सरकारी योजना पर लापरवाही की मार, कृषक केंद्र में पड़ी-पड़ी सड़ गई लाखों की दवा और खाद
Pravesh Shukla | Aug 06, 2025, 19:21 IST
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छत्तीसगढ़ के गरियाबंद के नागाबुड़ा स्थित कृषक सूचना केंद्र में लाखों रुपये की कीटनाशक, फफूंदनाशक, जैविक खाद और कल्चर लंबे समय तक बंद कमरे में पड़ी-पड़ी सड़ गई।
गरियाबंद। जिले केनागाबुड़ास्थित कृषक सूचना केंद्र में लाखों रुपये कीकीटनाशक,फफूंदनाशक, जैविक खाद औरकल्चरलंबे समय तक बंद कमरे में पड़ी-पड़ी सड़ गई।
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हालत यह हो गई कि सामग्री से बदबू फैलने लगी और भवन खुद जर्जर होने लगा। स्थिति बिगड़ने पर ग्राम पंचायत ने इसेट्रैक्टरमें लादकर गांव के बाहर फिंकवा दिया।
जानकारी के मुताबिक यह कृषि सामग्री किसानों को खेती में आधुनिक तकनीक की जानकारी देने के लिए प्रदर्शनी योजना के तहत खरीदी गई थी। लेकिन जिलामुख्यालयसेमहज6किमीदूर स्थित इस केंद्र में कई साल तक धूल खाती पड़ी रही और आखिरकार अनुपयोगी हो गई।
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नागाबुड़ाकेउपसरपंचतोमससाहू ने बताया कि बारिश के चलते दवाओं में सड़न शुरू हो गई थी। कमरे का दरवाजा खराब हो चुका था और आसपास के क्षेत्र में बदबू फैलने लगी थी। पास ही स्थितउपस्वास्थ्यकेंद्र आने वाले लोग भी परेशान थे।
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कई बार प्रशासन को पत्र लिखा गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। आखिरकारगांववालोंसे सहमति बनाकर इन दवाओं को गांव के बाहर फेंक दिया गया। ताकि बदबू और गंदगी से निजात मिले और भवन का सही उपयोग हो सके।
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बताया जा रहा है कि फेंकी गई सामग्री तीनट्रैक्टरट्रॉलियोंमें भरकर लेजाईगई, जिसकी अनुमानित कीमत 7 लाख रुपये से ज्यादा हो सकती है। कृषि विभाग द्वारा पिछले 10 साल से किसानों को धान और दलहन उत्पादन में तकनीकी सहायता देने हेतु यह सामग्री मुफ्त में वितरित की जानी थी, लेकिन जमीन पर इसका उपयोग नहीं हो सका।
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गांव के बाहर फेंकी सामग्री
प्रदर्शनी योजना से हुई थी खरीदी
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बारिश में बर्बाद हुईं दवाएं
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पत्र लिखा लेकिन नतीजा सिफर
खबर को पांच प्वॉइंट में समझिए
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किसानों को फ्री में बांटी जानी थी सामग्री
FAQ
- सवाल: कृषक सूचना केंद्र में खराब हुई जैविक खाद (Organic
Fertilizer ) की जिम्मेदारी किसकी है?
जवाब: जवाब: यह कृषि विभाग की लापरवाही का परिणाम है। सामग्री वितरण के बजाय वर्षों तक बंद कमरे में रखी रही, जिससे वह अनुपयोगी हो गई। - सवाल: क्या किसानों को यह जैविक खाद (Organic Fertilizer) मुफ्त में मिलनी थी?
जवाब: हां, यह सभी सामग्री किसानों को तकनीकी सहायता के तहत निःशुल्क दी जानी थी। - सवाल: क्या आगे से ऐसी घटनाएं रोकी जा सकती हैं?
जवाब: हां, यदि प्रशासन समय पर निगरानी रखे और पंचायत को नियमित जानकारी दे तो ऐसी बर्बादी रोकी जा सकती है।
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