छत्तीसगढ़ में ब्लैक लिस्टेड कंपनी से दवा सप्लाई, एमपी, राजस्थान में लगी पाबंदी
Raipur. छत्तीसगढ़ के सरकारी अस्पतालों के लिए दवाओं की खरीद को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। मध्य प्रदेश और राजस्थान समेत सात राज्यों में ब्लैकलिस्ट की जा चुकी एक दवा कंपनी यूनिक्योर इंडिया लिमिटेड से छत्तीसगढ़ में लगातार करोड़ों रूपए की दवाएं खरीदी गईं।
बताया जा रहा है कि हर महीने करीब 6 करोड़ रूपए की दवाओं की आपूर्ति इसी कंपनी से हुई। हैरानी की बात है कि पहले भी छत्तीसगढ़ में इस कंपनी को ब्लैक लिस्टेड किया गया था लेकिन अब इसी कंपनी से दवा की खरीदी हुई। सीजीएमएससी पर दवा खरीदी को लेकर कई बार सवाल उठ चुके हैं। दवा घोटाले की जांच भी चल रही है। इसके बाद भी प्रदेश में इस तरह की लापरवाही सामने आ रही है। यह सीधे-सीधे लोगों की जान से खिलवाड़ है।
ब्लैकलिस्टेड कंपनी से दवा खरीद:
जानकारी के अनुसार यूनिक्योर इंडिया लिमिटेड से लगभग 184 प्रकार की दवाओं की सप्लाई की जा रही थी। बताया जा रहा है कि मध्य प्रदेश लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने गुणवत्ता संबंधी शिकायतों के बाद कंपनी को वर्ष 2026 तक ब्लैकलिस्ट किया था।
राजस्थान में भी इस कंपनी की कुछ दवाएं गुणवत्ता परीक्षण में फेल हुई थीं। वहां भी इस कंपनी को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया। इसके बावजूद छत्तीसगढ़ में उससे दवा खरीदी जारी रहने पर सवाल उठ रहे हैं।
सात राज्यों में ब्लैकलिस्टेड :
यह कंपनी केरल,त्रिपुरा,जम्मू कश्मीर और तमिलनाडु समेत सात राज्यों में ब्लैकलिस्टेड है। दवा खरीद से जुड़े जानकारों का कहना है कि यदि किसी कंपनी को गुणवत्ता या अन्य गंभीर कारणों से किसी राज्य में ब्लैकलिस्ट किया जाता है और वह दूसरे राज्य की सरकारी एजेंसी को भी दवाएं सप्लाई कर रही हो, तो संबंधित एजेंसी को उसकी गुणवत्ता रिपोर्ट और अन्य तथ्यों की समीक्षा करनी चाहिए।
आवश्यकता पड़ने पर सप्लाई पर रोक लगाने जैसी कार्रवाई भी की जा सकती है। मामले में यह भी सामने आया है कि दिल्ली में चिकित्सा उपकरण और दवा खरीद से जुड़े कथित 650 करोड़ रूपए के घोटाले की जांच के दौरान भी कई कंपनियों और अधिकारियों पर कार्रवाई हुई थी। शिकायतों के आधार पर संबंधित अधिकारियों और स्वास्थ्य कर्मियों को नोटिस जारी किए गए थे और खरीद प्रक्रिया की जांच की जा रही है।
लोगों की जान से खिलवाड़ :
दवा गुणवत्ता विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी अस्पतालों में दी जाने वाली दवाओं की गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता सीधे मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है। यदि किसी कंपनी के खिलाफ गुणवत्ता संबंधी गंभीर शिकायतें या कार्रवाई हो चुकी है, तो अन्य राज्यों को भी सतर्कता बरतते हुए आवश्यक समीक्षा करनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर ब्लैकलिस्टिंग जैसे प्रावधानों पर विचार करना चाहिए।
सीजीएमएससी की सफाई :
इस मामले में सीजीएमएससी ने सफाई दी है। कार्पोरेशन का कहना है कि सीजीएमएससी से मिली जानकारी के अनुसार फर्म यूनिक्योर इंडिया लिमिटेड द्वारा 18 मई 2026 को छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कारपोरेशन लिमिटेड को सूचना प्रदान की गई थी।
इसके अनुसार फर्म को मध्यप्रदेश पब्लिक हेल्थ सर्विसेस कारपोरेशन लिमिटेड भोपाल द्वारा दिनांक 08 मई 2026 को दवा Lactulose Solution IP 10 gm/15 ml -100 ml bottle के 3 बैचों को शासकीय प्रयोगशालाओं द्वारा गुणवत्ता परीक्षण में अमानक घोषित किये जाने के कारण फर्म को ब्लैकलिस्ट किया गया है।
इस दवा के एक बैच का मध्यप्रदेश पब्लिक हेल्थ सर्विसेस कारपोरेशन लिमिटेड भोपाल द्वारा पूर्व में ही Product blacklisting किये जाने से दवा Lactulose Solution IP 10 gm/15 ml -100 ml bottle के दर अनुबंध को छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कारपोरेशन लिमिटेड की निविदा नियमानुसार ब्लॉक कर सम्बंधित क्रयादेशों को निरस्त किये जाने की कार्यवाही की गयी थी।
फर्म यूनिक्योर इंडिया लिमिटेड द्वारा प्रेषित सूचना के साथ संलग्न ब्लैकलिस्टिंग आदेश में यह भी उल्लेखित है कि यह आदेश, पूर्व में क्रय की गयी या जारी किये जा चुके क्रयादेशों पर लागू नहीं होगा, बशर्ते वे गुणवत्ता मानकों के अनुरूप हों।
फर्म द्वारा सप्लाई की गई दवाओं का छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कारपोरेशन लिमिटेड के अनुबंधित NABL प्रयोगशालाओं से मानक गुणवत्तायुक्त रिपोर्ट पाए जाने पर दवा का वितरण किया गया है। ब्लैकलिस्टिंग आदेश की सूचना प्राप्त होने के बाद फर्म से कोई नवीन दर अनुबंध और नई दवा खरीदी आदेश जारी नहीं किया गया है।
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