एमपी,छत्तीसगढ़ के आला अफसरों ने बनाई रेंटल प्रॉपर्टी, मकान,दुकान के किराए से हो रही लाखों की कमाई
NEWS IN SHORT
- आला अफसर की लाखों में है रेंटल इनकम
- आईएएस,आईपीएस,आईएफएस की किराये से कमाई
- रेंटल प्रॉपर्टी पर रहा है फोकस
- जमीन,मकान,दुकान से हो रही कमाई
NEWS IN DETAIL
Raipur. एमपी और छत्तीसगढ़ के आईएएस,आईपीएस और आईएफएस अफसरों की प्रॉपर्टी में जमीन,मकान के साथ ही दुकानें भी शामिल हैं। किसी को जमीन से तो किसी को मकान तो किसी को दुकान के किराये से लाखों की इनकम होती है।
इन अफसरों की प्रॉपर्टी डीटेल में इनकी रेंटल प्रॉपर्टी और उससे मिलने वाले किराए की भी जानकारी दी हुई है। किसी किसी अफसर को तो 2 से 3 लाख तक की मंथली इनकम होती है। इनमें मुख्य सचिव और डीजीपी जैसे ओहदेदार अफसर भी शामिल हैं।
यानी इन अफसरों ने निवेश के मामले में रेंटल प्रॉपर्टी को भी तवज्जो दी है। किसी की पैतृक संपत्ति से कमाई है तो किसी ने प्रॉपर्टी खरीदकर उसे किराये पर दिया हुआ है। कई अफसरों की रेंटल प्रॉपर्टी में उनके भाई बंधुओं का कई अफसरों की पत्नी का शेयर भी है।
आला अफसर बने रेंटल किंग :
भारतीय प्रशासनिक, पुलिस और वन सेवा के आला अफसर अब केवल सरकारी जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि निवेश के जरिए मजबूत आय के स्रोत भी तैयार कर रहे हैं। कई वरिष्ठ अधिकारियों ने रियल एस्टेट में निवेश कर रेंटल इनकम का बड़ा नेटवर्क खड़ा कर लिया है।
मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के इन अफसरों की सालाना किराये से होने वाली आय लाखों रुपए में पहुंच चुकी है। अफसरों द्वारा घोषित संपत्ति विवरणों में यह साफ दिखाई देता है कि उन्होंने जमीन, मकान और दुकानों में निवेश किया है।
इन संपत्तियों से उन्हें नियमित रूप से किराया मिल रहा है। किसी अफसर की आय जमीन के लीज से हो रही है, तो किसी को शहरी इलाकों में बने मकानों से हर महीने मोटी रकम मिलती है। वहीं कई अधिकारियों ने बाजारों में दुकानें खरीदकर उन्हें किराये पर दिया है जिससे स्थायी आय का जरिया बन गया है।
सीएस और डीजीपी भी शामिल :
खास बात यह है कि कुछ अफसरों की मासिक रेंटल इनकम 2 से 3 लाख रुपए तक बताई जा रही है। यानी सालाना आधार पर यह आय 20 से 30 लाख रुपए तक पहुंच रही है। इस सूची में केवल मध्यम स्तर के अधिकारी ही नहीं, बल्कि मुख्य सचिव और डीजीपी जैसे शीर्ष पदों पर बैठे अधिकारी भी शामिल हैं।
इससे यह स्पष्ट होता है कि उच्च पदों पर बैठे अफसर भी निवेश के मामले में काफी सक्रिय हैं और रियल एस्टेट को सुरक्षित विकल्प मानते हैं। इन अफसरों की संपत्तियों का एक और पहलू यह है कि कई मामलों में यह प्रॉपर्टी पैतृक है, जिससे उन्हें किराया मिल रहा है। वहीं कई अधिकारियों ने खुद निवेश कर नई संपत्तियां खरीदी हैं और उन्हें किराये पर चढ़ा दिया है। इससे उनकी अतिरिक्त आय लगातार बढ़ रही है।
एमपी के आईएएस अफसरों की रेंटल इनकम:
अलका उपाध्याय - 6 लाख 31 हजार रुपए
अशोक बर्णवाल - 23 लाख 68 हजार रुपए
