बेशकीमती लकड़ियों की लूट से वीरान हुए छत्तीसगढ़ के जंगल, ग्रामीणों की शिकायतों के बाद भी प्रशासन मौन

Umeshwari Baghel | Apr 27, 2026, 14:59 IST
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छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में वन माफिया और लकड़ी तस्करों ने जंगलों को बर्बाद कर दिया है। फ्लाइंग स्क्वायड की टीम ने सागौन और साल के बेशकीमती पेड़ों की कटाई के ठूंठ पाए।

NEWS IN SHORT

  • छत्तीसगढ़ के जंगलों में वन माफिया का आतंक
  • फ्लाइंग स्क्वायड टीम की जांच में मिली सागौन और साल के ठूंठ
  • पीपरखूंटी और आमानाला बीट में स्थिति बेहद गंभीर है
  • वन तस्कर वर्षों से जंगलों को करते आ रहे बर्बाद
  • ग्रामीणों की शिकायतें अनसुनी, तस्करों का दबदबा जारी

NEWS IN DETAIL

Bilaspur। Chhattisgarh News :छत्तीसगढ़ के गोरेला पेंड्रा मरवाही जिले के मरवाही वन मंडल में वन माफिया और लकड़ी तस्करों का आतंक जारी है। राजधानी रायपुर से आई फ्लाइंग स्क्वायड की टीम ने जब जंगलों का निरीक्षण किया



तो वे भी हैरान रह गए। यहां सागौन और साल के बेशकीमती पेड़ों को काटकर ठूंठ बना दिया गया है। लाखों रुपए कीमत की लकड़ी तस्कर चुपके से जंगल से पार कर गए हैं। अब इस इलाके में जहां देखो वहां सिर्फ ठूंठ ही ठूंठ दिखाई दे रहे हैं।



माफिया का जंगलों में खौ़फनाक दबदबा

मरवाही वन मंडल के जंगलों में वन माफिया का हमला साफ नजर आ रहा है। फ्लाइंग स्क्वायड की टीम ने जब इन जंगलों का दौरा किया, तो उन्हें सागौन और साल के घने जंगलों में केवल कटे हुए पेड़ और ठूंठ मिले।



पेड़ों की काटाई के लिए तस्कर इलेक्ट्रॉनिक आरा मशीन का इस्तेमाल कर रहे थे, जिससे यह बात साफ है कि यहां की वन संपत्ति को सख्ती से काटा गया है। अफसरों और कर्मचारियों के बीच माफिया के साथ मिलीभगत की संभावना को नकारा नहीं जा सकता।



पीपरखूंटी बीट में भयानक स्थिति

वन विभाग की जांच टीम जब पीपरखूंटी बीट में पहुंची तो उन्होंने वहां की स्थिति देखकर हैरानी जताई। जांच दल ने देखा कि यहां 122 से ज्यादा ठूंठ पड़ी हुई हैं।



इन ठूंठों को गिनते हुए अधिकारी यह अंदाजा लगाने की कोशिश कर रहे थे कि ये कटाई कितने दिनों से चल रही है। इस दौरान जांच टीम ने यह भी पाया कि तस्करों ने इन जंगलों में वर्षों से कब्जा जमा रखा था और अब इस क्षेत्र को वीरान बना दिया गया है।



आमानाला और ठाढ़ पथरा बीट में भी गंभीर स्थिति

पीपरखूंटी के बाद जब टीम ठाढ़ पथरा और आमानाला बीट में पहुंची, तो वहां की हालत भी बहुत खराब मिली। घने जंगल जो बाहर से सुंदर दिखते थे, अंदर से पूरी तरह नष्ट हो चुके थे।



इन दोनों बीटों में तस्करों ने सागौन और साल के पेड़ों को काटकर जंगलों को पूरी तरह वीरान बना दिया है। ये इलाके अब बेजान नजर आते हैं और बेशकीमती लकड़ी की तस्करी के कारण इनकी हालत बहुत खराब हो गई है।



ग्रामीणों की शिकायतें और प्रशासन की चुप्पी

ग्रामीणों ने जांच दल को बताया कि यह कटाई कई सालों से चल रही थी, लेकिन जब उन्होंने इस बारे में अफसरों को जानकारी दी तो उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की।



तस्करों का इतना दबदबा था कि ग्रामीण भी इस पर कोई कदम उठाने में असमर्थ थे। उन्हें डर था कि अगर उन्होंने विरोध किया तो तस्कर ;उन्हें नुकसान पहुंचा सकते हैं।



निष्कर्ष

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के इन जंगलों में वन माफिया की बढ़ती सक्रियता से न केवल पर्यावरण को भारी नुकसान हो रहा है, बल्कि इस इलाके के इकोसिस्टम पर भी



गंभीर असर पड़ रहा है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और माफिया का यह प्रभाव कब समाप्त होता है।



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