छत्तीसगढ़ नान घोटाला ; 11 साल बाद शुरू होगा ट्रायल, EOW ने कोर्ट में लगाई अर्जी

Aishwarya Dwivedi | May 15, 2026, 09:12 IST
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NAN Scam Trial to Resume Petition in Court
NAN Scam Trial to Resume Petition in Court

छत्तीसगढ़ का 11 साल पुराना नान घोटाला दोबारा शुरू होने जा रहा है। व्हाट्सएप चैट के कारण सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगी रोक हटने के बाद EOW ने ट्रायल पिटीशन दायर कर दी है।

NEWS IN SHORT

  • 11 साल पुराने नान घोटाले का ट्रायल फिर शुरू होगा।
  • EOW-एसीबी ने कोर्ट में सुनवाई के लिए पिटीशन दायर की।
  • व्हाट्सएप चैट के कारण सुप्रीम कोर्ट ने लगाई थी रोक।
  • अब तक 172 गवाहों के महत्वपूर्ण बयान दर्ज हुए हैं।
  • चावल परिवहन में प्रति टन 8 रुपये वसूली का आरोप।

NEWS IN DETAIL

छत्तीसगढ़ की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा देने वाला 'नागरिक आपूर्ति निगम' (NAN) घोटाला एक बार फिर सुर्खियों में है। करीब तीन साल तक सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद अब इस हाई-प्रोफाइल केस का कानूनी ट्रायल दोबारा शुरू होने जा रहा है। राज्य की जांच एजेंसी ईओडब्ल्यू-एसीबी (EOW-ACB) ने कोर्ट में ट्रायल पिटीशन दायर कर दी है। जिससे साफ है कि प्रदेश के इस सबसे बड़े आर्थिक घोटाले में अब आरोपियों पर कानूनी शिकंजा कसने वाला है।

सुप्रीम कोर्ट की रोक और व्हाट्सएप चैट का रहस्य

इस मामले की सुनवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने उस वक्त रोक लगाई थी, जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अदालत में कुछ चौंकाने वाले व्हाट्सएप चैट पेश किए थे। ईडी का दावा था कि संवैधानिक पदों पर बैठे प्रभावशाली लोग आरोपियों की मदद कर रहे हैं और गवाहों को डराया-धमकाया जा रहा है ताकि वे बयान बदल दें। हालांकि, पिछले साल सितंबर में सुप्रीम कोर्ट ने इस रोक को हटा लिया था। अब ईओडब्ल्यू द्वारा दायर पिटीशन ने इस सुस्त पड़ी कार्रवाई में नई जान फूंक दी है।

क्या था 2015 का 'नान घोटाला'

यह घोटाला साल 2015 में उस समय उजागर हुआ था जब एसीबी ने नागरिक आपूर्ति निगम के दफ्तरों और अधिकारियों के ठिकानों पर छापेमारी की थी। उस दौरान करीब 2 करोड़ 5 लाख रुपए नकद बरामद हुए थे। जांच में अवैध वसूली का एक व्यवस्थित नेटवर्क सामने आया:

प्रति मीट्रिक टन वसूली: चावल के अवैध परिवहन के लिए प्रति मीट्रिक टन 8 रुपए की वसूली की जाती थी।

रुपए का बंदरबांट: इस वसूली के 4 रुपए जिला मुख्यालय और 4 रुपए नान मुख्यालय भेजे जाते थे।

अधिकारियों की हिस्सेदारी: जांच एजेंसी का दावा है कि महज छह महीने के भीतर ही तत्कालीन आला अफसरों को करोड़ों रुपए की अवैध कमाई हुई। इसके अलावा अनावश्यक ट्रांसपोर्टेशन के जरिए करीब 5 करोड़ रुपए के अतिरिक्त गबन की बात भी सामने आई थी।

172 गवाह और निर्णायक मोड़ पर केस

इस मामले में अब तक 172 गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं और जांच अधिकारी का बयान भी पूरा हो चुका है। केस अब उस निर्णायक मोड़ पर है जहां केवल मुख्य आरोपियों के बयान दर्ज होना बाकी हैं। हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे अंतराल और बीच में उपजे राजनीतिक घटनाक्रमों के कारण कुछ प्रमुख गवाहों के बयान दोबारा भी कराए जा सकते हैं।

राजनीतिक उतार-चढ़ाव और जांच की दिशा

छत्तीसगढ़ में सत्ता परिवर्तन के साथ इस केस की दिशा भी बदलती रही। 2015 में भाजपा सरकार के दौरान मुख्य केस दर्ज हुआ, वहीं 2018 में कांग्रेस सरकार आने पर एक नई एफआईआर दर्ज की गई थी। हालांकि, बाद में ठोस सबूतों के अभाव में दूसरे केस को खत्म कर दिया गया।

अब आगे क्या?

ईओडब्ल्यू-एसीबी के डायरेक्टर अमरेश मिश्रा के अनुसार, ट्रायल वहीं से शुरू होगा जहां रुका था। कोर्ट अब जल्द ही आरोपियों को समन जारी कर उनके बयान दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर सकता है। प्रदेश की जनता और राजनीतिक हलकों की नजरें अब इस ट्रायल पर टिकी हैं, क्योंकि इसके नतीजे कई बड़े चेहरों की किस्मत तय करेंगे।

निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ नान घोटाला 11 साल बाद एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर है। सुप्रीम कोर्ट से रोक हटने और EOW द्वारा ट्रायल पिटीशन दायर करने से जांच में तेजी आई है। 172 गवाहों के बयानों के बाद अब आरोपियों के बयान दर्ज होना शेष हैं, जो इस हाई-प्रोफाइल केस का भविष्य तय करेंगे।

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