छत्तीसगढ़ नर्सिंग काउंसिल में फर्जीवाड़ा: निलंबित रजिस्ट्रार पर FIR दर्ज
छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं का एक गंभीर मामला सामने आया है। राज्य नर्सिंग काउंसिल की निलंबित रजिस्ट्रार दुर्गावती उसारे के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। आरोप है की कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर धोखाधड़ी करने और नियमों को ताक पर रखकर निजी नर्सिंग कॉलेजों को मान्यता दी गई है। इस खुलासे ने प्रदेश के स्वास्थ्य और शिक्षा जगत में हड़कंप मचा दिया है।
फर्जी दस्तावेजों से दी गई मान्यता
गोलबाजार थाने में दर्ज मामले के अनुसार, यह पूरा घोटाला मार्च 2022 से अप्रैल 2026 के बीच का है। आरोप है कि अपने कार्यकाल के दौरान दुर्गावती उसारे ने पद का दुरुपयोग करते हुए कई निजी संस्थानों को नर्सिंग कॉलेज संचालित करने की अनुमति दी।
जांच में पाया गया कि इन कॉलेजों को मान्यता देने के लिए जिन दस्तावेजों का उपयोग किया गया, वे फर्जी (कूटरचित) थे। विभागीय मापदंडों को पूरी तरह दरकिनार कर इन संस्थानों को लाभ पहुँचाया गया। जिससे न केवल शासन को भारी आर्थिक क्षति हुई, बल्कि नर्सिंग शिक्षा की गुणवत्ता के साथ भी खिलवाड़ किया गया।
जांच रिपोर्ट ने खोली पोल
इस घोटाले की परतें तब खुलनी शुरू हुईं जब नर्सिंग संचालनालय में पदस्थ उप संचालक डॉ. निधि ग्वालरे ने विभाग को एक विस्तृत जांच रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट में उन सभी विसंगतियों और वित्तीय अनियमितताओं का कच्चा चिट्ठा पेश किया गया, जो दुर्गावती उसारे के कार्यकाल के दौरान हुईं। रिपोर्ट के आधार पर शासन ने सख्त रुख अपनाते हुए पुलिस कार्रवाई के निर्देश दिए।
भारतीय न्याय संहिता के तहत कार्रवाई
पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए निलंबित रजिस्ट्रार के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) के तहत अपराध पंजीबद्ध किया है। जांच अधिकारियों का कहना है कि यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं हो सकता, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा गठजोड़ होने की संभावना है।
पुलिस अब उन निजी कॉलेजों की सूची तैयार कर रही है जिन्हें संदिग्ध रूप से मान्यता दी गई थी। साथ ही, यह भी जांचा जा रहा है कि इन फर्जीवाड़ों के बदले कितनी बड़ी राशि का लेनदेन हुआ है।
सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल
नर्सिंग काउंसिल जैसे महत्वपूर्ण संस्थान में हुए इस फर्जीवाड़े ने सिस्टम की पारदर्शिता और निगरानी प्रक्रिया पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारों का कहना है कि यदि समय रहते कागजों की बारीकी से जांच की जाती, तो इतने लंबे समय तक यह खेल नहीं चल पाता। वर्तमान में आरोपी रजिस्ट्रार निलंबित हैं और पुलिस जल्द ही उनसे पूछताछ कर सकती है।
इस मामले में कई अन्य विभागीय अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। छत्तीसगढ़ सरकार ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाई जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उस पर कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। अब देखना यह है कि जांच की आंच कहां तक पहुँचती है।
निष्कर्ष
नर्सिंग काउंसिल घोटाला सिस्टम की खामियों और सत्ता के दुरुपयोग का प्रमाण है। निलंबित रजिस्ट्रार पर दर्ज FIR नर्सिंग शिक्षा की गुणवत्ता और पारदर्शिता बनाए रखने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इस कार्रवाई से स्पष्ट है कि फर्जीवाड़े के जरिए भविष्य के स्वास्थ्य कर्मियों के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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