खुले गड्ढों से 10 बच्चों की मौत, अब निगमों को हर महीने देनी होगी रिपोर्ट
Harrison Masih | Jul 13, 2026, 17:51 IST
खुले गड्ढों की रिपोर्ट 2026
छत्तीसगढ़ में खुले गड्ढे और अधूरे निर्माण बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं। पिछले पांच वर्षों में खुले गड्ढों में गिरने से 10 से ज्यादा बच्चों की मौत हो चुकी है। शासन ने सभी नगर निगम आयुक्तों को हर महीने गड्ढों की रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं।
समझें क्या है पूरा मामला
पांच साल में 10 से ज्यादा बच्चों की जान
किसी भी निर्माण वाली जगह पर खोदे गए गड्ढों की बेरिकेडिंग, ग्रीन नेट लगाने और लोगों की आवाजाही रोकने का नियम वर्षों से लागू है, लेकिन नगर निगमों और अन्य निकायों ने इसे कागजों तक ही सीमित कर दिया।
नतीजा यह है कि पिछले पांच वर्षों में प्रदेश में 10 से अधिक बच्चों की जान खुले गड्ढों में गिरने से जा चुकी है।
पिछले 4 साल की बड़ी घटनाएं और मौतें
2025 में रायपुर के गुलमोहर पार्क में खुले सोकपिट में सात वर्षीय दिव्यांश की मौत हुई, दो बच्चे बच गए।
2025 में ही रायपुर के कबीर नगर में निजी बिल्डिंग के गड्ढे में 8 साल के सत्यम और 10 साल के आलोक की मौत हो गई।
2025 में मोहला-मानपुर जिले के छींझपहाड़ी में नए खुदे तालाब में तीन बच्चे डूब गए। 2025 में जगदलपुर के परपा में पत्थर खदान में गिरने से दो बच्चों की मौत हुई।
2026 में गरियाबंद के स्थानीय ग्राम में डंपिंग गड्ढे में गिरने से भाई-बहन की डूबने से मौत हो गई।
शहीद स्मारक के पास नाला खुला है
बढ़ईपारा-ताततपारा मार्ग पर निजी निर्माण के लिए खोदे गए बड़े गड्ढे भी बिना प्रभावी बेरिकेडिंग के खुले पड़े मिले। बारिश में इनमें पानी भरने से खतरा और बढ़ गया है।
क्या है कानून और क्या होना चाहिए
निजी या सरकारी किसी भी प्रोजेक्ट को लेकर गड्ढे बने हों तो उन्हें चारों तरफ से बांसबल्ली से बेरिकेटिंग करनी है। अधूरे निर्माणों के भीतर बच्चों के पहुंचने के रास्ते बंद करने होंगे। साथ ही ग्रीन नेट लगाना भी अनिवार्य है।
इसी तरह यदि सड़क किनारे पाइपलाइन या सीवरेज इत्यादि का काम चल रहा हो और गड्ढे हैं तो उसके चारों ओर बेरिकेडिंग करनी है। एक्ट में इसका प्रावधान है।
शासन का सख्त पत्र
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