सरकार ने छिपाई अफसरों की संपत्ति, जीएडी के पोर्टल में नहीं खुल रही प्रॉपर्टी की लिंक
Raipur. केंद्र की मोदी सरकार हर साल आईएएस,आईपीएस और आईएफएस अफसरों की संपत्ति को सार्वजनिक करती है। लेकिन राज्य की विष्णु सरकार इसके उलट काम कर रही है। राज्य सरकार भी राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसरों की संपत्ति की जानकारी हर साल लेती है। लेकिन इसको सार्वजनिक नहीं करती है।
द सूत्र ने इसकी पड़ताल की तो पता चला कि सामान्य प्रशासन विभाग में अफसरों की संपत्ति के विवरण की लिंक ही नहीं खुल रही है। इस लिंक में एरर आ रहा है। विभाग ने इसे निजी और गोपनीय जानकारी बताकर अफसरों की संपत्ति पर पर्दा डाल दिया है।
मोदी के उलट राज्य सरकार :
केंद्र सरकार जहां हर साल भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), भारतीय पुलिस सेवा (IPS) और भारतीय वन सेवा (IFS) के अधिकारियों की संपत्ति का ब्योरा सार्वजनिक करती है। वहीं छत्तीसगढ़ में राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की संपत्ति संबंधी जानकारी आम लोगों की पहुंच से बाहर दिखाई दे रही है।
सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के पोर्टल पर अधिकारियों की वार्षिक संपत्ति विवरण (Annual Property Return) से जुड़ी लिंक खुल नहीं रही है, जिससे पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। द सूत्र की पड़ताल में सामने आया कि सामान्य प्रशासन विभाग की वेबसाइट पर अधिकारियों की संपत्ति संबंधी जानकारी देखने के लिए उपलब्ध कराई गई लिंक पर क्लिक करने पर एरर मैसेज दिखाई देता है। जिससे आम नागरिक, सामाजिक संगठन या सूचना के अधिकार के तहत पारदर्शिता की मांग करने वाले लोग अधिकारियों की संपत्ति का विवरण नहीं देख पा रहे हैं।
हर साल मांगा जाता है संपत्ति का ब्यौरा :
जानकारी के अनुसार राज्य सरकार हर वर्ष राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों से उनकी चल-अचल संपत्तियों का विवरण प्राप्त करती है। यह प्रक्रिया सेवा नियमों के तहत अनिवार्य है, ताकि अधिकारियों की संपत्ति में होने वाले बदलाव का रिकॉर्ड रखा जा सके।
हालांकि यह जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं होने के कारण यह यह साफ नहीं हो पा रहा कि जानकारी को सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा है। पारदर्शिता के समर्थकों का कहना है कि सार्वजनिक पदों पर बैठे अधिकारियों की संपत्ति संबंधी जानकारी नागरिकों के लिए उपलब्ध होना जवाबदेही सुनिश्चित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।
केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) की वेबसाइट पर आईएएस अधिकारियों के संपत्ति विवरण सार्वजनिक रूप से देखे जा सकते हैं। इसी तरह आईपीएस और आईएफएस अधिकारियों की संपत्ति संबंधी जानकारियां भी संबंधित केंद्रीय पोर्टलों पर उपलब्ध रहती हैं।
क्या कहती है सरकार :
वहीं सामान्य प्रशासन विभाग का पक्ष है कि अधिकारियों की संपत्ति संबंधी जानकारी निजी और गोपनीय प्रकृति की है। विभाग के उपसचिव क्लेमेंटिना लकड़ा कहते हैं कि यह बेहद निजी और कान्फडेंशियल जानकारी है,इसलिए इसे सार्वजनिक नहीं किया जाता। वे कहते हैं कि जीएडी की वेबसाइट पर इसे अपलोड ही नहीं किया जाता।
हालांकि सवाल यह है कि जब पोर्टल पर संपत्ति विवरण के लिए अलग से लिंक बनाई गई है, तो उसका उद्देश्य क्या था और यदि जानकारी सार्वजनिक नहीं की जानी थी तो उसे वेबसाइट पर प्रदर्शित क्यों किया गया।
जीरो टॉलरेंस की नीति पर सवाल :
इस पूरे मामले ने शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर नई बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तकनीकी कारणों से लिंक काम नहीं कर रही है तो सरकार को इसे तत्काल दुरुस्त कर जानकारी उपलब्ध करानी चाहिए।
वहीं यदि जानकारी को जानबूझकर सार्वजनिक नहीं किया जा रहा है तो सरकार को इस संबंध में स्पष्ट नीति और कारण बताने चाहिए। फिलहाल जीएडी पोर्टल पर संपत्ति विवरण की लिंक बंद होने से राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की संपत्ति संबंधी जानकारी आम जनता की पहुंच से बाहर है और इस पर सरकार की चुप्पी कई सवालों को जन्म दे रही है। सवाल यही है कि जब सरकार भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है तो फिर अफसरों की संपत्ति पर पर्देदारी क्यों की जा रही है।
FAQ
- क्या केंद्र सरकार अधिकारियों की संपत्ति सार्वजनिक करती है?
हाँ, केंद्र सरकार हर साल IAS, IPS और IFS अधिकारियों की संपत्ति का विवरण सार्वजनिक करती है, जिसे संबंधित सरकारी पोर्टलों पर देखा जा सकता है। - छत्तीसगढ़ में अधिकारियों की संपत्ति सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही है?
राज्य सरकार का पक्ष है कि राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की संपत्ति संबंधी जानकारी निजी और गोपनीय होती है, इसलिए इसे सार्वजनिक नहीं किया जाता और सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) की वेबसाइट पर भी इसे उपलब्ध नहीं कराया गया है। - GAD पोर्टल पर संपत्ति जानकारी क्यों नहीं दिख रही है?
इस मामले ने पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जानकारी सार्वजनिक नहीं करनी थी तो पोर्टल पर लिंक क्यों दी गई, और यदि दी गई है तो उसे सही तरीके से काम करना चाहिए।
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