6 करोड़ के इनामी रहे पूर्व नक्सल नेता भूपति बने यूनिवर्सिटी में को-ऑर्डिनेटर

Harrison Masih | Sept 05, 2026, 18:07 IST
भूपति बने यूनिवर्सिटी को-ऑर्डिनेटर
पूर्व नक्सली कमांडर भूपति को गोंडवाना यूनिवर्सिटी में आदिवासी अध्ययन और अनुसंधान केंद्र का को-ऑर्डिनेटर बनाया गया है। करोड़ों के इनामी रहे भूपति ने 2025 में सरेंडर किया था।

कभी नक्सली संगठन के बड़े रणनीतिकार माने जाने वाले मल्लोजुला वेणुगोपाल राव उर्फ भूपति अब मुख्यधारा की जिंदगी में नई भूमिका निभाने जा रहे हैं। गढ़चिरौली की गोंडवाना यूनिवर्सिटी में उन्हें आदिवासी अध्ययन और अनुसंधान केंद्र का को-ऑर्डिनेटर बनाया गया है।



भूपति पर छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में करोड़ों रुपये का इनाम घोषित था। वह लंबे समय तक माओवादी संगठन से जुड़ा रहा और जंगलों में सक्रिय रहा। अब नक्सलवाद का रास्ता छोड़ने के बाद उसे आदिवासी समाज, संस्कृति और उनकी समस्याओं से जुड़े अध्ययन और शोध की जिम्मेदारी दी गई है।



आदिवासी अध्ययन केंद्र में करेंगे काम

भूपति को गोंडवाना यूनिवर्सिटी के Tribal Studies and Research Centre में को-ऑर्डिनेटर की जिम्मेदारी मिली है। यहां वह आदिवासी संस्कृति, इतिहास, ग्रामीण जीवन और लोगों की समस्याओं से जुड़े विषयों पर काम करेंगे।



उनके लंबे जमीनी अनुभव को देखते हुए यूनिवर्सिटी में उन्हें यह जिम्मेदारी दी गई है। वह छात्रों को मार्गदर्शन देने और शोध से जुड़े काम में भी सहयोग करेंगे।



2025 में किया था सरेंडर

भूपति ने 15 अक्टूबर 2025 को महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में हथियार डालकर आत्मसमर्पण किया था। बताया गया कि उसने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सामने मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया।



सरेंडर के दौरान भूपति ने अपनी AK-47 भी जमा की थी। इसके बाद से वह सामान्य जीवन में लौटने की कोशिश कर रहा है।



कभी नक्सली संगठन का बड़ा रणनीतिकार था

मल्लोजुला वेणुगोपाल राव को माओवादी संगठन के वरिष्ठ नेताओं और रणनीतिकारों में गिना जाता था। वह छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और तेलंगाना के सीमावर्ती इलाकों में लंबे समय तक सक्रिय रहा।



वह माओवादी संगठन की शीर्ष निर्णय लेने वाली इकाई से भी जुड़ा रहा था। लंबे समय तक जंगलों में रहने के कारण उसे संगठन की जमीनी गतिविधियों और आदिवासी इलाकों की अच्छी जानकारी थी।



बचपन से शिक्षक बनना चाहते थे भूपति

भूपति ने एक बातचीत में बताया कि बचपन से ही उनका सपना शिक्षक बनने का था। अब यूनिवर्सिटी में जिम्मेदारी मिलने के बाद उनका यह सपना पूरा होने की बात कही जा रही है।



उन्होंने यह भी बताया कि कभी उनका सपना भारतीय सेना में जाने का था, लेकिन परिस्थितियों ने उन्हें नक्सली आंदोलन की ओर धकेल दिया।



नई भूमिका से क्या संदेश?

भूपति को यूनिवर्सिटी में जिम्मेदारी दिए जाने को नक्सलवाद छोड़कर मुख्यधारा में लौटने वालों के लिए एक संदेश के तौर पर भी देखा जा रहा है। प्रशासन की कोशिश है कि आत्मसमर्पण करने वाले लोग सामान्य जीवन में लौटकर समाज के लिए काम करें।



हालांकि, भूपति को यूनिवर्सिटी में जिम्मेदारी दिए जाने को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे मुख्यधारा में लौटे व्यक्ति को नई शुरुआत देने का अवसर मान रहे हैं, जबकि कुछ लोग उनके पुराने नक्सली रिकॉर्ड को लेकर सवाल उठा रहे हैं।



फिलहाल, कभी जंगलों में हथियार के साथ सक्रिय रहे भूपति अब किताबों और शोध से जुड़ी भूमिका में नजर आएंगे। यह उनके जीवन में आए बड़े बदलावों में से एक है।



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