हसदेव का तारा कोल ब्लॉक भी अडानी के हवाले, 3 साल पहले सरकार ने जताई थी आपत्ति

Arun Tiwari | Sept 08, 2026, 18:36 IST
तारा कोल ब्लॉक नीलामी
मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में कोयला खदानों की हालिया नीलामी को लेकर सियासत तेज हो गई है। हसदेव अरण्य स्थित तारा कोल ब्लॉक को अडानी समूह से जुड़ी कंपनी ने हासिल किया है। वहीं, एमपी की डोंगरी ताल और मंडला साउथ खदानों की भी नीलामी हुई।

मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में कोयला खदानों की हालिया नीलामी ने एक बार फिर कोयला, जंगल और बड़े कारोबारी समूहों को लेकर बहस छेड़ दी है। खास तौर पर छत्तीसगढ़ का तारा कोल ब्लॉक इसलिए चर्चा में है क्योंकि तीन साल पहले इसी ब्लॉक को नीलामी से बाहर करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने केंद्र से आग्रह किया था।



तब सरकार ने पर्यावरणीय कारणों और हसदेव अरण्य क्षेत्र की वन संपदा का हवाला दिया था। अब उसी तारा ब्लॉक को अडानी एंटरप्राइजेज की स्टेप-डाउन पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी ने 37.50 फीसदी राजस्व हिस्सेदारी की बोली पर हासिल किया है।



केंद्रीय कोयला मंत्रालय ने कोयला खदान नीलामी के परिणाम जारी किए। इसमें कुल छह कोयला ब्लॉक नीलाम हुए। इनमें मध्यप्रदेश की डोंगरी ताल और मंडला साउथ जबकि छत्तीसगढ़ की तारा खदान शामिल है।



2023 में सरकार की आपत्ति, 2026 में फिर नीलामी :

तारा ब्लॉक की कहानी सीधे तौर पर इस नीलामी को खास बनाती है। वर्ष 2023 में केंद्र सरकार ने तारा को व्यावसायिक कोयला खदानों की नीलामी के सातवें दौर में रखा था। इसके बाद तत्कालीन छत्तीसगढ़ सरकार ने केंद्र को पत्र लिखकर राज्य के नौ कोयला ब्लॉकों को नीलामी से बाहर रखने का अनुरोध किया था।



इनमें तारा भी शामिल था। उस समय राज्य में भूपेश सरकार थी। सरकार की आपत्ति का प्रमुख आधार पर्यावरणीय संवेदनशीलता थी। तारा ब्लॉक हसदेव अरण्य क्षेत्र में स्थित है।



2023 में सामने आए सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक ब्लॉक के क्षेत्र में करीब 81 फीसदी वन आवरण बताया गया था। छत्तीसगढ़ सरकार के अनुरोध के बाद केंद्रीय कोयला मंत्रालय ने तारा ब्लॉक को उस समय की नीलामी प्रक्रिया से वापस ले लिया था।



अब बदला नाम और बदला बोलीदाता :

तीन साल बाद केंद्र सरकार ने इसे Tara (Revised) के नाम से फिर नीलामी में रखा। इस बार सफल बोलीदाता बनी CG Syn-Gas & Chemicals Limited कोयला मंत्रालय के अनुसार तारा के लिए सरकार ने 4 फीसदी का रिजर्व प्राइस रखा था, लेकिन नीलामी में अंतिम बोली 37.50 फीसदी तक पहुंच गई।



यानी विजेता कंपनी ने निर्धारित न्यूनतम राजस्व हिस्सेदारी से 33.50 प्रतिशत अंक अधिक की बोली लगाई। यह नीलामी में शामिल छह ब्लॉकों में सबसे ऊंची अंतिम बोली थी।



तारा की विजेता कंपनी का कॉरपोरेट कनेक्शन इस पूरी कहानी को और महत्वपूर्ण बनाता है। CG Syn-Gas & Chemicals Limited सीधे अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड की स्टेप-डाउन पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है।



मध्यप्रदेश की दो खदानें भी नीलाम :

इसी नीलामी में मध्यप्रदेश की दो खदानें भी नीलाम हुईं। सिंगरौली की Dongeri Tal-II मध्ययप्रदेश के सिंगरौली कोलफील्ड क्षेत्र में है। इसके लिए रिजर्व प्राइस 5 फीसदी था।



नीलामी में Gallantt Ispat Limited ने 6.50 फीसदी की राजस्व हिस्सेदारी की अंतिम बोली लगाकर इसे हासिल किया। दूसरी खदान मंडला साउथ जिसका संबंध पेंच कान्हा कोलफील्ड से है।



यह छिंदवाड़ा जिले में आती है। इसका रिजर्व प्राइस 4 फीसदी था और Qube Commercial Private Limited ने इसे 4.50 फीसदी की अंतिम बोली लगाकर हासिल किया।



भूपेश बघेल का तंज :

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि बधाई हो अडानीगढ़ के CEO सह छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जी!छत्तीसगढ़ को अडानीगढ़ बनाने की दिशा में आपने एक कदम और बढ़ा लिया है। 2023 में हमारी सरकार ने जिस तारा ब्लॉक की नीलामी पर आपत्ति कर उसकी नीलामी नहीं होने दी थी, आपने इस बार इसकी नीलामी हो जाने दी।



छत्तीसगढ़ के विनाश को रूपरेखा बनाते हुए आपने देश में दूसरे सबसे घने जंगल वाले कोल ब्लॉक तारा को अब अपने अडानी जी के हवाले कर दिया है। तारा ब्लॉक हमारी जीवन वायु है जिसका लगभग 80 फीसदी क्षेत्र अत्यधिक घने जंगल वाला क्षेत्र है। देश के कुल क्षेत्रफल में ऐसे जंगल 2 फीसदी भी नहीं हैं।



इसके साथ ही हसदेव अरण्य में 10 लाख और पेड़ काटे जाने का रास्ता साफ हो गया है। अडानी पहले से ही लगभग 25 लाख पेड़ों की बलि देने की तैयारी में है। अब हसदेव बांगो बांध के अस्तित्व पर भी बड़ा खतरा मंडरा रहा है। छत्तीसगढ़ की बर्बादी के पापियों को न छत्तीसगढ़ महतारी क्षमा करेगी न छत्तीसगढ़ की जनता।



बीजेपी का जवाब :

बीजेपी के मुख्य प्रदेश प्रवक्ता एवं सांसद संतोष पाण्डेय ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर हमला बोला है। पाण्डेय ने कहा कि तारा कोल ब्लॉक और हसदेव अरण्य को लेकर बघेल का बयान कांग्रेस के चरम राजनीतिक दोगलेपन और पाखण्ड का खुला प्रमाण है।



जिस हसदेव और तारा कोल ब्लॉक के नाम पर आज भूपेश बघेल बड़ी बड़ी बातें कर रहे हैं उसकी नींव खुद कांग्रेस की यूपीए सरकार ने रखी थी। पाण्डेय ने कहा कि तारा कोल ब्लॉक का आवंटन किसी को बैकडोर से नहीं दिया गया, बल्कि भारत सरकार की खुली, प्रतिस्पर्धी और पारदर्शी ई-नीलामी के तहत हुआ है।



यह केवल नीलामी का चरण है, खनन शुरू होने से पहले सभी कड़े वैधानिक एवं पर्यावरणीय नियमों की पूर्ति अनिवार्य है। पाण्डेय ने कहा कि हमारी सरकार ने पिछले 2 वर्षों में 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान के तहत 7 करोड़ पौधे लगाए हैं।



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