नर्सिंग एडमिशन पर संकट, कॉलेजों की गड़बड़ी का खामियाजा भुगत रहे छात्र
छत्तीसगढ़ में नर्सिंग की पढ़ाई का सपना देख रहे हजारों विद्यार्थियों के सामने एडमिशन का संकट खड़ा हो गया है। कॉलेजों की मान्यता, नियमों के पालन और प्रवेश प्रक्रिया में देरी के बीच सबसे ज्यादा नुकसान उन छात्रों का हो सकता है, जो महीनों से प्रवेश की तैयारी कर रहे हैं। भारतीय नर्सिंग काउंसिल (INC) की कार्रवाई के बाद निजी नर्सिंग कॉलेजों की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। दूसरी ओर, चिकित्सा शिक्षा संचालनालय (DME) की प्रवेश प्रक्रिया को लेकर विद्यार्थियों में असमंजस है।
30 सितंबर तक प्रवेश का नियम
INC की 5 जुलाई 2021 की अधिसूचना के आधार पर नर्सिंग शैक्षणिक सत्र 1 अगस्त से शुरू करने और प्रवेश प्रक्रिया 30 सितंबर तक पूरी करने का प्रावधान बताया जा रहा है। इस समय सीमा को लेकर छात्रों में चिंता है। प्रवेश प्रक्रिया में आवेदन, मेरिट सूची, काउंसलिंग, सीट आवंटन और कॉलेज में दाखिले के चरण शामिल होते हैं। देरी होने पर विद्यार्थियों को तैयारी और पढ़ाई शुरू करने के बीच कम समय मिल सकता है। लागू नियमों और इस सत्र की आधिकारिक समय-सारिणी को DME को स्पष्ट करना होगा।
125 से ज्यादा कॉलेज, फिर भी अव्यवस्था?
छत्तीसगढ़ में कुल लगभग 110 से अधिक नर्सिंग कॉलेज हैं, जिनमें सरकारी और निजी (प्राइवेट) दोनों शामिल हैं और कुल सीटों की संख्या लगभग 5,000 से 7,000 के बीच है।
राज्य में 125 से अधिक नर्सिंग कॉलेज उसके प्रशासनिक दायरे में हैं। छत्तीसगढ़ में लगभग 13 से 17 सरकारी कॉलेज संचालित हैं । इनमें सरकारी सीटों की संख्या लगभग 800 से 1,000 के आसपास है। राज्य में 90 से अधिक प्राइवेट नर्सिंग कॉलेज हैं, जिनमें बीएससी नर्सिंग, पोस्ट बेसिक बीएससी नर्सिंग और जीएनएम (GNM) के पाठ्यक्रम संचालित होते हैं। प्राइवेट कॉलेजों में सीटों की कुल संख्या 55,00 - 57,00 के बीच है।
सरकारी और निजी संस्थानों की बड़ी संख्या के बीच प्रवेश प्रक्रिया का समन्वय विभाग की अहम जिम्मेदारी है। जिसमें बीएससी नर्सिंग, पोस्ट बेसिक बीएससी नर्सिंग और जीएनएम की पढ़ाई होती है
INC की सूची से 42 संस्थान बाहर
भारतीय नर्सिंग काउंसिल ने छत्तीसगढ़ के 42 नर्सिंग संस्थानों को मान्यता या सूची से हटाने की कार्रवाई की है। इनमें रायपुर के 15 कॉलेज बताए जा रहे हैं। यह कार्रवाई किन-किन मानकों और संस्थानों पर लागू हुई, इसका असर विद्यार्थियों के प्रवेश और पढ़ाई पर किस तरह पड़ेगा, यह स्पष्ट होना जरूरी है। छात्रों का सवाल है कि अगर कॉलेज नियमों के मुताबिक संचालित नहीं हो रहे थे, तो उनकी निगरानी समय पर क्यों नहीं की गई?
कॉलेजों की जानकारी पर भी सवाल
नर्सिंग संस्थानों की मान्यता और नियमों के पालन को लेकर विभागीय स्तर पर सवाल पहले भी उठते रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कुछ कॉलेजों से उनके पते और जरूरी विवरण मांगे गए थे। कई बार पत्र भेजने के बाद भी जवाब नहीं मिलने की बात सामने आई है। अगर संस्थान अपनी बुनियादी जानकारी तक उपलब्ध नहीं करा रहे थे, तो उनकी मान्यता और संचालन की जांच किस स्तर पर हुई, यह बड़ा सवाल है। हालांकि, सभी 35 निजी कॉलेजों के नियमों का उल्लंघन करने का निष्कर्ष संबंधित जांच रिकॉर्ड के बिना नहीं निकाला जा सकता।
फीस, हॉस्टल और भविष्य की चिंता
प्रवेश में देरी होने पर विद्यार्थियों के सामने फीस जमा करने, हॉस्टल की व्यवस्था और पढ़ाई शुरू होने की तारीख को लेकर दिक्कतें खड़ी हो सकती हैं। दूसरे संस्थानों में प्रवेश की समय सीमा निकलने पर विकल्प भी सीमित हो सकते हैं। छात्रों की मांग है कि DME जल्द पूरी काउंसलिंग प्रक्रिया का शेड्यूल जारी करे और यह बताए कि प्रवेश में देरी होने पर पढ़ाई कब शुरू होगी।
सबसे बड़ा सवाल: जिम्मेदारी किसकी?
कॉलेजों की मान्यता और नियमों में गड़बड़ी का असर छात्रों पर पड़ना गंभीर मुद्दा है। अब विभाग को यह स्पष्ट करना होगा कि किन कॉलेजों पर क्या कार्रवाई हुई, कितने विद्यार्थी प्रभावित हो सकते हैं और प्रवेश प्रक्रिया किस तारीख तक पूरी होगी। जांच, कार्रवाई और समयबद्ध एडमिशनइन तीनों पर स्पष्ट जवाब के बिना छात्रों की चिंता दूर नहीं होगी।
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