महतारी गौरव वर्ष मना रही साय सरकार, छत्तीसगढ़ में हर योजना के केंद्र में महिलाएं

छत्तीसगढ़ सरकार ने 2026 को महतारी गौरव वर्ष के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। इस वर्ष का उद्देश्य महिलाओं के सशक्तिकरण, सुरक्षा, और आर्थिक स्वावलंबन को बढ़ावा देना है।

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The Sootr
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Raipur. छत्तीसगढ़ सरकार ने वर्ष 2026 को महतारी गौरव वर्ष के रूप में मनाने का फैसला लिया है। यह पूरा साल राज्य की माताओं और बहनों को समर्पित रहेगा। इस पहल के तहत वर्ष 2026 में चलने वाली प्रमुख सरकारी योजनाओं में महिलाओं को केंद्र में रखा जाएगा। महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन को प्राथमिकता दी जाएगी। सरकार इसे विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में बड़ा कदम मान रही है।

पिछले दिनों मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जो सरकारी कैलेंडर जारी किया था, उसकी थीम भी महतारी गौरव वर्ष ही रखी गई है। इस कैलेंडर के जरिए सरकार ने महिला सशक्तिकरण और सामाजिक योजनाओं को एक साथ जोड़कर दिखाने की कोशिश की है।

कैलेंडर के फ्रंट पेज पर छत्तीसगढ़ के पांच प्रमुख शक्तिपीठों को जगह दी गई है। इसमें मां बमलेश्वरी डोंगरगढ़, मां महामाया रतनपुर, मां दंतेश्वरी दंतेवाड़ा, मां चंद्रहासिनी चंद्रपुर और मां कुदरगढ़ी सूरजपुर शामिल हैं। सरकार का मानना है कि यह प्रतीक राज्य की आस्था और मातृशक्ति दोनों को दर्शाते हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि मातृशक्ति का सम्मान और सशक्तिकरण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि महतारी गौरव वर्ष महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और आर्थिक स्वावलंबन को समर्पित है। सरकार ने इसी सोच के साथ यह कैलेंडर तैयार किया है जिसमें राज्य की योजनाएं, प्राथमिकताएं और उपलब्धियां दिखाई गई हैं।

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कैंलेडर की ऐसी है थीम 

कैलेंडर के हर महीने में अलग-अलग योजनाओं और अभियानों को शामिल किया गया है। जनवरी में प्रमुख शक्तिपीठों को दिखाया गया है। फरवरी में राष्ट्रीय सघन पल्स पोलियो अभियान को जगह दी गई है। मार्च माह महतारी वंदन योजना को समर्पित किया गया है।

अप्रैल में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना को दिखाया गया है। मई में तेंदूपत्ता संग्रहण और चरण पादुका योजना को शामिल किया गया है। जून महीने में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान को प्रमुखता दी गई है। जुलाई में महिला मुखिया के नाम पर पीडीएस राशन कार्ड व्यवस्था को दर्शाया गया है।

अगस्त में रक्षाबंधन उत्सव को जगह दी गई है। सितंबर में दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना को दिखाया गया है। अक्टूबर में शौर्य का सम्मान विषय रखा गया है। नवंबर महीने को सेवा ही संकल्प की भावना के साथ प्रस्तुत किया गया है। दिसंबर महीने को महिला सशक्तिकरण के प्रतीक रूप में दिखाया गया है।

14 हजार करोड़ खातों में दिए 

पिछले दो वर्षों में राज्य सरकार ने महिला सशक्तिकरण को लेकर कई काम किए हैं। महतारी वंदन योजना महिलाओं की आर्थिक मजबूती का बड़ा आधार बनी है। इस योजना को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 मार्च 2024 को वर्चुअली लॉन्च किया था। इसके तहत राज्य की लगभग 70 लाख विवाहित महिलाओं को हर महीने 1000 रुपए की सीधी आर्थिक मदद दी जा रही है।

अब तक 14,306 करोड़ 33 लाख की राशि 22 किश्तों में महिलाओं के बैंक खातों में भेजी जा चुकी है। महिलाओं के स्वास्थ्य, पोषण और आर्थिक मजबूती के लिए 5,500 करोड़ रुपये का प्रावधान भी किया गया है।

