अमित जोगी का नकटी पर सवाल, माननीय बंगले बनाएंगे या मुनाफे पर जमीन बेचेंगे

Arun Tiwari | Jun 30, 2026, 15:43 IST
अमित जोगी का नकटी पर सवाल 2026
छत्तीसगढ़ के नकटी गांव में विधायकों के बंगलों के लिए गरीबों के घर हटाने का मामला राजनीतिक विवाद में बदल गया है। अमित जोगी, टीएस सिंहदेव, विकास उपाध्याय सहित कई नेताओं ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

Raipur. छत्तीसगढ़ का नकटी इस समय बड़ा मुद्दा बन गया है। विधायकों के बंगलों के लिए गरीबों का आशियाना छीना जा रहा है। सरकार की तरफ से भले ही बयान न आ रहे हों लेकिन दूसरी पार्टियां इसका खुलकर विरोध कर रही हैं। विपक्षी नेता मुखर होकर लोगों के समर्थन में और सरकार की खिलाफत में आगे आ गए हैं।



पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी ने सवाल पूछा है कि क्या विधायक यहां अपने बंगले बनाएंगे या फिर बड़े मुनाफे पर तोहफे में मिली जमीन बेच देंगे। वहीं टीएस सिंहदेव ने कहा कि सरकार शासन संभालने का नैतिक अधिकार खो चुकी है।



बेघर परिवारों को जमीन लौटाने का साहस दिखाएं :

अमित जोगी ने नकटी के मुद्दे पर कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने विधायकों से गंभीर सवाल पूछे हैं। जोगी ने कहा कि नकटी के उजड़े 80 घरों के बाद अब केवल एक सवाल बचता है। जिन माननीय विधायकों और सांसदों के लिए यह ज़मीन खाली कराई गई, उनके सामने अब केवल तीन विकल्प बचते हैं।



  1. स्वयं वहाँ अपने बंगले बनाएँ।
  2. उन्हें उपहार में मिली इस ज़मीन को कई गुना मुनाफ़े पर बेच दें।
  3. या फिर इन बेघर परिवारों के आँसुओं में भीगी इस “भेंट” को लौटाने का नैतिक साहस दिखाएँ।

यह प्रश्न किसी एक दल से नहीं, दोनों दलों के सभी विधायकों और सांसदों से है। केवल घड़ियाली आँसू मत बहाइए। यदि नकटी के लोगों के साथ अन्याय हुआ है, तो उस अन्याय का लाभ लेने से भी इंकार कीजिए। ज़मीन लौटाइए। 2016 में मरवाही का विधायक होने के नाते मेरे सामने भी ऐसा ही एक विकल्प था।



सेरीखेड़ी में मुझे भी एक भूखंड आवंटित किया गया था। मैंने उसे स्वीकार नहीं किया। आज भी वह भूखंड खाली पड़ा है। बाकी लगभग सभी लोग वहाँ या तो अपने घर बना चुके हैं, या भारी मुनाफ़ा कमाकर अपने भूखंड बेच चुके हैं। राजनीति की असली परीक्षा भाषणों से नहीं, निर्णयों से होती है। अब निर्णय आपका है।



सरकार ने खोया नैतिक अधिकार :

वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता टीएस सिंहदेव ने कहा कि नकटी गांव में ठीक बरसात के मौसम के पहले इस असंवेदनशील कार्यवाही की मैं निंदा करता हूँ। सरकार ने छत्तीसगढ़ के नागरिकों के हितों पर लगातार कुठाराघात कर शासन सम्हालने का नैतिक अधिकार खो दिया है। वहीं कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव ने कहा कि भाजपा सरकार ने नकटी के ग्रामीणों के पीठ में छुरा घोपने का काम किया है।



पहले सांसद विधायक ने ग्रामीणों को विश्वास में लिया कि बिना व्यवस्थापन किसी को बेघर नहीं किया जाएगा और रातों रात फोर्स भेजकर पूरे गांव को छावनी में तब्दील कर दिया गया और घरों पर बुलडोजर चला दिया गया। कांग्रेस पार्टी प्रभावितों के साथ खड़ी है। विष्णुदेव सरकार को इस अन्याय का जवाब देना होगा।



विकास उपाध्याय ने बताया आंखों देखा हाल :

कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने नकटी के मंजर का आंखों देखा हाल बताया। उन्होंने कहा, रात करीब 11:30 बजे मैं स्वयं रायपुर नकटी गांव पहुँचा। वहाँ का मंजर देखकर मन व्यथित हो गया। कई परिवार खुले आसमान के नीचे रात बिताने को मजबूर हैं।



कोई पेड़ के नीचे सो रहा है तो कोई अपने टूटे हुए घर के मलबे के पास रो रहा है। महिलाएँ, बच्चे और बुज़ुर्ग बेबस नज़र आए। प्रभावित लोगों का कहना है कि आधी रात को बिजली काटकर बुलडोजर चलाया गया। उनका आरोप है कि पुनर्वास के जो वादे किए गए थे, वे ज़मीन पर पूरे नहीं दिख रहे।



कई परिवारों का कहना है कि 12–14 सदस्यों के परिवार को केवल एक कमरा दिया गया है, जहाँ न बिजली है, न पीने के पानी की व्यवस्था और न ही शौचालय की सुविधा।



सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब लोग रो रहे हैं, बिलख रहे हैं और खुले आसमान के नीचे रात गुज़ार रहे हैं, तब रायपुर के सांसद बृजमोहन अग्रवाल, रायपुर पश्चिम के विधायक राजेश मूणत, रायपुर पश्चिम ग्रामीण (या संबंधित क्षेत्र) के विधायक अनुज शर्मा और विधायक मोतीलाल साहू कहाँ हैं? प्रभावित लोग पूछ रहे हैं कि आखिर उनकी पीड़ा सुनने कौन आएगा?



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