नीरज मंडलोई - साढ़े 4 लाख रुपए
संजय दुबे - 41 लाख रुपए
संजय शुक्ला - साढ़े 8 लाख रुपए
एमपी के आईपीएस अफसरों की रेंटल इनकम:
अजय कुमार शर्मा - 32 लाख 30 हजार रुपए
अनिल कुमार - 15 लाख रुपए
आलोक रंजन - 5 लाख 18 हजार रुपए
उपेंद्र कुमार जैन - 3 लाख 25 हजार रुपए
वरुण कपूर - 5 लाख 12 हजार रुपए
एमपी के आईएफएस असफरों की रेंटल इनकम:
बिभाष कुमार ठाकुर - 3 लाख 34 हजार रुपए
मनोज कुमार अग्रवाल - 10 लाख 80 हजार रुपए
बिंदु शर्मा - 7 लाख 13 हजार रुपए
अर्चना शुक्ला - 3 लाख 76 हजार रुपए
प्रकाश उन्हाले - 10 लाख 78 हजार रुपए
छत्तीसगढ़ के आईएएस अफसरों की रेंटल इनकम:
रिचा शर्मा - गुड़गांव में फ्लैट का किराया 6 लाख रुपए
रेणु पिल्लै - नया रायपुर में घर का किराया 2 लाख 68 हजार रुपए
मनोज पिंगुआ - एग्रीकल्चर जमीन और रेसीडेंशियल फ्लैट से शेयरिंग में 10 लाख 80 हजार रुपए कमाई
विकास शील - उत्तराखंड और रायपुर के घर से किराया 7 लाख 12 हजार
गौरव द्वेदी - रायपुर के मकान से किराया 3 लाख 60 हजार रुपए
छत्तीसगढ़ के आईपीएस अफसरों की रेंटल इनकम:
अरुणदेव गौतम - एग्रीकल्चर लैंड और घर का किराया 1 लाख 90 हजार
पवन देव - जमीन और घर का किराया 1 लाख 74 हजार रुपए
प्रदीप गुप्ता - यूपी के फ्लैट का किराया 3 लाख 60 हजार रुपए
विवेकानंद - बिहार,झारखंड की जमीन और घर का किराया 2 लाख 8 हजार रुपए
दिपांशु काबरा - आवासीय घरों से किराया 18 लाख रुपए
छत्तीसगढ़ के आईएफएस अफसरों की रेंटल इनकम :
तपेश कुमार झा - रायपुर के फ्लैट से 3 लाख 60 हजार किराया
अनिल कुमार साहू - नया रायपुर के घर से किराया 4 लाख 84 हजार रुपए
अरुण कुमार पांडे - नया रायपुर में फ्लैट से किराया 3 लाख 60 हजार रुपए
प्रेम कुमार - जमीन और घर से किराया 7 लाख 64 हजार रुपए
संजीता गुप्ता - रायपुर के घर से कमाई 2 लाख 94 हजार रुपए
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विशेषज्ञों का मानना है कि रियल एस्टेट में निवेश लंबे समय से सुरक्षित और स्थिर आय का जरिया माना जाता रहा है। यही वजह है कि सरकारी सेवा में होने के बावजूद अफसर इस क्षेत्र में निवेश कर रहे हैं। किराये से होने वाली नियमित आय न केवल आर्थिक सुरक्षा देती है, बल्कि भविष्य के लिए मजबूत वित्तीय आधार भी तैयार करती है।
मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के अफसरों का यह रुझान बताता है कि अब सरकारी नौकरी के साथ-साथ निवेश की समझ भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो गई है। रेंटल प्रॉपर्टी के जरिए ये अधिकारी लाखों की कमाई कर रहे हैं और अपने वित्तीय पोर्टफोलियो को मजबूत बना रहे हैं।
निष्कर्ष :
परिवार की भूमिका भी इन निवेशों में अहम है। कई अधिकारियों की रेंटल प्रॉपर्टी में उनके माता,पिता, भाई-बंधुओं या पत्नी की साझेदारी भी दर्ज है। इससे यह संकेत मिलता है कि संपत्ति निवेश को परिवार के स्तर पर प्लान किया गया है। यह आय का सुरक्षित जरिया माना जा सकता है।
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