नगरनार प्लांट प्रबंधन मौन : फसलों पर जा रहा स्टील प्लांट का काला पानी
समझें क्या है पूरा मामला
जगदलपुर के कस्तूरी गांव में खरीफ सीजन शुरू होते ही किसानों पर दोहरी मार पड़ी है। 110 किसानों ने सहकारी समितियों से करीब एक करोड़ रुपए का कृषि ऋण लेकर धान की खेती की तैयारी की थी। इसी बीच नगरनार स्टील प्लांट से निकलने वाला कथित काला अपशिष्ट जल फिर उनके खेतों तक पहुँच गया है। किसानों ने खुद मिट्टी डालकर पानी का रास्ता रोका था लेकिन हल्की बारिश में ही यह बांध बह गया। अब करीब 250 एकड़ कृषि भूमि पर बोवाई करना लगभग नामुमकिन हो गया है।
मिट्टी का बांध, पहली बारिश में बहा
किसानों ने कुछ दिन पहले अपने स्तर पर मिट्टी डालकर अपशिष्ट जल का रास्ता बंद किया था। लेकिन हल्की बारिश में ही यह मिट्टी बह गई और काला पानी दोबारा खेतों में फैलने लगा। ग्रामीणों का कहना है कि यह पहली घटना नहीं है। कई सालों से बरसात शुरू होते ही प्लांट का पानी खेतों में पहुँच जाता है।
हर साल शिकायत, हर साल वही समस्या
ग्रामीणों के अनुसार हर साल प्रशासन और प्लांट प्रबंधन से शिकायत की जाती है, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं निकलता। इस बार अफसरों ने मौके का निरीक्षण किया और जाँच व मदद का भरोसा दिया था। लेकिन कई दिन बीतने के बाद भी न तो कोई संयुक्त जाँच दल पहुँचा और न ही नुकसान का आकलन शुरू हुआ।
एक करोड़ का कर्ज, अब फसल खतरे में
खरीफ सीजन के लिए 110 किसानों ने सहकारी समितियों से करीब एक करोड़ रुपए का कृषि ऋण लिया है। बीज, खाद, जुताई और मजदूरी पर खर्च पहले ही शुरू हो चुका है। अगर खेतों में काला पानी भरने से फसल प्रभावित हुई तो उत्पादन घटेगा और किसानों के सामने कर्ज चुकाने का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।
जमीन की उर्वरक क्षमता घट रही है
किसानों के मुताबिक सबसे बड़ी चिंता केवल इस साल की फसल नहीं बल्कि जमीन का भविष्य है। लगातार अपशिष्ट जल आने से खेतों की उर्वरक क्षमता साल-दर-साल कम हो रही है। पहले जहाँ प्रति एकड़ बेहतर उत्पादन मिलता था, वहाँ अब पैदावार कम होने लगी है। कई किसानों का दावा है कि मिट्टी की बनावट बदल रही है और खेतों में लंबे समय तक पानी ठहरने लगा है, जिससे खेती की लागत बढ़ रही है।
प्लांट प्रवक्ता का जवाब — मेल पर पूछो सवाल
नगरनार प्लांट के प्रबंधन का पक्ष जानने के लिए प्लांट के प्रवक्ता रफीक अहमद से बात की गई। उन्होंने पहले किसानों की समस्या सुनी, फिर मामले को जिला प्रशासन पर डालने लगे। जब उनसे आधिकारिक तौर पर बयान माँगा गया तो उन्होंने सवाल मेल पर लिखकर भेजने और जवाब भी मेल पर देने की बात कही।
किसानों की चार माँगें
किसानों ने प्रशासन से चार माँगें रखी हैं। पहली — प्रभावित खेतों का तत्काल सर्वे कराया जाए। दूसरी — मिट्टी और पानी की स्वतंत्र वैज्ञानिक जाँच कराई जाए। तीसरी — फसल नुकसान का मुआवजा दिया जाए। चौथी — प्लांट के पानी को खेतों तक पहुँचने से रोकने के लिए स्थायी तकनीकी व्यवस्था बनाई जाए। किसानों का कहना है कि हर साल अस्थायी समाधान किया जाता है, कभी मिट्टी डाल दी जाती है तो कभी पानी का रुख मोड़ा जाता है, लेकिन पहली बारिश में ही यह व्यवस्था ध्वस्त हो जाती है।
FAQ
- जगदलपुर के कस्तूरी गांव में किसानों की समस्या क्या है?
उ. NMDC के नगरनार स्टील प्लांट से निकलने वाला कथित काला अपशिष्ट जल हर बरसात में किसानों के खेतों में फैल जाता है। किसानों द्वारा बनाया गया मिट्टी का अस्थायी बांध पहली बारिश में ही बह गया, जिससे 250 एकड़ कृषि भूमि प्रभावित हुई है। - NMDC क्या है और इसकी स्थापना कब हुई थी?
उ. NMDC यानी National Mineral Development Corporation भारत सरकार की एक नवरत्न कंपनी है जिसकी स्थापना 1958 में हुई थी। यह देश की सबसे बड़ी लौह अयस्क उत्पादक कंपनी है और इस्पात मंत्रालय के अधीन काम करती है। छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में इसकी प्रमुख खदानें और संयंत्र स्थित हैं। - नगरनार स्टील प्लांट कहाँ है और इसकी क्षमता कितनी है?
उ. नगरनार स्टील प्लांट छत्तीसगढ़ के जगदलपुर के पास स्थित है। यह NMDC का एकीकृत इस्पात संयंत्र है जिसकी क्षमता लगभग 30 लाख टन प्रति वर्ष है। यह बस्तर क्षेत्र की सबसे बड़ी औद्योगिक परियोजनाओं में गिना जाता है।
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