संपत्ति कर में महिलाओं को छूट 

महिलाओं को संपत्ति में अधिकार देने के लिए रजिस्ट्री शुल्क में 1 प्रतिशत की छूट दी गई है। इससे महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक दोनों स्तर पर मजबूती मिली है। सरकार ने 368 महतारी सदनों के निर्माण को मंजूरी दी है। इन केंद्रों पर महिलाओं को प्रशिक्षण, सलाह, कौशल विकास और अन्य सुविधाएं एक ही जगह मिलेंगी।

मितानिन और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय और प्रोत्साहन राशि का ऑनलाइन भुगतान शुरू किया गया है। इससे पारदर्शिता और व्यवस्था मजबूत हुई है। वहीं, ग्रामीण और गरीब वर्ग की महिलाओं तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए स्व-सहायता समूहों को नए अवसर दिए गए हैं। बस्तर, दंतेवाड़ा, बलौदाबाजार, कोरबा, रायगढ़ और सूरजपुर जिलों में रेडी टू ईट का काम महिला समूहों को दिया गया है।

स्व सहायता समूहों को दिया लोन 

राज्य के 42 हजार 878 महिला समूहों को 12,946.65 लाख रुपए का रियायती ऋण दिया गया है। इससे महिलाओं को छोटे व्यवसाय शुरू करने में मदद मिली है। निर्माण श्रमिक परिवारों की महिलाओं और बेटियों के लिए मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण योजना, सिलाई मशीन सहायता और दीदी ई-रिक्शा योजना जैसी योजनाएं चलाई जा रही हैं।

कन्या विवाह योजना को भी मजबूत किया गया है। इस योजना में 50 हजार रुपए की सहायता में से 35 हजार रुपए सीधे कन्या के खाते में भेजे जा रहे हैं। महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए एनआरएलएम के तहत लखपति दीदी और ड्रोन दीदी जैसी योजनाओं पर 800 करोड़ रुपए तय किए गए हैं। सरकार का मानना है कि इससे महिलाओं के लिए नए रोजगार और व्यवसाय के रास्ते खुलेंगे।

महिला सुरक्षा पर दिया ध्यान 

महिला सुरक्षा के क्षेत्र में भी कई कदम उठाए गए हैं। नवाबिहान योजना घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं को कानूनी, चिकित्सा और मानसिक सहायता दे रही है। छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बना जिसने सखी वन स्टॉप सेंटर का डिजिटल वर्जन तैयार किया और इसके लिए मानक प्रक्रिया लागू की।

181 महिला हेल्पलाइन और डायल 112 के एकीकृत संचालन से संकट की स्थिति में तुरंत मदद मिल रही है। सुखद सहारा योजना के तहत 2 लाख 18 हजार से ज्यादा विधवा और परित्यक्ता महिलाओं को हर महीने 500 रुपये की सहायता दी जा रही है।

किशोरियों के स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए शुचिता योजना चलाई जा रही है। इसके तहत 2000 स्कूलों में नैपकिन वेंडिंग मशीन लगाई गई हैं। 3 लाख से ज्यादा किशोरियों को स्वच्छता सामग्री दी गई है। हाई स्कूल की छात्राओं को साइकिल देने के लिए 50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

यूनिटी मॉल से मिलेगा बाजार 

नवा रायपुर में 200 करोड़ रुपए से यूनिटी मॉल बनाया जा रहा है। इससे महिला समूहों के उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। जशपुर जिले की आदिवासी महिलाओं द्वारा संचालित जशप्योर ब्रांड को भी वैश्विक पहचान दिलाने की कोशिश की जा रही है।

महतारी गौरव वर्ष को राज्य में महिला सशक्तिकरण की बड़ी पहल माना जा रहा है। सरकार का फोकस साफ है कि महिलाओं को मजबूत बनाकर राज्य के विकास को नई गति दी जाए। आने वाले समय में यह पहल छत्तीसगढ़ की सामाजिक और आर्थिक तस्वीर को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है।

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