नारायणपुर धर्मांतरण विवाद: 26 परिवारों को गांव से निकाला, इस शर्त पर हुई वापसी
छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के भरंडा गांव में धर्मांतरण को लेकर चल रहा विवाद फिलहाल शांत हो गया है। गांव के 26 ईसाई मत को मानने वाले परिवारों को दोबारा गांव में रहने की अनुमति दे दी गई है, और एक महीने का समय दिया गया है, साथ ही इसके लिए कुछ शर्तें तय की गई हैं। समझौते के बाद सभी परिवार अपने घर लौट गए हैं, हालांकि गांव में अभी भी पुलिस बल तैनात है।
क्या है पूरा मामला?
भरंडा गांव में पिछले कई महीनों से आदिवासी ग्रामीणों और ईसाई धर्म अपनाने वाले परिवारों के बीच तनाव बना हुआ था। विवाद उस समय बढ़ गया जब गांव के कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि धर्मांतरण की गतिविधियों के कारण पारंपरिक आदिवासी संस्कृति, रीति-रिवाज और सामाजिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
ग्रामीणों ने ग्रामसभा में चर्चा के बाद 26 धर्मांतरित परिवारों के गांव में रहने पर आपत्ति जताई। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ गया। ईसाई मत को मानने वाले परिवारों का आरोप है कि उन्हें गांव छोड़ने के लिए कहा गया और मंगलवार को घरों से बाहर निकाल दिया गया। जिससे ये परिवार गांव के बाहर खुले में रहने को मजबूर हो गए थे। उन्हें खुले में रात बितानी पड़ी।
प्रशासन और पुलिस ने संभाली स्थिति
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन और पुलिस की टीम गांव पहुंची। लगातार बातचीत और बैठक के बाद दोनों पक्षों के बीच समझौता कराया गया। समझौते के बाद धर्मांतरित परिवारों को गांव लौटने की अनुमति मिल गई।
प्रशासन की मौजूदगी में हुए समझौते के अनुसार गांव में रहने वाले सभी परिवार शांति बनाए रखेंगे और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाली गतिविधियों से दूर रहेंगे।
किन शर्तों पर मिली गांव में रहने की अनुमति?
आदिवासी समाज और धर्मांतरित परिवारों के बीच हुए समझौते में कुछ शर्तें तय की गई हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव के भीतर कोई भी ऐसा कार्यक्रम नहीं होगा जिसे वे धर्मांतरण से जुड़ी गतिविधि मानते हैं। इनमें प्रार्थना सभा, धार्मिक बैठकें और ईसाई परंपरा के अनुसार सामूहिक धार्मिक आयोजन शामिल हैं।
आदिवासी समाज का कहना है कि गांव में पारंपरिक आदिवासी रीति-रिवाज, देवी-देवताओं और सामाजिक मान्यताओं का सम्मान किया जाएगा और किसी प्रकार का विवाद पैदा नहीं होने दिया जाएगा।
ईसाई परिवारों ने लगाए प्रताड़ना के आरोप
ईसाई मत को मानने वाले संत राम दुग्गा, चैतू कुमेटी, मनायकु वट्टी सहित अन्य ग्रामीणों का कहना है कि वे वर्षों से गांव में रह रहे हैं। उनका आरोप है कि धार्मिक विश्वास के कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है और सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ रहा है।
परिवारों का कहना है कि वे गांव छोड़ना नहीं चाहते और अपने घरों में शांति से रहना चाहते हैं।
ग्रामीणों का क्या कहना है?
स्थानीय ग्रामीण फूलबती दूग्गा सहित कई ग्रामीणों का कहना है कि उनके पूर्वज पारंपरिक आदिवासी देवी-देवताओं की पूजा करते थे और वे चाहते हैं कि गांव की सामाजिक परंपराएं बनी रहें। ग्रामीणों के अनुसार धर्मांतरण के कारण गांव में मतभेद बढ़ रहे हैं।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि धर्म परिवर्तन कर चुके लोग आदिवासी समाज की परंपराओं का पालन नहीं करते, जिससे सामाजिक विवाद पैदा हो रहे हैं।
विवाद की टाइमलाइन: कब क्या हुआ?
गांव में तैनात है पुलिस बल
वर्तमान स्थिति को देखते हुए नारायणपुर पुलिस ने गांव में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है। किसी भी तरह के टकराव या अप्रिय घटना को रोकने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस जवान तैनात किए गए हैं। प्रशासन लगातार दोनों पक्षों के संपर्क में है और स्थिति पर नजर रखे हुए है।
बस्तर में धर्मांतरण को लेकर बढ़ रही बहस
बस्तर संभाग में धर्मांतरण का मुद्दा लंबे समय से चर्चा का विषय बना हुआ है। एक ओर आदिवासी संगठन पारंपरिक संस्कृति और पहचान पर असर पड़ने की बात कहते हैं, वहीं दूसरी ओर ईसाई समुदाय से जुड़े लोग धार्मिक स्वतंत्रता और अपने विश्वास के अनुसार जीवन जीने के अधिकार की बात रखते हैं।
फिलहाल भरंडा गांव में प्रशासन की पहल से स्थिति सामान्य हुई है, लेकिन क्षेत्र में यह मुद्दा अभी भी संवेदनशील बना हुआ है।
ये खबरें भी पढ़ें...
दुर्ग धर्मांतरण विवाद: बजरंग दल पर अश्लील हरकत का आरोप,महिला आयोग ने एसपी को लिखा पत्र
रायगढ़: पति ने हिंदू पत्नी पर बनाया धर्मांतरण का दबाव, बेटे से लगवाए पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे
नारायणपुर धर्मांतरण विवाद : शहर बंद का ऐलान, 20 जून को रैली-चक्काजाम
छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण विवाद, बजरंग दल और मसीही समाज में तनाव, जामुल थाने का घेराव