नए रैपर में लपेटी पुरानी फेल योजना, स्टेट कैपिटल रीजन अथॉरिटी का पहला प्रोजेक्ट सवालों के घेरे में
News in Short :
- नवा रायपुर में फिर शेयरिंग साइकिल योजना
- स्टेट कैपिटल रीजन से 30 करोड़ रुपए का बना प्रस्ताव
- 10 करोड़ रुपए की सरकार ने दी स्वीकृति
- 2016 में शेयरिंग साइकिल योजना हो चुकी है फेल
- एनआरडीए के तहत 45 करोड़ हो चुके हैं बर्बाद
- कबाड़ की हालत में हैं श्रीलंका से आई 130 साइकिलें
News in Detail :
Raipur. छत्तीसगढ़ स्टेट कैपिटल रीजन की पहली योजना सवालों के घेरे में है। अथॉरिटी पहले प्रोजेक्ट के तहत नवा रायपुर में शेयरिंग साइकिल चलवाने वाली है। जिसके लिए अथॉरिटी 30 करोड़ रुपए खर्च करने वाली हैं। सरकार से 10 करोड़ रुपए की स्वीकृति भी मिल गई है। अब सवाल उठ रहा हैं कि जब 2016 में लागू शेयरिंग साइकिल योजना (Bicycle Sharing Scheme) फेल हो गई तो इसे फिर पैसे क्यों खर्च किए जा रहे?
क्या है योजना?
सरकार, दिल्ली-नौएडा की तर्ज पर नवा रायपुर और आस-पास के क्षेत्र को डेवलप कर रही है। छग स्टेट कैपिटल रीजन में दुर्ग-भिलाई को भी जोड़ा गया है। इस बजट में अथॉरिटी को 68 करोड़ रुपए दिया गया है। जिससे जरुरी जमीने अधिग्रहित करने के साथ उसे डेवलप किया जाएगा। इसी के तहत शेयरिगं साइकिल योजना के रुप में पहला प्रोजेक्ट की शुरु किया जा रहा है। इसमें 30 करोड़ रुपए खर्च किए जाने का प्रस्ताव है।
साइकिलें निकाल ली गई हैं
शेयरिंग साइकिल योजना की तैयारी छग स्टेट कैपिटल रीजन बड़ी तेजी से कर रहा है। 10 करोड़ रुपए की स्वीकृति के साथ ही जगह-जगह से साइकिलें निकाल ली गई हैं। ये 130 साइकिलें श्रीलंका से मंगाई गई थीं। ये साइकिलें 2016 में लागू योजना के तहत आई थीं। उस दौरान योजना का संचालन एक निजी कंपनी कर रही थी। अब फिर जगह-जगह योजना दोबारा शुरु करने के बोर्ड लगा दिए गए हैं।
पैसे के कारण लोगों की रुचि नहीं
एनआरडीए ने साइकिलिंग को प्रमोट करने के लिए पहले आधा घंटा फ्री साइकिल ऑफर की थी। उसके बाद लोगों से साइकिल इस्तेमाल करने के पैसे लिए जा रहे थे। यह ऑफर बड़ी फांस बन गया, क्योंकि ज्यादातर लोगों ने इसी ट्रायल टाइम में साइकिलें उठाई और आधा घंटा चलाकर जमा कर दिया।
रखरखाव भी बनी बड़ी समस्या
वीकेंड में तो फ्री वाले स्लॉट में स्टैंड खाली हो रहे थे। लेकिन पेमेंट करके साइकिलिंग का शौक कम लोगों ने ही दिखाया। साइकिलों की चोरी और तोड़फोड़ से भी लोग साइकिल इस्तेमाल नहीं कर रहे थे। इसके अलावा रखरखाव की कमी, तकनीकी खराबी के कारण योजना फ्लॉप हुई।
नवा रायपुर में यहां साइकिलें स्टेंड
महानदी भवन, नार्थ ब्लॉक-ए, नार्थ ब्लॉक-बी, एकात्म पथ, इंद्रावती भवन, सेक्टर-17, सेक्टर-27 (ए), सेक्टर - 27 (बी), सेक्टर - 29 (ए), और सेक्टर - 29 (बी)
नया आईडिया भी काम नहीं आया
नए रायपुर में योजना फेल होने के बाद अफसरों ने नया आईडिया लगाया। बताया कि घने शहर में इसका ज्यादा रिस्पांस मिलेगा। फिर मरीन ड्राइव और नगरघड़ी चौक से कलेक्टोरेट चौराहे तक साइकिल ट्रैक बनाया गया। लेकिन वह पैसे भी बर्बाद हो गए।
पुराने शहर के ट्रैक पर कब्जे
कोरोना काल के दौरान रायपुर शहर के साइकिल ट्रैक बनाया गया। स्मार्ट सिटी के तहत इसे प्रमोट करने की कवायद हुई। साइकिलोंथॅन का आयोजन हुआ। करोड़ों खर्च करने की निगरानी ऐसी हुई कि उस पर कब्जे हो गए। ट्रैक के लिए बनाई गई बैरिकेंडिंग को भी चोर रात में काट ले गए।
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