुख्य साजिशकर्ता था।



1 जुलाई को पकड़े गए दोनों

महासमुंद पुलिस की टीम काफी समय से इन दोनों फरार मुख्य आरोपियों की तलाश कर रही थी।



आखिरकार 1 जुलाई 2026 को घेराबंदी कर दोनों को हिरासत में लिया गया। पूछताछ में दोनों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया।



पुलिस ने इनके पास से ठगी में उपयोग की गई बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट मशीन और मोबाइल फोन जब्त कर लिए।



सूक्ष्म जांच जारी, बड़े खुलासे संभव

एसपी प्रतिभा पांडेय ने बताया कि यह ग्रामीण महिलाओं की मासूमियत का फायदा उठाकर किया गया एक गंभीर आर्थिक अपराध है।



पुलिस ने बीएनएस (BNS - Bharatiya Nyaya Sanhita) की विभिन्न धाराओं के तहत यह कार्रवाई की है।



अब पुलिस इस सिंडिकेट में बैंक के अन्य बड़े अधिकारियों या कर्मचारियों की संलिप्तता की भी सूक्ष्म जांच कर रही है।



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