मदर्स डे : अंगदान में माताओं ने रचा इतिहास, 351 में से 131 बार आगे आईं माताएं
NEWS IN SHORT
- छत्तीसगढ़ में 351 में से 131 अंगदान माताओं ने किए.
- कुल अंगदान के मामलों में माताओं की 37% हिस्सेदारी है.
- सौतेली मां ने किडनी दान कर बेटी को नया जीवन दिया.
- पिछले पांच वर्षों में अंगदान का ग्राफ लगातार बढ़ा है.
- विशेषज्ञों के अनुसार माताएं त्याग और समर्पण का प्रतीक हैं.
NEWS IN DETAIL
कहते हैं कि ईश्वर हर जगह नहीं हो सकता, इसलिए उसने मां बनाई। इस कहावत को छत्तीसगढ़ की माताओं ने एक बार फिर सच कर दिखाया है। हालिया आंकड़ों ने यह साबित कर दिया है कि जब बात अपने बच्चों की जिंदगी बचाने की आती है, तो मां न केवल भावनात्मक रूप से, बल्कि शारीरिक त्याग में भी सबसे आगे रहती है।
राज्य में पिछले पांच वर्षों के दौरान हुए अंगदान के आंकड़ों ने एक सुखद और भावुक कर देने वाली तस्वीर पेश की है। कुल 351 अंगदान के मामलों में से 131 मामलों में दानदाता माताएं रही हैं। यानी लगभग 37.32% हिस्सेदारी सिर्फ माताओं की है। यह आंकड़ा स्पष्ट करता है कि अंगदान जैसे साहसी निर्णय में महिलाएं, विशेषकर माताएं, पुरुषों और परिवार के अन्य सदस्यों से कहीं आगे हैं।
पांच साल का रिपोर्ट कार्ड: बढ़ता ग्राफ
अंगदान के क्षेत्र में माताओं का योगदान साल-दर-साल बढ़ा है। आंकड़ों पर नजर डालें तो:
2021: कुल 60 मामलों में से 24 माताओं ने अंगदान किया।
2022: यह संख्या बढ़कर 28 हुई।
2023: 90 मामलों में 30 माताओं ने हिस्सेदारी निभाई।
2024: 88 मामलों में 28 माताएं आगे आईं।
2025 (अब तक): 78 मामलों में से 21 माताओं ने जीवनदान दिया।
कुल मिलाकर, 351 जीवनरक्षक सर्जरी में 131 बार एक मां ने अपने शरीर का हिस्सा देकर अपने बच्चे की सांसों को टूटने से बचाया।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
अंगदान के इस रुझान पर डॉ. देवेंद्र नायक का कहना है कि भारतीय संस्कृति में मां को त्याग और समर्पण का प्रतीक माना गया है। भावनात्मक और नैसर्गिक रूप से मां अपने परिवार और बच्चों के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील होती है। जब भी बच्चों को किडनी या लिवर जैसे अंगों की आवश्यकता होती है, तो माताएं बिना किसी डर के सबसे पहले जांच के लिए खुद को प्रस्तुत करती हैं।
जागरूकता की जरूरत: अंगदान क्या है?
अंगदान मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है। पहला लिविंग डोनर, जिसमें एक स्वस्थ व्यक्ति अपनी एक किडनी या लिवर का एक हिस्सा दान कर सकता है। दूसरा कैडेवर डोनेशन, जो मृत्यु (ब्रेन डेड) के बाद किया जाता है। एक ब्रेन डेड व्यक्ति के अंगदान से आठ लोगों को नया जीवन मिल सकता है।
छत्तीसगढ़ की ये माताएं आज समाज के लिए प्रेरणा हैं, जो न सिर्फ जन्म देती हैं, बल्कि जरूरत पड़ने पर अपने अंगों से बच्चों को दोबारा जीवन भी देती हैं।
निष्कर्ष
मदर्स डेअंगदान के आंकड़े बताते हैं कि माताएं न केवल भावनात्मक रूप से, बल्कि शारीरिक त्याग में भी सबसे आगे हैं. 'सौतेली' जैसे शब्दों से परे, उनका समर्पण समाज के लिए एक प्रेरणा है. यह प्रवृत्ति छत्तीसगढ़ में अंगदान के प्रति बढ़ती जागरूकता और मातृशक्ति के असीम त्याग को रेखांकित करती है.
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